पीएनबी घोटाला: संदीप मिस्त्री यूएई से भारत प्रत्यर्पित, सीबीआई ने 28 सितंबर को किया हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के समन्वय से पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाला मामले के प्रमुख आरोपी संदीप मिस्त्री को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े इस बहुचर्चित घोटाले में मिस्त्री की भूमिका केंद्रीय कड़ी के रूप में रही है। 28 सितंबर 2026 को मुंबई पहुँचने के तुरंत बाद सीबीआई अधिकारियों ने उसे हिरासत में ले लिया।
मुख्य घटनाक्रम
मिस्त्री के खिलाफ सीबीआई के अनुरोध पर इंटरपोल ने जुलाई 2026 में रेड नोटिस जारी किया था। इसके बाद यूएई के अधिकारियों ने उसे तलाश कर गिरफ्तार किया और प्रत्यर्पण/डिपोर्टेशन की प्रक्रिया आरंभ की। रेड नोटिस जारी होने के लगभग दो महीने के भीतर ही मिस्त्री को भारत लाया जा सका — जिसे सीबीआई ने भारतीय और यूएई अधिकारियों के बीच प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है।
मुंबई आगमन के बाद उसे सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मामले की जांच सीबीआई की बैंक सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (बीएसएफबी), मुंबई द्वारा की जा रही है, और एजेंसी संबंधित अदालत में आरोपपत्र पहले ही दाखिल कर चुकी है।
मिस्त्री की कथित भूमिका
जांच एजेंसी के अनुसार, मिस्त्री ने इस कथित घोटाले में शामिल कई कंपनियों और संस्थाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम किया। वह इन संस्थाओं का रोज़मर्रा का कामकाज संभालता था और कथित तौर पर जांच एजेंसियों की नज़र से बचने तथा साक्ष्य नष्ट करने के लिए ऐसे गुप्त संचार प्लेटफॉर्म का उपयोग करता था, जिनमें संदेश स्वतः डिलीट हो जाते थे।
सीबीआई का आरोप है कि मिस्त्री ने हीरे, सोने और मोती के आभूषणों के काल्पनिक व्यापार को वास्तविक दिखाने के लिए शेल कंपनियों के ज़रिये फर्जी आयात-निर्यात दस्तावेज़ तैयार कराने में सहयोग किया। इसके अतिरिक्त, उस पर अन्य साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर विदेशी कंपनियों के डमी निदेशकों को धमकाने का भी आरोप है।
डमी निदेशकों पर कथित दबाव
जांच के मुताबिक, डमी निदेशकों को गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी, उनका स्थान बदलवाया जाता था और उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाते थे। इसके साथ ही उन्हें ऐसे दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाता था, जिनमें उन्हें संबंधित कंपनियों का वैध मालिक दर्शाया गया था।
जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि मिस्त्री ने यूएई में स्थित डमी कंपनियों के बैंक खातों से धन निकालने में भी भूमिका निभाई। ये सभी आरोप अदालत में दाखिल आरोपपत्र का हिस्सा हैं।
सीबीआई और इंटरपोल की भूमिका
गौरतलब है कि सीबीआई भारत की ओर से इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में कार्य करती है। एजेंसी भारतपोल के माध्यम से घरेलू कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय कर अंतरराष्ट्रीय पुलिस सहयोग को सुगम बनाती है। सीबीआई के अनुसार, इंटरपोल चैनलों के ज़रिये हाल के वर्षों में 175 से अधिक वांछित भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है।
यह प्रत्यर्पण ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत कर रही है। विजय माल्या और नीरव मोदी के लंबे प्रत्यर्पण संघर्षों के बाद मिस्त्री की त्वरित वापसी इस दिशा में एक उल्लेखनीय कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
मिस्त्री के न्यायिक हिरासत में जाने के बाद अब अदालती कार्यवाही तेज़ होने की संभावना है। सीबीआई पहले ही आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, ऐसे में मुकदमे की सुनवाई की तारीख़ें जल्द तय होने की उम्मीद है। इस मामले में अन्य संदिग्धों की तलाश भी जारी है।