ब्रिक्स समिट में विपक्षी CM की गैरहाजिरी पर नायब सैनी बोले — 'भारत के गौरव से बड़ी राजनीति नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कांग्रेस और इंडी गठबंधन के मुख्यमंत्रियों के शामिल न होने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 'भारत के गौरव और प्रतिष्ठा' का था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं ने इस अनुपस्थिति को राष्ट्रहित से समझौता बताया।
सैनी का विपक्ष पर हमला
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में ब्रिक्स जैसा शिखर सम्मेलन होना गर्व की बात थी। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया, परंतु कांग्रेस और उनके इंडी अलायंस के मुख्यमंत्रियों ने शामिल न होने का निर्णय लिया।' उन्होंने आगे जोड़ा कि जब भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मानित किया जा रहा हो, तो विपक्षी दलों को 'छोटी-मोटी राजनीतिक बातों से ऊपर उठकर' सोचना चाहिए था।
नई दिल्ली घोषणापत्र — एक कूटनीतिक सफलता
BJP सांसद सुजीत कुमार ने नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की 'बड़ी कूटनीतिक जीत' बताया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ईरान और चीन जैसे देशों ने एक स्वर में इस घोषणापत्र का समर्थन किया, जो वैश्विक मंचों पर भारत के बढ़ते कद को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'बहुत लोग यह सोच रहे थे कि नई दिल्ली घोषणापत्र सफल नहीं होगा।'
पहलगाम हमले की निंदा — एक बड़ी उपलब्धि
सांसद सुजीत कुमार ने बताया कि ब्रिक्स के सदस्य देशों ने पहलगाम में हुए 'पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी हमले' की कड़ी निंदा की, जिसे उन्होंने समिट की 'बहुत बड़ी सफलता' बताया। साथ ही, सप्लाई चेन, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) को 'हथियार की तरह इस्तेमाल' करने की कोशिशों की भी निंदा की गई। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यापार तनाव और तकनीकी संरक्षणवाद चरम पर है।
राहुल गांधी की टिप्पणी और राजनीतिक विवाद
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर BJP नेता किलारू दिलीप कुमार ने कहा कि राहुल गांधी ने 'इतने शानदार' और 'विश्व के सबसे अच्छे कार्यक्रमों में से एक' का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'न तो BJP ने और न ही सरकार ने कभी किसी को अपनी पसंद का खाना खाने से रोका।'
वहीं कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री को छोड़कर मेहमान के तौर पर आए 'लगभग 100 फीसदी लोग मांसाहारी थे' और आयोजकों की इस पहल पर सवाल उठाया।
विपक्षी अनुपस्थिति का व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विपक्षी मुख्यमंत्रियों की भागीदारी को लेकर राजनीतिक विवाद उठा हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन सरकारी और प्रशासनिक क्षमता-निर्माण के अवसर भी होते हैं, जिनसे दूरी बनाना राज्यों के दीर्घकालिक हितों के लिए भी प्रश्नवाचक हो सकता है। आने वाले दिनों में विपक्ष की ओर से इस बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण की संभावना है।