मेघालय 2028 विधानसभा चुनाव: भाजपा अकेले उतरेगी, विधायक हेक ने किया सरकार बनाने का दावा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक अलेक्जेंडर लालू हेक ने बुधवार, 8 जुलाई को शिलांग में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी 2028 का मेघालय विधानसभा चुनाव किसी भी गठबंधन के बिना अकेले लड़ेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि भाजपा न केवल मजबूत प्रदर्शन करेगी, बल्कि अगली राज्य सरकार का नेतृत्व भी करेगी।
संगठन विस्तार पर ज़ोर
हेक ने बताया कि भाजपा ने पूरे मेघालय में अपने संगठनात्मक नेटवर्क को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पार्टी अगले दो वर्षों में जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाने और समर्थन आधार तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। उन्होंने कहा कि चुनावी मुकाबले के लिए तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है।
शिलांग लोकसभा उपचुनाव और हेक का इनकार
हेक ने यह भी खुलासा किया कि भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उनसे शिलांग लोकसभा उपचुनाव में पार्टी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, विधायक और मंत्री के रूप में अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए उन्होंने यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें अभी कई दायित्व पूरे करने हैं, इसलिए वे उपचुनाव नहीं लड़ेंगे।
शुल्लाई के नाम की सिफारिश
उपचुनाव के लिए हेक ने साथी भाजपा विधायक सनबोर शुल्लाई के नाम की सिफारिश की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व का होगा और जो भी उम्मीदवार घोषित किया जाएगा, वे उसे पूरी ताकत से समर्थन देंगे। हेक ने भरोसा दिलाया कि उम्मीदवार की घोषणा के बाद उपचुनाव की तैयारी के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा।
मौजूदा गठबंधन और राजनीतिक संकेत
गौरतलब है कि भाजपा इस समय मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के नेतृत्व वाली नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की अगुवाई में बनी मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस सरकार में सहयोगी दल की भूमिका में है। ऐसे में हेक का यह बयान — कि भाजपा 2028 में अकेले चुनाव लड़ेगी — मौजूदा गठबंधन से अलग राह पकड़ने का स्पष्ट राजनीतिक संकेत माना जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पहाड़ी राज्य में अगले विधानसभा चुनाव में अभी दो वर्ष से अधिक का समय बाकी है।
आगे की राह
भाजपा के इस एकला चलो के ऐलान से मेघालय की राजनीति में नई हलचल तय है। पार्टी का दावा है कि अगले दो वर्षों में संगठन को इतना मजबूत किया जाएगा कि 2028 में वह स्वतंत्र रूप से बहुमत हासिल कर सके। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या NPP के साथ मौजूदा गठबंधन इस घोषणा के बाद भी अपनी स्थिरता बनाए रखता है।