बड़गाम-दिल्ली कार्गो पार्सल ट्रेन बंद नहीं, उत्तर रेलवे ने खारिज किए कांग्रेस के दावे
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर रेलवे ने 10 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि बड़गाम से आदर्श नगर, दिल्ली के बीच चलने वाली कार्गो पार्सल ट्रेन सेवा पूरी तरह चालू है और इसे किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया गया है। रेलवे के अनुसार यह सेवा सितंबर 2025 से निर्बाध रूप से संचालित हो रही है और कश्मीर घाटी के किसानों व व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्ति कड़ी बन चुकी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर आरोप लगाया था कि बड़गाम और दिल्ली के आदर्श नगर के बीच शुरू की गई पार्सल ट्रेन सेवा महज एक 'पीआर स्टंट' बनकर रह गई है और इसे बंद कर दिया गया है। खेड़ा ने कहा कि इस कारण कश्मीर के फल उत्पादकों को भारी नुकसान हो रहा है और उनकी फसल समय पर बाज़ार तक नहीं पहुँच पा रही।
यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर घाटी में सेब और बागवानी उत्पादों का मौसम चरम पर होता है और किसानों के लिए माल परिवहन की समय-संवेदनशीलता सर्वाधिक होती है।
उत्तर रेलवे का आधिकारिक खंडन
उत्तर रेलवे ने कांग्रेस नेता के आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए अपने आधिकारिक हैंडल से स्पष्टीकरण जारी किया। रेलवे ने कहा, 'बड़गाम से आदर्श नगर, दिल्ली के बीच चलने वाली कार्गो पार्सल ट्रेन सेवा पूरी तरह कार्यरत है और इसे बंद नहीं किया गया है। सितंबर 2025 से यह सेवा लगातार जारी है और कश्मीर घाटी के किसानों व व्यापारियों के लिए एक वरदान साबित हुई है।'
परिवहन के आँकड़े
रेलवे ने इस सेवा के संचालन के विस्तृत आँकड़े भी सार्वजनिक किए। आँकड़ों के अनुसार, गाड़ी संख्या 00462 (बड़गाम से आदर्श नगर दिल्ली) अब तक कुल 332 वैगन पार्सल (वीपी) — जिनमें एसएलआर भी शामिल हैं — के ज़रिए 7,389 टन माल का परिवहन कर चुकी है। वापसी में गाड़ी संख्या 00461 (आदर्श नगर दिल्ली से बड़गाम) ने 786 वीपी के माध्यम से 17,450 टन सामान ढोया है।
किसानों और बागवानों पर असर
रेलवे अधिकारियों के अनुसार इस सेवा से घाटी के सेब, चेरी, अखरोट और अन्य बागवानी उत्पादों को सीधे राष्ट्रीय राजधानी के बाज़ारों तक पहुँचाने में उल्लेखनीय मदद मिली है। इससे न केवल ढुलाई का खर्च कम हुआ है, बल्कि किसानों को बेहतर मूल्य भी प्राप्त हो रहा है।
गौरतलब है कि कश्मीर के बागवान पहले पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर थे, जहाँ मानसून के दौरान भूस्खलन और राजमार्ग जाम के कारण माल खराब हो जाता था और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। पार्सल ट्रेन ने इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किया है।
आगे की राह
उत्तर रेलवे ने भरोसा दिलाया है कि यह सेवा भविष्य में भी इसी तरह अनवरत जारी रहेगी और घाटी की कृषि अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करती रहेगी। रेलवे का कहना है कि फल, सब्ज़ियाँ और अन्य कृषि उत्पादों को किफ़ायती, तेज़ और सुरक्षित तरीके से देश के बड़े बाज़ारों तक पहुँचाना इस सेवा की प्राथमिकता है।