बुलेट ट्रेन: बिलिमोरा में पहला ट्रैक्शन सबस्टेशन अंतिम चरण में, 14 में से पहला TSS तैयार होने वाला
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत गुजरात के नवसारी जिले के बिलिमोरा में निर्माणाधीन देश के पहले ट्रैक्शन सबस्टेशन (TSS) का काम अंतिम पड़ाव पर पहुँच गया है। 508 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए कुल 14 ट्रैक्शन सबस्टेशन प्रस्तावित हैं, जिनमें से बिलिमोरा का यह सबस्टेशन सबसे पहले पूर्णता की ओर अग्रसर है। यह घटनाक्रम भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना की विद्युत अवसंरचना निर्माण में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
निर्माण की स्थिति
करीब 18,000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस सबस्टेशन में उपकरणों की स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग का कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। कंट्रोल पैनल, चेंजओवर स्विच, ट्रांसफॉर्मर और सर्किट ब्रेकर भवनों में उपकरण लगाने का काम पूरा हो चुका है। इसके साथ ही सभी गैंट्री टावर और बीम का निर्माण भी संपन्न हो गया है।
बिजली आपूर्ति प्रणाली कैसे काम करेगी
ये सबस्टेशन गुजरात एनर्जी ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (GETCO) के 220 केवी अंबेठा ग्रिड सबस्टेशन से विद्युत आपूर्ति ग्रहण करेंगे। इसके बाद 2×25 केवी ट्रैक्शन पावर सप्लाई सिस्टम के ज़रिए यह बिजली वायाडक्ट पर स्थापित ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) तक पहुँचाई जाएगी। अंततः ट्रेनों के पैंटोग्राफ के माध्यम से ट्रेनों को ऊर्जा मिलेगी और पूरे नेटवर्क की निगरानी एक केंद्रीकृत नियंत्रण केंद्र से रीयल टाइम में होगी।
कॉरिडोर पर सबस्टेशनों का वितरण
कुल 14 ट्रैक्शन सबस्टेशनों में से 5 महाराष्ट्र में — मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर और ठाणे डिपो — में निर्मित हो रहे हैं। वहीं, शेष 9 सबस्टेशन गुजरात में — वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, महेमदाबाद, अहमदाबाद और साबरमती डिपो — में स्थापित किए जाएंगे।
परियोजना का महत्व
गौरतलब है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना है, जो महाराष्ट्र और गुजरात को आपस में जोड़ेगी। यह परियोजना ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब देश में हाई-स्पीड रेल अवसंरचना के विस्तार को लेकर नीतिगत प्राथमिकता स्पष्ट है। ट्रैक्शन सबस्टेशन इस पूरी बिजली अवसंरचना की रीढ़ हैं — इनके बिना ट्रेनों का संचालन संभव नहीं।
आगे क्या
बिलिमोरा TSS के कमीशनिंग चरण में प्रवेश करने के साथ ही शेष 13 सबस्टेशनों के निर्माण की गति पर भी नज़र रहेगी। पूरे कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेनों के सुचारु संचालन के लिए सभी 14 सबस्टेशनों का समयबद्ध पूर्ण होना अनिवार्य है, और बिलिमोरा की प्रगति इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।