बिहार: सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल विस्तार 7 मई को, PM मोदी और अमित शाह भी होंगे गांधी मैदान में
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 7 मई 2026 को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और एनडीए के कई प्रमुख नेता शामिल होंगे। यह बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व में बनी सरकार का पहला बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार है।
समारोह की तैयारियाँ
गांधी मैदान में होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि राज्यपाल नवनियुक्त मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। उन्होंने पुष्टि की कि इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए घटक दलों के प्रमुख नेता उपस्थित रहेंगे।
मंत्रिमंडल में किसे मिलेगी जगह
सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में 50-50 के फॉर्मूले पर सीटों का बंटवारा होने की उम्मीद है। बताया जा रहा है कि BJP से 12, जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) से 11, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) (LJP-R) से 2, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) से एक-एक मंत्री शपथ लेंगे। सूत्रों के मुताबिक, कुछ मंत्री पद फिलहाल रिक्त रखे जाएंगे।
पृष्ठभूमि: कैसे बनी यह सरकार
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उसी दिन JDU के विजय कुमार चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा था, और यह विस्तार पाँच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद किया जा रहा है।
दिल्ली दौरे में मिली हरी झंडी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इससे पहले दिल्ली दौरे के दौरान गृह मंत्री अमित शाह, BJP अध्यक्ष नितिन नवीन और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की थी। माना जा रहा है कि इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सहमति बन गई और नेताओं ने हरी झंडी दे दी। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में BJP के नेतृत्व वाली सरकार को अपनी पहचान स्थापित करने की चुनौती है। आने वाले दिनों में नई कैबिनेट के शपथ लेने के बाद सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं की दिशा और स्पष्ट होगी।