बिहार पुलिस में 9,187 कर्मियों को प्रोन्नति, अप्रैल 2026 से कार्यकारी प्रभार के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के गृह एवं पुलिस विभाग ने 1 अप्रैल 2026 से अब तक विभिन्न संवर्गों में कुल 9,187 अधिकारियों और कर्मियों को प्रोन्नति देते हुए कार्यकारी प्रभार सौंपा है। पटना से जारी इस आदेश का उद्देश्य राज्य पुलिस में प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व और कार्यकुशलता को सुदृढ़ करना है। यह राज्य सरकार की ओर से चालू वित्त वर्ष में पुलिस बल के मानव संसाधन प्रबंधन की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा एकल कदम माना जा रहा है।
संवर्गवार प्रोन्नति का विवरण
प्रोन्नति पाने वालों में सर्वाधिक संख्या सहायक अवर निरीक्षक से पुलिस अवर निरीक्षक बनने वाले कर्मियों की है — इस श्रेणी में 6,800 कर्मियों को कार्यकारी प्रभार दिया गया है। इसके अलावा पीटीसी से सहायक अवर निरीक्षक पद पर 1,545 कर्मी और एसएलसी से हवलदार पद पर 79 कर्मी पदोन्नत किए गए हैं।
पुलिस निरीक्षक से डीएसपी पद पर 88 अधिकारियों को कार्यकारी प्रभार सौंपा गया है, जबकि पुलिस अवर निरीक्षक से पुलिस निरीक्षक पद पर एक कर्मी को जिम्मेदारी दी गई है।
परिवहन संवर्ग में भी बड़ी प्रोन्नति
परिवहन संवर्ग में भी उल्लेखनीय संख्या में कर्मियों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है। इसके अंतर्गत चालक हवलदार कोटि में 218, सहायक अवर निरीक्षक (परिवहन) पद पर 107, पुलिस अवर निरीक्षक (परिवहन) पद पर 45 और पुलिस निरीक्षक (परिवहन) पद पर 31 कर्मियों को प्रोन्नति दी गई है।
अन्य विशेष संवर्गों में प्रोन्नति
विशेष संवर्गों में भी प्रोन्नति की प्रक्रिया पूरी की गई है। प्राअनि से प्रापुनि पद पर 112, आशु सअनि से आशु अवर निरीक्षक पद पर 103 तथा आयुधिक हवलदार से आयुधिक अवर निरीक्षक पद पर 50 कर्मियों को कार्यकारी प्रभार मिला है।
लिपिकीय और कार्यालय संवर्ग में भी प्रोन्नति दी गई है — निम्नवर्गीय लिपिक से उच्चवर्गीय लिपिक पद पर दो, उच्चवर्गीय लिपिक से प्रधान लिपिक पद पर एक तथा कार्यालय परिचारी से निम्नवर्गीय लिपिक पद पर पाँच कर्मियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभाग की मंशा और अपेक्षित प्रभाव
विभाग का मानना है कि इस व्यापक प्रोन्नति प्रक्रिया से कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और वे नई जिम्मेदारियों के साथ पुलिस एवं प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे सकेंगे। कार्यों के निष्पादन में तेजी आने और विभाग में नेतृत्व क्षमता विकसित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
गौरतलब है कि बिहार में पुलिस बल में रिक्तियों और कार्यभार के असंतुलन की चर्चा लंबे समय से होती रही है; इस दृष्टि से यह प्रोन्नति चक्र संगठनात्मक ढाँचे को पुनर्संतुलित करने की दिशा में एक ठोस प्रशासनिक पहल है।