भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब' यात्रा: सतीश पूनिया बोले — अनुच्छेद 370 और नक्सलवाद की तरह नशे को भी मिटाएंगे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया 21 सितंबर 2026 को बठिंडा पहुँचे और पार्टी की 'नशा मुक्त पंजाब' यात्रा में शामिल हुए। पूनिया ने दावा किया कि जिस पार्टी ने अनुच्छेद 370 हटाया और देश से नक्सलवाद का सफाया किया, वह पंजाब से नशे की समस्या को भी पूरी तरह समाप्त करने में सक्षम है।
यात्रा का स्वरूप और कार्यक्रम
भाजपा ने इस अभियान के तहत चार समानांतर यात्राएँ शुरू की हैं, जो 18 सितंबर 2026 को आरंभ हुईं और 30 सितंबर 2026 को जालंधर में समाप्त होंगी। पूनिया के अनुसार, पहली यात्रा पठानकोट के सुजानपुर से, दूसरी फाजिल्का से, और तीसरी पवित्र धर्मस्थल श्री दमदमा साहिब से शुरू हुई। चारों यात्राएँ अंततः जालंधर में एकत्रित होंगी।
पूनिया ने बताया कि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सुजानपुर से यात्राओं का उद्घाटन किया था। समापन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 सितंबर को जालंधर आएंगे।
पूनिया का मुख्य संदेश
पूनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब को नशा-मुक्त बनाने के संकल्प के साथ चार यात्राएँ शुरू की हैं। यह लगभग 13 दिनों की यात्रा है।' उन्होंने तर्क दिया कि अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और नक्सलवाद पर नियंत्रण पाने जैसी उपलब्धियाँ यह साबित करती हैं कि पार्टी ऐतिहासिक चुनौतियों को हल करने में सक्षम है।
उन्होंने अमित शाह के एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का भी हवाला दिया, जिसमें शाह ने कथित तौर पर 2029 तक पंजाब को नशामुक्त करने की डेडलाइन दी थी और इसके लिए लगभग दो वर्षों का समय माँगा था।
पंजाब के युवाओं पर नशे का असर
पूनिया ने कहा कि पंजाब ऐतिहासिक रूप से देश का 'सिरमौर' रहा है — ओलंपिक मैदानों और सशस्त्र बलों में पंजाब के युवाओं की अलग पहचान रही है। उन्होंने चिंता जताई कि आज वही युवा पीढ़ी नशे की चपेट में है। उनके अनुसार, यह यात्रा 'महज राजनीतिक नहीं, बल्कि एक सामाजिक संकल्प की यात्रा है' और पार्टी धार्मिक स्थलों से ऊर्जा लेकर इस अभियान को आगे बढ़ा रही है।
विरोध और काफिले पर हमले
यात्रा के दौरान भाजपा नेताओं के काफिलों पर कथित तौर पर हुए हमलों के बारे में पूछे जाने पर पूनिया ने कहा कि ऐसी घटनाएँ 'जायज नहीं हैं।' उन्होंने कहा, 'सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जनता इस विषय को देख रही है।' लोकतंत्र में असहमति के अधिकार को स्वीकार करते हुए उन्होंने यह भी जोड़ा कि संविधान 'मर्यादा के उल्लंघन' की इजाजत नहीं देता।
उन्होंने विपक्ष पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि जो भी इस अभियान का विरोध करता है, वह नशे के पक्ष में खड़ा है — एक ऐसा बयान जिस पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।
आगे क्या होगा
चारों यात्राओं का समापन 30 सितंबर 2026 को जालंधर में एक बड़े कार्यक्रम के साथ होगा, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति अपेक्षित है। यह आयोजन पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक पहुँच को मज़बूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।