भाजपा ने अनंतनाग के 9 पदाधिकारी निलंबित किए, अनधिकृत रैली में आपत्तिजनक टिप्पणियाँ बनीं वजह
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अनंतनाग जिला इकाई ने 7 अगस्त 2026 को नौ पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई 5 अगस्त को खानाबल हाउसिंग कॉलोनी, दक्षिण कश्मीर में बिना अनुमति आयोजित एक तिरंगा रैली के दौरान महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों के बाद हुई। पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह रैली न तो भाजपा द्वारा अधिकृत थी और न ही जिला प्रशासन से आवश्यक अनुमति ली गई थी।
किन पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई
पार्टी के आधिकारिक आदेश में जिन नौ पदाधिकारियों को निलंबित किया गया, उनमें शामिल हैं — निसार अहमद भट (जिला महासचिव), खुर्शीद अहमद (जिला सचिव), आबिदा रफीक (जिला सचिव), इरशाद अहमद मलिक (निर्वाचन क्षेत्र अध्यक्ष, शांगस), मोहम्मद मकबूल गनी (पूर्व जिला उपाध्यक्ष), वहीद अहमद इटू (भाजपा पहलगाम निर्वाचन क्षेत्र अध्यक्ष), निसार अहमद हकीम (जिला सचिव, भाजपा अनंतनाग), फिरोज अहमद हजाम (जिला सचिव, किसान मोर्चा) और सबरूजा अख्तर (जिला सचिव, महिला मोर्चा, अनंतनाग)।
आदेश के अनुसार इन सभी की भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता अगले आदेश तक निलंबित कर दी गई है और उन्हें उनके सभी पार्टी पदों एवं जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है।
पार्टी का आधिकारिक रुख
भाजपा कार्यालय द्वारा जारी आदेश में कहा गया, 'जिला इकाई इस रैली के दौरान हमारी माताओं और बहनों के खिलाफ कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियों का भी कड़ा संज्ञान लेती है। ऐसा आचरण पूरी तरह से अस्वीकार्य है और भारतीय जनता पार्टी के मूल्यों, अनुशासन, गरिमा और सिद्धांतों के खिलाफ है।'
यह निर्णय BJP जम्मू एवं कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के राज्य महासचिव (संगठन) अशोक कौल, राज्य महासचिव अनवर खान, राज्य प्रवक्ता एवं जिला प्रभारी अल्ताफ ठाकुर तथा जिला कोर कमेटी, अनंतनाग के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद सर्वसम्मति से लिया गया।
दो व्यक्तियों से संबंध का खंडन
भाजपा ने यह भी स्पष्ट किया कि अल्वीर अहमद डार और फैंसी अख्तर का पार्टी की अनंतनाग जिला इकाई से किसी भी प्रकार का संगठनात्मक संबंध नहीं है और ये किसी भी पद या जिम्मेदारी पर नहीं हैं।
घटना का संदर्भ और महत्व
गौरतलब है कि 5 अगस्त का दिन जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में विशेष राजनीतिक महत्व रखता है — इसी दिन 2019 में अनुच्छेद 370 हटाया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा कश्मीर में अपनी संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है। इस घटना से पार्टी के भीतर अनुशासन और स्थानीय इकाइयों पर केंद्रीय नियंत्रण को लेकर सवाल उठे हैं। पार्टी की त्वरित कार्रवाई इस बात का संकेत है कि नेतृत्व ऐसे किसी भी आचरण को सहन करने के मूड में नहीं है जो संगठन की छवि को नुकसान पहुँचाए।