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बिहार पुलिस का सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वालों पर शिकंजा, 130 गिरफ्तार और 40 हथियार जब्त

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बिहार पुलिस का सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वालों पर शिकंजा, 130 गिरफ्तार और 40 हथियार जब्त

सारांश

बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वालों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया — डेढ़ महीने में 130 गिरफ्तारियाँ, 102 एफआईआर और 40 हथियार जब्त। जनवरी 2026 से अब तक 514 मामले चिह्नित। हर जिले में सोशल मीडिया सेल और साइबर इकाई चौबीसों घंटे सक्रिय।

मुख्य बातें

बिहार पुलिस ने 1 मई से 14 जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया पर हथियार लहराने के मामलों में 130 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
राज्यव्यापी अभियान में 102 एफआईआर दर्ज और 40 अवैध हथियार जब्त किए गए।
पटना में सर्वाधिक 17 एफआईआर , 29 गिरफ्तारियाँ और 9 हथियार बरामद।
प्रत्येक जिले में समर्पित सोशल मीडिया सेल और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई चौबीसों घंटे सक्रिय।
जनवरी 2026 से अब तक आपत्तिजनक सोशल मीडिया सामग्री के 514 मामले चिह्नित।
मामले आईटी अधिनियम 2000 , बीएनएस , शस्त्र अधिनियम और पीओसीएसओ के तहत दर्ज।

बिहार पुलिस ने 1 मई से 14 जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वाले व्यक्तियों के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान में 130 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, 102 एफआईआर दर्ज की हैं और 40 अवैध हथियार जब्त किए हैं। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल निगरानी तंत्र के ज़रिए की जा रही है, जो चौबीसों घंटे सक्रिय है।

अभियान का दायरा और निगरानी तंत्र

बिहार पुलिस मुख्यालय ने बताया कि प्रत्येक जिले में समर्पित सोशल मीडिया सेल कार्यरत हैं। इसके अलावा राज्य स्तरीय सोशल मीडिया केंद्र और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कई लोग लोकप्रियता बढ़ाने, फॉलोअर्स जुटाने या समाज में भय का माहौल बनाने के लिए हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं।

जिलेवार कार्रवाई का ब्यौरा

पटना में सबसे अधिक 17 एफआईआर दर्ज की गईं, 29 आरोपी गिरफ्तार हुए और 9 हथियार जब्त किए गए। नौगछिया और गोपालगंज में 9-9 एफआईआर दर्ज हुईं — नौगछिया में 7 गिरफ्तारियाँ और 3 हथियार बरामद हुए, जबकि गोपालगंज में 8 लोग गिरफ्तार किए गए। सीतामढ़ी और मोतिहारी में 8-8 मामले दर्ज हुए, जिनमें 9 गिरफ्तारियाँ और प्रत्येक जिले से 1-1 हथियार बरामद हुए।

हथियारों के अलावा किन मामलों पर है नज़र

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुँचाने वाली, धार्मिक या जाति आधारित घृणा फैलाने वाली, मानहानिकारक टिप्पणियाँ करने वाली या महिलाओं की गरिमा का उल्लंघन करने वाली सामग्री पोस्ट करने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है। ऐसे मामले सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), पीओसीएसओ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दर्ज किए जा रहे हैं।

व्यापक संदर्भ: जनवरी 2026 से अब तक

गौरतलब है कि जनवरी 2026 से अब तक बिहार पुलिस ने आपत्तिजनक या वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो से जुड़े 514 मामलों की पहचान की है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि राज्य में डिजिटल अपराध की निगरानी को लेकर पुलिस की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। यह अभियान ऐसे समय में तेज हुआ है जब देशभर में सोशल मीडिया के ज़रिए कानून-व्यवस्था को चुनौती देने की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।

आगे क्या होगा

पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यह अभियान जारी रहेगा और डिजिटल निगरानी का दायरा और विस्तृत किया जाएगा। सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की उकसावे वाली या हथियार प्रदर्शन की सामग्री पोस्ट करने वालों के खिलाफ बिना चेतावनी के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या डिजिटल निगरानी का यह तंत्र सिर्फ दिखावटी गिरफ्तारियों तक सीमित रहेगा या अदालत में दोषसिद्धि तक पहुँचेगा। जनवरी 2026 से 514 मामले चिह्नित होने के बावजूद केवल 130 गिरफ्तारियाँ बताती हैं कि बड़ी संख्या में मामले अभी भी लंबित हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना स्वतंत्र निगरानी के इस तरह के अभियान नागरिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी असर डाल सकते हैं — खासकर तब जब 'आपत्तिजनक सामग्री' की परिभाषा पुलिस के विवेक पर निर्भर हो।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार पुलिस के सोशल मीडिया हथियार अभियान में कितनी गिरफ्तारियाँ हुईं?
बिहार पुलिस ने 1 मई से 14 जुलाई 2026 के बीच सोशल मीडिया पर हथियार लहराने के मामलों में 130 आरोपियों को गिरफ्तार किया, 102 एफआईआर दर्ज कीं और 40 अवैध हथियार जब्त किए। यह अभियान राज्यव्यापी स्तर पर चलाया गया।
बिहार में सोशल मीडिया पर हथियार दिखाने पर कौन-से कानून लागू होते हैं?
ऐसे मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), शस्त्र अधिनियम और पीओसीएसओ अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए जाते हैं। सांप्रदायिक या जाति आधारित घृणा फैलाने वाली सामग्री पर भी इन्हीं प्रावधानों के तहत कार्रवाई होती है।
बिहार पुलिस सोशल मीडिया की निगरानी कैसे करती है?
प्रत्येक जिले में समर्पित सोशल मीडिया सेल कार्यरत हैं और राज्य स्तर पर साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई चौबीसों घंटे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की निगरानी करती है। डिजिटल निगरानी के ज़रिए आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाती है।
जनवरी 2026 से अब तक बिहार में सोशल मीडिया से जुड़े कितने मामले सामने आए हैं?
जनवरी 2026 से बिहार पुलिस ने आपत्तिजनक या वायरल सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो से संबंधित 514 मामलों की पहचान की है। इनमें हथियार प्रदर्शन के अलावा घृणास्पद और मानहानिकारक सामग्री के मामले भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर हथियार लहराने वाले लोग ऐसा क्यों करते हैं?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कई लोग सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने, फॉलोअर्स बढ़ाने या समाज में भय का माहौल बनाने के लिए हथियारों के साथ तस्वीरें और वीडियो पोस्ट करते हैं। डिजिटल निगरानी के ज़रिए ऐसे व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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