बॉम्बे हाईकोर्ट ने NCB को लगाई फटकार: समीर वानखेड़े के खिलाफ जांच पर उठाए गंभीर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 30 जुलाई 2026 को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से कड़े सवाल पूछे कि उसने महज एक आरोपी के आरोपों और गुमनाम शिकायतों के आधार पर अपने ही पूर्व जांच अधिकारी समीर वानखेड़े के विरुद्ध कार्रवाई क्यों शुरू की। अदालत ने इस कदम को आपराधिक न्याय व्यवस्था में गंभीर अव्यवस्था पैदा करने वाला बताया।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें गुमनाम शिकायतों के आधार पर वानखेड़े के विरुद्ध जारी प्रारंभिक जांच नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने रिट याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया और वानखेड़े को अंतरिम राहत प्रदान की, जिससे याचिका पर अंतिम निर्णय होने तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो गई।
खंडपीठ ने NCB से यह भी पूछा कि क्या आरोपी ने वानखेड़े की प्रारंभिक गिरफ्तारी के समय या जांच के दौरान उन पर कोई आरोप लगाए थे। कोर्ट ने स्पष्टीकरण माँगा कि ये आरोप इतने विलंब से क्यों सामने आए।
अदालत की तीखी टिप्पणी
वानखेड़े की ओर से पेश वकील ने बताया कि खंडपीठ ने कहा कि यदि आरोपियों को जांच अधिकारियों पर आरोप लगाने की छूट दी जाए और विभाग उन पर तत्काल कार्रवाई करे, तो इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था में अफरातफरी मच जाएगी। अदालत ने चेतावनी दी कि इस तरह का कदम एक खतरनाक और गलत मिसाल स्थापित करेगा, जिससे आरोपी उन अधिकारियों को निशाना बना सकेंगे जिन्होंने केवल अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन किया।
खंडपीठ ने यह भी जताया कि इस तरह के कदमों से ईमानदार अधिकारियों का मनोबल टूटेगा — जो किसी भी जांच एजेंसी के लिए दीर्घकालिक रूप से घातक है।
आर्यन खान मामले से जुड़ा पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2 अक्टूबर 2021 को वानखेड़े ने कॉर्डेलिया क्रूज के एक जहाज पर तलाशी और जब्ती अभियान का नेतृत्व किया था, जिसमें अभिनेता शाहरुख खान के पुत्र आर्यन खान को 19 अन्य लोगों के साथ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस मामले के बाद से वानखेड़े विवादों के केंद्र में रहे हैं और NCB ने 2021 के उसी मामले के संदर्भ में उनके विरुद्ध कई जांचें शुरू कीं।
वानखेड़े का पक्ष
वानखेड़े के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल ने लगातार यह स्थिति बनाए रखी है कि उनके विरुद्ध शुरू की गई कार्यवाही मनमानी, दुर्भावनापूर्ण, कानूनी रूप से अस्थिर और प्रशासनिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। अदालत द्वारा दी गई अंतरिम राहत को उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
रिट याचिका अब अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। यह मामला न केवल वानखेड़े के भविष्य बल्कि उस व्यापक सिद्धांत को भी परखेगा कि क्या जांच एजेंसियाँ आरोपियों की शिकायतों पर अपने ही अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जांच एजेंसियों की स्वायत्तता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज है।