कोयंबटूर नाबालिग हत्याकांड: भाजपा ने तमिलनाडु सरकार पर साधा निशाना, कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक नाबालिग लड़की की हत्या के मामले में तमिलनाडु भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने सोमवार, 25 मई को राज्य की द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार पर तीखा हमला बोला। तिरुपति ने आरोप लगाया कि सरकार बदलने के बावजूद प्रशासनिक ढाँचे और कानून-व्यवस्था की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं आया है।
भाजपा का आरोप: बदली सरकार, नहीं बदला तंत्र
नारायणन तिरुपति ने कहा, 'भले ही सरकार बदल गई हो, लेकिन प्रशासन के मामले में कुछ भी नहीं बदला है। सरकार एक निरंतर प्रक्रिया है और सरकारी तंत्र को ठीक से काम करना चाहिए। व्यवस्था में बदलाव की ज़रूरत है — यह आसानी से किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे यह नहीं मानते कि बदलाव रातोंरात संभव है, लेकिन सरकार को यह बताना होगा कि पिछले 10 से 15 दिनों में उसने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
महिलाओं और बच्चों पर अपराध बेरोकटोक जारी
तिरुपति ने आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध बेरोकटोक जारी हैं। उन्होंने कहा, 'लगातार हत्याएँ हो रही हैं, बलात्कार हो रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि इन घटनाओं के पीछे शराब और नशीले पदार्थ प्रमुख कारणों में से हैं, लेकिन व्यवस्था को बदलने की ज़रूरत है।' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में महिला सुरक्षा को लेकर विपक्षी दल पहले से ही सरकार को घेरते रहे हैं।
पुलिस तबादलों पर सवाल
तिरुपति ने राज्य सरकार की उस रणनीति पर भी सवाल उठाए जिसमें घटनाओं के बाद पुलिस अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर हम सिर्फ पुलिस अधिकारियों का तबादला करते रहेंगे तो इससे कुछ नहीं होने वाला। वे सभी आईपीएस अधिकारी और पुलिसकर्मी हैं — सिर्फ उन्हें ही दोष नहीं देते रह सकते।' गौरतलब है कि तमिलनाडु में इस तरह के मामलों के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादले एक परिचित प्रशासनिक प्रतिक्रिया बन गई है, जिसे आलोचक 'ज़िम्मेदारी से बचने का तरीका' बताते हैं।
पोक्सो मामलों में देरी पर चिंता
पोक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर भी तिरुपति ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अभी भी बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं और समस्या केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक सीमित नहीं है, बल्कि न्यायिक व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है। आलोचकों का कहना है कि POCSO के तहत त्वरित अदालतों की स्थापना के बावजूद लंबित मामलों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है।
आगे क्या होगा
भाजपा के इस हमले के बाद राज्य सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है। कोयंबटूर हत्याकांड की जाँच जारी है और विपक्षी दल इस मुद्दे को विधानसभा में उठाने की तैयारी में हैं। राज्य में महिला सुरक्षा और बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की माँग अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेती जा रही है।