28 जुलाई 2026
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नीरव मोदी प्रत्यर्पण: यूके की कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही भारत लाया जाएगा — विदेश मंत्रालय

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नीरव मोदी प्रत्यर्पण: यूके की कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही भारत लाया जाएगा — विदेश मंत्रालय

सारांश

MEA ने एक बार फिर स्पष्ट किया — नीरव मोदी को भारत लाया जाएगा, लेकिन यूके की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद। मार्च में लंदन हाई कोर्ट ने उसकी पुनः सुनवाई की याचिका खारिज कर दी थी। PNB घोटाले का यह भगोड़ा 2018 से ब्रिटेन में है।

मुख्य बातें

MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि नीरव मोदी का प्रत्यर्पण यूके की न्यायिक प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद होगा।
मार्च 2026 में लंदन हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की प्रत्यर्पण आदेश पर पुनः सुनवाई की याचिका खारिज की।
नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में वांछित है; जनवरी 2018 में भारत छोड़कर फरार हुआ।
2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तारी के बाद यूके अदालतों ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी; पूर्व की अपीलें खारिज हो चुकी हैं।
CBI की विशेष टीम लंदन सुनवाई में क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के साथ समन्वय कर रही है।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने 28 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को यूनाइटेड किंगडम (यूके) से भारत लाने की प्रक्रिया वहाँ चल रही सभी न्यायिक कार्यवाहियों के पूरा होने के बाद आगे बढ़ेगी। नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी दी।

मुख्य घटनाक्रम

प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'नीरव मोदी के मामले में, जैसा कि हमने पहले भी बताया है, यूके में कुछ न्यायिक प्रक्रियाएँ अभी चल रही हैं। जब ये कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी हो जाएँगी, उसके बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार इन प्रक्रियाओं पर करीब से नज़र रख रही है और सभी भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कराने की नीति पर कायम है।

यूके अदालत में ताज़ा स्थिति

मार्च 2026 में लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीज़न ने नीरव मोदी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के विरुद्ध पुनः सुनवाई की माँग की थी। इस सुनवाई में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकीलों ने दलीलें रखीं और उन्हें केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम का सहयोग मिला, जिसमें वे जाँच अधिकारी भी शामिल थे जो सुनवाई में सहायता के लिए लंदन गए थे।

गौरतलब है कि पुनः सुनवाई की यह याचिका बचाव पक्ष के बिचौलिए संजय भंडारी के मामले में यूके हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर दायर की गई थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाला: पृष्ठभूमि

नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में भारत में वांछित है। आरोप है कि सरकारी बैंक के नाम पर जारी फ़र्ज़ी गारंटी पत्रों (Letter of Undertaking) का उपयोग करके विदेशों से अरबों रुपये का कर्ज़ लिया गया। जनवरी 2018 में घोटाले के उजागर होने से पहले ही वह भारत छोड़कर फरार हो गया था। इसके तुरंत बाद CBI ने जाँच शुरू की।

2019 में ब्रिटेन में उसकी गिरफ्तारी के बाद वहाँ की अदालतों ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। सुनवाई के दौरान अदालतों ने भारत में उसके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासनों को स्वीकार किया और पाया कि प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसके बाद की पहले की अपीलें भी खारिज की जा चुकी हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया

MEA का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत सरकार कूटनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सक्रिय है। यह ऐसे समय में आया है जब भगोड़े आर्थिक अपराधियों — जिनमें विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे नाम शामिल हैं — के प्रत्यर्पण की प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय न्यायिक जटिलताओं के कारण लंबी खिंच रही हैं।

आगे क्या होगा

यूके में शेष न्यायिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण की अंतिम कार्यवाही शुरू हो सकेगी। MEA ने संकेत दिया है कि वह इस मामले पर निरंतर निगरानी रख रहा है और प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों के साथ समन्वय जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दशकों तक खिंच सकती है। विजय माल्या अभी भी ब्रिटेन में हैं; मेहुल चोकसी का मामला अंतिगुआ से होते हुए बेल्जियम तक पहुँच गया। MEA का 'हम नज़र रख रहे हैं' वाला बयान राजनयिक दृष्टि से सतर्क है, परंतु यह उस जवाबदेही के सवाल से बचता है कि इतने वर्षों बाद भी प्रत्यर्पण क्यों अधूरा है। जब तक ठोस समयसीमा और कानूनी परिणाम सार्वजनिक नहीं होते, ये बयान महज़ आश्वासन बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीरव मोदी का प्रत्यर्पण अभी तक क्यों नहीं हुआ?
यूके में अभी कुछ न्यायिक प्रक्रियाएँ लंबित हैं जिनके पूरा होने के बाद ही प्रत्यर्पण की अंतिम कार्यवाही शुरू हो सकती है। MEA के अनुसार, सरकार इन प्रक्रियाओं पर करीब से नज़र रख रही है।
लंदन हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की याचिका क्यों खारिज की?
मार्च 2026 में लंदन की हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीज़न ने नीरव मोदी की वह याचिका खारिज की जिसमें उसने प्रत्यर्पण आदेश पर पुनः सुनवाई माँगी थी। यह याचिका बिचौलिए संजय भंडारी के मामले में आए फैसले के आधार पर दायर की गई थी, जिसे अदालत ने अपर्याप्त आधार मानकर अस्वीकार कर दिया।
नीरव मोदी पर क्या आरोप हैं?
नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें फ़र्ज़ी Letter of Undertaking के ज़रिए विदेशों से अरबों रुपये का कर्ज़ लिया गया। जनवरी 2018 में घोटाला उजागर होने से पहले वह भारत छोड़कर फरार हो गया था।
नीरव मोदी को ब्रिटेन में कब गिरफ्तार किया गया था?
नीरव मोदी को 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यूके की अदालतों ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी और उसकी पूर्व की अपीलें भी खारिज कर दी गईं।
भारत सरकार नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के लिए क्या कदम उठा रही है?
MEA ब्रिटिश अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है और CBI की एक विशेष टीम लंदन में क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के साथ मिलकर काम कर रही है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि सभी भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कराया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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