4 नवंबर 2026
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भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्राएँ शुरू, सांसद नरेश बंसल बोले — विपक्ष चुनाव नहीं, अराजकता चाहता है

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भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' पदयात्राएँ शुरू, सांसद नरेश बंसल बोले — विपक्ष चुनाव नहीं, अराजकता चाहता है

सारांश

BJP सांसद नरेश बंसल ने 4 नवंबर को 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्राओं को लेकर कहा कि विपक्ष चुनाव से नहीं, हिंसा से सत्ता चाहता है। उन्होंने 1975 के आपातकाल से तुलना की, CRPF के 47 साल के रिकॉर्ड की सराहना की और असम के बहुविवाह-विरोधी कानून का स्वागत किया।

मुख्य बातें

BJP सांसद नरेश बंसल ने 4 नवंबर 2026 को कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में आस्था न रखने का आरोप लगाया।
BJP की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्राएँ देशभर में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली जा रही हैं।
बंसल ने 1975 के आपातकाल का हवाला देते हुए कांग्रेस की लोकतांत्रिक साख पर सवाल उठाए।
CRPF ने 47 वर्षों में पहली बार लगातार 12 महीने शून्य ऑपरेशनल हानि का रिकॉर्ड बनाया — बंसल ने बधाई दी।
असम के बहुविवाह-विरोधी कानून और RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले की आरक्षण संबंधी टिप्पणियों का बंसल ने समर्थन किया।
राहुल गांधी को 'पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन' बताते हुए कहा कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरा नहीं होगा।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा नहीं रखते और चुनाव के ज़रिये सत्ता हासिल करने में अक्षम होने के कारण कथित तौर पर देश में अराजकता और हिंसा का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। BJP की ओर से चलाई जा रही 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्राओं का उद्देश्य आम जनता को विपक्ष की राजनीति और उसके कथित इरादों से अवगत कराना है।

पदयात्राओं का मकसद और BJP का संदेश

बंसल ने बताया कि पिछले दो-तीन महीनों में जंतर-मंतर, प्रधानमंत्री आवास और सर्वोच्च न्यायालय के आसपास हुई विपक्षी गतिविधियों तथा भाषणों की भाषा-शैली ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विरोधी दल लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था नहीं रखते। उन्होंने कहा कि BJP के मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता इन पदयात्राओं के माध्यम से जनता तक यह संदेश पहुँचा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का लोकतंत्र सुरक्षित है।

बंसल ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों से 'प्रेरणा' लेने की बात की है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी सोच को उजागर करती है।

आपातकाल का संदर्भ और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए बंसल ने 1975 के आपातकाल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए संविधान में संशोधन कराया, संसद का कार्यकाल बढ़ाया और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों पर अंकुश लगाया — लाखों लोगों को जेल भेजा गया और मीडिया पर सेंसरशिप थोपी गई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का वास्तविक हरण उस दौर में हुआ था।

बंसल ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का भी स्मरण किया और कहा कि वे स्वयं उस आंदोलन से जुड़े थे। उस समय प्रतिरोध शांतिपूर्ण था — लाठी-गोली सहने के बावजूद अराजकता का माहौल नहीं बनाया गया। उनके अनुसार, आज के विपक्षी प्रदर्शनों में स्थिति इसके उलट है।

आरक्षण, एसआईआर और RSS नेता होसबोले का समर्थन

आरक्षण और विशेष पहचान रजिस्टर (SIR) के विरोध-प्रदर्शनों पर RSS नेता दत्तात्रेय होसबोले की टिप्पणियों का बंसल ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संविधान में आरक्षण का प्रावधान इसलिए किया गया क्योंकि समाज के कुछ वर्गों को सदियों तक समानता का व्यवहार नहीं मिला और जब तक समानता का यह उद्देश्य पूरी तरह सिद्ध नहीं हो जाता, आरक्षण जारी रहना चाहिए।

चुनाव आयोग द्वारा फॉर्म-6 से SIR कॉलम हटाने के सवाल पर बंसल ने कहा कि जो व्यक्ति निर्धारित शर्तें पूरी करता हो, उसे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का अवसर अवश्य मिलना चाहिए — किसी भी योग्य नागरिक का वोट नहीं छूटना चाहिए।

पंजाब रैली, राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर प्रतिक्रिया

पंजाब में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली पर बंसल ने कहा कि कांग्रेस ने अब तक 1984 के दंगों के लिए देश और पंजाब की जनता से माफी नहीं माँगी है, और ऐसे में वहाँ रैली करना पीड़ितों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है। उन्होंने राहुल गांधी को 'पार्ट-टाइम पॉलिटिशियन' बताते हुए कहा कि वे जितने दिन भारत में अपने आंदोलनों के लिए देते हैं, उतने दिन विदेश यात्राओं में भी बिताते हैं।

अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने संबंधी बयान पर बंसल ने कहा कि इसका उत्तर चुनाव के मैदान में मिलेगा। उन्होंने समाजवादी पार्टी (SP) पर सनातन का विरोध करने और कारसेवकों पर गोली चलवाने का आरोप लगाया, और कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता राम मंदिर बनाने वालों का साथ देगी।

CRPF के ऐतिहासिक रिकॉर्ड और असम कानून

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) द्वारा 47 वर्षों में पहली बार लगातार 12 महीनों तक शून्य ऑपरेशनल हानि का रिकॉर्ड बनाने पर बंसल ने बल के जवानों और अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उच्चस्तरीय प्रशिक्षण, बहादुरी और उचित नीति-पालन का परिणाम है।

असम में दो विवाह करने पर सरकारी नौकरी समाप्त करने के कानून का बंसल ने स्वागत किया और इसे बहुविवाह प्रथा के विरुद्ध एक ज़रूरी कदम बताया।

आने वाले चुनावों और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच BJP की ये पदयात्राएँ पार्टी की ज़मीनी संगठन-शक्ति को परखने और मतदाताओं से सीधा संवाद स्थापित करने का मंच भी बनती दिख रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी प्रासंगिकता तब सीमित हो जाती है जब वर्तमान की आलोचनाओं का जवाब इतिहास से दिया जाए। CRPF के शून्य हानि रिकॉर्ड जैसी उपलब्धि को राजनीतिक संदर्भ में प्रस्तुत करना बल की स्वायत्त पेशेवर गरिमा के साथ न्याय नहीं करता। असल सवाल यह है कि क्या ये पदयात्राएँ ज़मीनी जनता की चिंताओं — महँगाई, बेरोज़गारी, कानून-व्यवस्था — को संबोधित करती हैं, या केवल विपक्ष को लक्ष्य बनाने का माध्यम हैं।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्राएँ क्या हैं?
ये BJP द्वारा आयोजित जनसंपर्क यात्राएँ हैं जिनमें पार्टी के मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक और कार्यकर्ता जनता तक यह संदेश पहुँचाते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में लोकतंत्र सुरक्षित है। इनका उद्देश्य कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की राजनीति के खिलाफ जन-जागरण बताया जा रहा है।
नरेश बंसल ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन लोकतांत्रिक तरीके से सत्ता पाने में अक्षम हैं और इसीलिए कथित तौर पर अराजकता व हिंसा का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने 1975 के आपातकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की लोकतांत्रिक साख पर सवाल उठाए।
CRPF के शून्य ऑपरेशनल हानि रिकॉर्ड पर बंसल ने क्या कहा?
बंसल ने CRPF को बधाई दी कि बल ने 47 वर्षों में पहली बार लगातार 12 महीनों तक शून्य ऑपरेशनल हानि का रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने इसे जवानों की बहादुरी, उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और उचित नीति-पालन का परिणाम बताया।
असम के बहुविवाह-विरोधी कानून पर BJP का रुख क्या है?
बंसल ने असम सरकार के उस कानून का स्वागत किया जिसके तहत दो विवाह करने पर सरकारी नौकरी जाती है। उन्होंने इसे बहुविवाह प्रथा के खिलाफ एक ज़रूरी और सकारात्मक कदम बताया।
आरक्षण पर RSS नेता होसबोले की टिप्पणी को बंसल ने क्यों समर्थन दिया?
बंसल ने कहा कि आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान इसलिए किया गया क्योंकि समाज के कुछ वर्गों को सदियों तक समानता नहीं मिली और जब तक यह उद्देश्य पूरी तरह सिद्ध नहीं हो जाता, आरक्षण जारी रहना चाहिए। उन्होंने होसबोले के इसी मत का समर्थन किया।
राष्ट्र प्रेस
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