त्रिपुरा स्थानीय चुनावों से पहले BJP केंद्रीय नेताओं की राज्य यूनिट को संगठन मजबूत करने की हिदायत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के केंद्रीय नेतृत्व ने त्रिपुरा राज्य इकाई को आगामी ग्राम समिति और शहरी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पार्टी संगठन को और सुदृढ़ करने तथा सरकार की कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाने का निर्देश दिया है। 7 अगस्त को नई दिल्ली में हुई अहम बैठकों के बाद राज्य के एक वरिष्ठ BJP नेता ने यह जानकारी दी।
नई दिल्ली में हुई बैठकें
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने गुरुवार रात नई दिल्ली में त्रिपुरा के नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। इन बैठकों में BJP के नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेटर संबित पात्रा और त्रिपुरा के लिए पार्टी के ऑब्जर्वर राजदीप रॉय — जो सिलचर से मौजूदा विधायक और दक्षिणी असम से पूर्व लोकसभा सदस्य हैं — भी शामिल हुए।
त्रिपुरा से BJP की कोर कमेटी के कुल 14 नेताओं ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित इन बैठकों में भाग लिया। राज्य के प्रतिनिधियों में मुख्यमंत्री माणिक साहा, राज्य अध्यक्ष अभिषेक देबरॉय, वरिष्ठ मंत्री रतन लाल नाथ, टिंकू रॉय और विकास देबबर्मा, राज्य विधानसभा अध्यक्ष राम पादा जमातिया, पूर्व मुख्यमंत्री एवं मौजूदा सांसद बिप्लब कुमार देब, राज्यसभा सदस्य राजीव भट्टाचार्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक शामिल थे।
चुनावी रणनीति और गठबंधन की चुनौती
एक वरिष्ठ BJP नेता के अनुसार, केंद्रीय नेताओं ने राज्य नेतृत्व से ग्राम समितियों और शहरी स्थानीय निकायों के आगामी चुनावों से पहले पार्टी को और सक्रिय करने तथा संगठन को मजबूत करने को कहा है। साथ ही, पार्टी संगठन के कामकाज और उसकी जमीनी स्थिति पर विस्तृत फीडबैक भी लिया गया।
ये बैठकें BJP की दो आदिवासी सहयोगी पार्टियों — टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) — के साथ चुनावी गठबंधन की रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
TTAADC चुनावों में BJP की हार का संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 12 अप्रैल को हुए त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (TTAADC) चुनावों में BJP को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। TMP ने 28 चुनी हुई सीटों में से 24 पर जीत दर्ज की, जबकि BJP महज 4 सीटें ही हासिल कर सकी। गौरतलब है कि चुनावी समझौता न हो पाने के कारण BJP, TMP और IPFT ने अलग-अलग मैदान में उतरे थे।
2021 से TMP इस परिषद का संचालन कर रही है। TTAADC को राज्य विधानसभा के बाद त्रिपुरा की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक और राजनीतिक संस्था माना जाता है। 30 सदस्यीय इस परिषद में 28 निर्वाचित और राज्य सरकार द्वारा नामित 2 सदस्य हैं, और यह त्रिपुरा के 10,491 वर्ग किलोमीटर भौगोलिक क्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत हिस्से का प्रशासन संभालती है।
आगामी चुनावों का दायरा
इस वर्ष TTAADC के अंतर्गत 587 ग्राम समितियों (जो ग्राम पंचायतों के समकक्ष हैं) और 20 से अधिक शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव होने हैं। ये चुनाव BJP के लिए आदिवासी क्षेत्रों में अपनी पकड़ पुनः स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हैं।
आगे क्या होगा
केंद्रीय नेतृत्व के इस सीधे हस्तक्षेप से स्पष्ट है कि BJP इन स्थानीय चुनावों को हल्के में नहीं ले रही। गठबंधन वार्ता और संगठनात्मक पुनर्गठन दोनों मोर्चों पर पार्टी की रणनीति आने वाले हफ्तों में और स्पष्ट होगी।