हैदराबाद युवा सम्मेलन से पहले बीआरएस नेता सबिता इंद्रा रेड्डी और प्रवीण कुमार नजरबंद, पुलिस कार्रवाई पर विवाद
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना पुलिस ने 18 जुलाई को हैदराबाद में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की 'युवा संग्राम सभा' से कुछ घंटे पहले पार्टी की डिप्टी फ्लोर लीडर सबिता इंद्रा रेड्डी और वरिष्ठ नेता आरएस प्रवीण कुमार को नजरबंद कर दिया। बीआरएस नेताओं ने इस कार्रवाई को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई, विशेष रूप से इसलिए क्योंकि तेलंगाना उच्च न्यायालय ने एक दिन पहले ही इस सभा को सशर्त अनुमति दी थी।
नजरबंदी का घटनाक्रम
बीआरएस नेता आरएस प्रवीण कुमार ने एक वीडियो संदेश में बताया कि पुलिस ने उन्हें 'युवा संग्राम सदस्सु' में शामिल होने से रोकने के लिए नजरबंद किया। दोनों नेताओं ने सवाल उठाया कि जब उच्च न्यायालय ने जनसभा की अनुमति दे दी है, तब भी उन्हें किस आधार पर घर में बंद रखा जा सकता है। उन्होंने इस कदम को मनमाना और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
हाईकोर्ट की सशर्त अनुमति
शुक्रवार, 17 जुलाई को तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बीआरएस को सरूरनगर स्टेडियम में 'युवा संग्राम सभा' आयोजित करने की सशर्त अनुमति प्रदान की। न्यायालय ने आयोजकों को निर्देश दिया कि पूरे कार्यक्रम के दौरान कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, सड़कें जाम न हों और वक्ता भड़काऊ भाषण से परहेज करें। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने पहले इस सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
केटीआर की प्रतिक्रिया और राजनीतिक संदर्भ
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (केटीआर) ने उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की बेरोजगार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश नाकाम हो गई है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने लोकतांत्रिक अधिकारों को बरकरार रखा। केटीआर ने आरोप लगाया कि छात्र और बेरोजगार युवा चुनाव से पहले किए गए वादों को लागू करने में सरकार की विफलता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सरूरनगर स्टेडियम का प्रतीकात्मक महत्व
बीआरएस ने सभा के लिए सरूरनगर स्टेडियम का चुनाव सोच-समझकर किया — यह वही स्थल है जहाँ कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी का युवा घोषणापत्र जारी किया था। बीआरएस का आरोप है कि सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार उस घोषणापत्र में युवाओं और बेरोजगारों से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है। इस सभा में करीब 10,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी।
आगे क्या
यह टकराव तेलंगाना में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी बीआरएस के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव की एक और कड़ी है। नजरबंदी की वैधता और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल आने वाले दिनों में विधानसभा और न्यायालय दोनों में गूँज सकते हैं।