अंकिता भंडारी हत्याकांड: CBI ने सहारनपुर में उर्मिला सनावर से की पूछताछ, पूर्व BJP विधायक राठौर से पूछताछ के अगले दिन कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एक चार सदस्यीय टीम ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में उर्मिला सनावर के आवास पर पहुँचकर उनसे अंकिता भंडारी हत्याकांड के सिलसिले में पूछताछ की। उर्मिला सनावर को पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक सुरेश राठौर की पत्नी बताया जाता है। यह कार्रवाई उस दिन के एक दिन बाद सामने आई जब CBI ने उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित शिवालिक गेस्ट हाउस में राठौर से पूछताछ की थी।
पूछताछ का संदर्भ और सनावर की भूमिका
CBI टीम में एक महिला अधिकारी भी शामिल थीं। यह पूछताछ ऐसे समय हुई जब सनावर इस हफ्ते की शुरुआत में नई दिल्ली में अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई थीं।
गौरतलब है कि सनावर ने पहले एक वीडियो संदेश जारी कर माँग की थी कि CBI को मीडिया की उपस्थिति में उनसे पूछताछ करनी चाहिए, क्योंकि कथित तौर पर यह जाँच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में नहीं हो रही है। इस माँग ने इस मामले को एक नया कानूनी और राजनीतिक आयाम दिया है।
मामला फिर चर्चा में कैसे आया
इस साल की शुरुआत में सनावर से जुड़े कुछ ऑडियो क्लिप और वीडियो वायरल हुए, जिसके बाद यह हत्याकांड एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया। एक फेसबुक लाइव सत्र के दौरान सनावर ने कथित तौर पर इस हत्या में एक 'वीआईपी' के शामिल होने का उल्लेख किया, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया।
इन घटनाओं के बाद विपक्षी दलों और कई संगठनों ने CBI जाँच की माँग तेज़ कर दी। बढ़ते जन-दबाव के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 9 जनवरी को आधिकारिक रूप से CBI जाँच की सिफारिश की। CBI ने इस साल फरवरी में मामला अपने हाथ में लिया और दिल्ली स्थित 'स्पेशल क्राइम ब्रांच' ने एक 'अज्ञात वीआईपी' के खिलाफ मामला दर्ज किया।
अंकिता भंडारी हत्याकांड: पृष्ठभूमि
19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या ने 2022 में पूरे उत्तराखंड में भारी आक्रोश पैदा किया था। वह 'वनंत्रा रिसॉर्ट' में कार्यरत थीं, जब 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई। उनका शव चिल्ला शक्ति नहर में फेंका गया था और लगभग एक सप्ताह बाद बरामद हुआ।
एक विशेष जाँच दल (SIT) की विस्तृत जाँच के बाद 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल हुई, जिसमें 97 गवाहों के नाम थे। इनमें से 47 गवाहों ने अदालत में गवाही दी। मुख्य आरोपी और वनंत्रा रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य तथा सह-आरोपी सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई। आर्य को हत्या, सबूतों से छेड़छाड़, उत्पीड़न और अनैतिक तस्करी सहित कई संगीन आरोपों में दोषी पाया गया।
राजनीतिक विरोध और परिवार की माँगें
इस बीच कई कार्यकर्ताओं और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने दुष्यंत गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के रूप में नियुक्ति को लेकर उत्तराखंड और दिल्ली में प्रदर्शन किए हैं। अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना दिया और माँग की कि गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को CBI जाँच पूरी होने तक रोका जाए।
अंकिता के माता-पिता ने बाद में गढ़वाल से BJP सांसद अनिल बलूनी के साथ CBI अधिकारियों से भी मुलाकात की और सरकार से आग्रह किया कि उनकी बेटी की हत्या के दोषियों को कड़ी-से-कड़ी सज़ा सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाया जाए।
आगे क्या होगा
CBI की जाँच अब स्पष्ट रूप से 'अज्ञात वीआईपी' कोण की ओर केंद्रित होती दिख रही है — एक ऐसा पहलू जिसे निचली अदालत की कार्यवाही में औपचारिक रूप से नहीं छुआ गया था। सनावर की पूछताछ और राठौर से हुई पूछताछ यह संकेत देती है कि जाँच एजेंसी इस कड़ी को जोड़ने में जुटी है। अगले कुछ हफ्तों में इस मामले में और बड़े घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।