पश्चिम बंगाल बाइबल सम्मेलन हमला: सीबीसीआई ने की कड़ी निंदा, अमित शाह से हस्तक्षेप की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (सीबीसीआई) ने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में आयोजित एक शांतिपूर्ण बाइबल सम्मेलन के दौरान हुई कथित हिंसा और व्यवधान की कड़ी निंदा की है। संगठन ने राज्य सरकार से दोषियों के विरुद्ध तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।
घटनाक्रम: कहाँ और कब हुआ
सीबीसीआई के बयान के अनुसार, कृष्णानगर डायोसीज के अंतर्गत स्थित डिवाइन लव रिट्रीट सेंटर, जलालखाली में 8 से 11 अक्टूबर 2026 तक वार्षिक संताली मेगा बाइबल कन्वेंशन रिट्रीट का आयोजन किया गया था। संगठन का दावा है कि यह चार दिवसीय कार्यक्रम पूर्णतः शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन था और इसके लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियाँ पहले से प्राप्त की गई थीं। पुलिस सुरक्षा के लिए भी औपचारिक अनुरोध किया गया था।
हमले का विवरण
सीबीसीआई के बयान के अनुसार, 9 अक्टूबर 2026 की शाम सेंट लुइस पैरिश चर्च के निकट बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए। कथित तौर पर लाउडस्पीकर के माध्यम से 'जबरन धर्मांतरण' का आरोप लगाते हुए संदेश प्रसारित किए गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।
संगठन का आरोप है कि इसके बाद भीड़ ने चर्च-विरोधी नारे लगाए, चर्च की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और परिसर की सुरक्षा कर रहे लोगों के साथ मारपीट की। इस घटना ने पादरियों, धार्मिक कर्मियों और रिट्रीट में शामिल प्रतिभागियों के बीच भय और असुरक्षा का माहौल उत्पन्न कर दिया।
सीबीसीआई की प्रतिक्रिया और माँगें
सीबीसीआई ने कहा कि किसी चर्च या निजी परिसर में प्रार्थना के लिए शांतिपूर्वक एकत्र हुए लोगों पर हमला करना संविधान प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। संगठन ने पश्चिम बंगाल सरकार से माँग की कि सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न करने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही सीबीसीआई ने यह भी माँग की कि ईसाई समुदाय और उनके संस्थान बिना किसी भय के अपने धार्मिक अधिकारों का पालन कर सकें। संगठन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया है, ताकि सभी अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किया जा सके।
व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े मामले राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक शांति बनाए रखना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही है, और ऐसे में यह कथित घटना प्रशासनिक चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
सीबीसीआई ने अपने बयान के अंत में स्पष्ट किया कि चर्च हमेशा शांति, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध रहा है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार और केंद्र की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।