नीरव मोदी प्रत्यर्पण: यूके की कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही भारत लाया जाएगा — विदेश मंत्रालय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 28 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को यूनाइटेड किंगडम (यूके) से भारत लाने की प्रक्रिया वहाँ चल रही सभी न्यायिक कार्यवाहियों के पूरा होने के बाद आगे बढ़ेगी। नई दिल्ली में आयोजित द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी दी।
मुख्य घटनाक्रम
प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'नीरव मोदी के मामले में, जैसा कि हमने पहले भी बताया है, यूके में कुछ न्यायिक प्रक्रियाएँ अभी चल रही हैं। जब ये कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी हो जाएँगी, उसके बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार इन प्रक्रियाओं पर करीब से नज़र रख रही है और सभी भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना कराने की नीति पर कायम है।
यूके अदालत में ताज़ा स्थिति
मार्च 2026 में लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीज़न ने नीरव मोदी की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के विरुद्ध पुनः सुनवाई की माँग की थी। इस सुनवाई में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकीलों ने दलीलें रखीं और उन्हें केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की एक विशेष टीम का सहयोग मिला, जिसमें वे जाँच अधिकारी भी शामिल थे जो सुनवाई में सहायता के लिए लंदन गए थे।
गौरतलब है कि पुनः सुनवाई की यह याचिका बचाव पक्ष के बिचौलिए संजय भंडारी के मामले में यूके हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर दायर की गई थी, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
पंजाब नेशनल बैंक घोटाला: पृष्ठभूमि
नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले में भारत में वांछित है। आरोप है कि सरकारी बैंक के नाम पर जारी फ़र्ज़ी गारंटी पत्रों (Letter of Undertaking) का उपयोग करके विदेशों से अरबों रुपये का कर्ज़ लिया गया। जनवरी 2018 में घोटाले के उजागर होने से पहले ही वह भारत छोड़कर फरार हो गया था। इसके तुरंत बाद CBI ने जाँच शुरू की।
2019 में ब्रिटेन में उसकी गिरफ्तारी के बाद वहाँ की अदालतों ने प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। सुनवाई के दौरान अदालतों ने भारत में उसके साथ व्यवहार को लेकर दिए गए आश्वासनों को स्वीकार किया और पाया कि प्रत्यर्पण में कोई कानूनी बाधा नहीं है। इसके बाद की पहले की अपीलें भी खारिज की जा चुकी हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
MEA का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि भारत सरकार कूटनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सक्रिय है। यह ऐसे समय में आया है जब भगोड़े आर्थिक अपराधियों — जिनमें विजय माल्या और मेहुल चोकसी जैसे नाम शामिल हैं — के प्रत्यर्पण की प्रक्रियाएँ अंतरराष्ट्रीय न्यायिक जटिलताओं के कारण लंबी खिंच रही हैं।
आगे क्या होगा
यूके में शेष न्यायिक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही नीरव मोदी के भारत प्रत्यर्पण की अंतिम कार्यवाही शुरू हो सकेगी। MEA ने संकेत दिया है कि वह इस मामले पर निरंतर निगरानी रख रहा है और प्रत्यर्पण सुनिश्चित करने के लिए ब्रिटिश अधिकारियों के साथ समन्वय जारी है।