20 सितंबर 2026
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सीबीएसई टॉकाथॉन: 'नशा मुक्त युवा' सेशन में एम्स विशेषज्ञ और NCB अधिकारी ने छात्रों को दी नशे के खतरों की जानकारी

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सीबीएसई टॉकाथॉन: 'नशा मुक्त युवा' सेशन में एम्स विशेषज्ञ और NCB अधिकारी ने छात्रों को दी नशे के खतरों की जानकारी

सारांश

सीबीएसई टॉकाथॉन का 'नशा मुक्त युवा' सत्र केवल एक चर्चा नहीं था — यह एम्स, NCB और स्कूल प्रशासन का एक साझा मोर्चा था। विशेषज्ञों ने 'कभी-कभार' नशे की भ्रांति को तोड़ा और छात्रों को बताया कि मस्तिष्क हमेशा पहला शिकार होता है।

मुख्य बातें

सीबीएसई टॉकाथॉन के 'नशा मुक्त युवा' सत्र में 20 सितंबर 2026 को विशेषज्ञों और छात्रों ने नशे की चुनौती पर चर्चा की।
एम्स के प्रोफेसर नंद कुमार ने बताया कि नशे से मस्तिष्क का 'रिवॉर्ड सर्किट' सबसे पहले प्रभावित होता है, जो लत की जड़ है।
NCB के अतिरिक्त निदेशक अनीश सी ने चेताया कि छिटपुट सेवन भी निर्भरता का जोखिम बढ़ाता है।
प्रिंसिपल अल्का अवस्थी ने कहा कि नशे का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं; सहानुभूति के साथ दोस्तों की मदद करना ज़रूरी है।
सीबीएसई स्कूलों में पीयर एंबेसडर और एजुकेटर्स पहले से मौजूद हैं जो सहपाठियों की चिंताजनक स्थिति की रिपोर्ट करते हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के टॉकाथॉन के एक विशेष सत्र में 20 सितंबर 2026 को विशेषज्ञों और छात्रों ने स्कूली विद्यार्थियों के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते उपयोग की चुनौती और उससे निपटने के उपायों पर गहन चर्चा की। 'नशा मुक्त युवा' अभियान पर केंद्रित इस इंटरैक्टिव सत्र का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और युवाओं को सशक्त बनाना था।

सत्र में कौन थे शामिल

इस लाइव वर्चुअल सत्र में नोएडा के मयूर स्कूल की प्रिंसिपल अल्का अवस्थी, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर नंद कुमार, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अतिरिक्त निदेशक अनीश सी तथा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय के कक्षा 12 के छात्र साम्या और रोहित भाग लिए। सीबीएसई टॉकाथॉन एक लाइव वर्चुअल सत्र-श्रृंखला है जिसमें विशेषज्ञ छात्रों और शिक्षकों से स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद करते हैं।

नशे का दिमाग पर असर — विशेषज्ञ की राय

प्रोफेसर नंद कुमार ने बताया कि नशीले पदार्थ सबसे पहले मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सर्किट' को अत्यधिक सक्रिय कर देते हैं, जिससे ऐसी तीव्र खुशी उत्पन्न होती है जिसकी तुलना सामान्य जीवन के अनुभवों से नहीं की जा सकती। यही प्रक्रिया उपयोगकर्ता को बार-बार उस पदार्थ की ओर खींचती है और अंततः उस पर निर्भरता बना देती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ शराब लीवर और पेट को, और सिगरेट फेफड़ों व गले को नुकसान पहुँचाती है, वहीं मस्तिष्क हमेशा पहला लक्ष्य होता है।

नंद कुमार ने इस धारणा को भी खारिज किया कि नशीले पदार्थों से एकाग्रता बढ़ती है, और इसे एक खतरनाक भ्रांति करार दिया। उन्होंने कहा कि ध्यान, एकाग्रता और नींद में मामूली बदलाव लत के सामान्य लक्षण हैं और यह संकेत देते हैं कि पेशेवर सहायता की आवश्यकता है।

NCB अधिकारी की चेतावनी — 'कभी-कभार' भी है खतरनाक

NCB के अतिरिक्त निदेशक अनीश सी ने उस आम गलतफहमी का खंडन किया जिसमें माना जाता है कि कभी-कभार शराब पीने से लत नहीं लगती। उन्होंने आगाह किया कि छिटपुट सेवन भी निर्भरता का जोखिम बढ़ा देता है, क्योंकि मस्तिष्क इसे आराम से जोड़ने लगता है और धीरे-धीरे यह आदत तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीकों की जगह ले लेती है।

स्कूल प्रमुख की सलाह — सहानुभूति और सतर्कता

प्रिंसिपल अल्का अवस्थी ने रेखांकित किया कि नशीले पदार्थों का सेवन किसी भी मात्रा में सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह तनाव से निपटने का एक अस्थायी पलायन बनाता है जो अंततः लत की ओर ले जाता है। हानिकारक आदतों से प्रभावित मित्रों की सहायता के संदर्भ में उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे सहानुभूति और धैर्य के साथ अपनी चिंता स्पष्ट रूप से व्यक्त करें। यदि कोई मित्र प्रतिक्रिया न दे, तो माता-पिता, स्कूल काउंसलर या पीयर एजुकेटर्स की मदद लेनी चाहिए।

गौरतलब है कि सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में पहले से ही पीयर एंबेसडर और एजुकेटर्स की व्यवस्था है, जो सहपाठियों पर नज़र रखते हैं और किसी भी चिंताजनक स्थिति की रिपोर्ट करते हैं। यह ढाँचा स्कूल परिसर में नशे के शुरुआती संकेतों को पकड़ने में सहायक बताया जाता है।

आगे की राह

यह सत्र ऐसे समय में आया है जब किशोरों में मादक पदार्थों के उपयोग को लेकर चिंताएँ राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ रही हैं। सीबीएसई का टॉकाथॉन मंच इस तरह के विशेषज्ञ-छात्र संवाद को नियमित रूप से आगे बढ़ाने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों ने जोर दिया कि जागरूकता, समय पर हस्तक्षेप और सामूहिक सहयोग ही नशामुक्त युवा पीढ़ी की नींव रख सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इस तरह की एकल वर्चुअल चर्चाएँ ज़मीनी स्तर पर कितना बदलाव ला पाती हैं। किशोरों में मादक पदार्थों की समस्या जहाँ गहराती जा रही है, वहाँ पीयर एंबेसडर जैसे ढाँचे की प्रभावशीलता का कोई सार्वजनिक मूल्यांकन उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों की सलाह सटीक है, पर बिना नियमित फॉलो-अप, शिक्षक प्रशिक्षण और माता-पिता की भागीदारी के, जागरूकता अभियान अक्सर एकतरफा संवाद बनकर रह जाते हैं।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई टॉकाथॉन क्या है और इसका 'नशा मुक्त युवा' सत्र किस पर केंद्रित था?
सीबीएसई टॉकाथॉन एक लाइव वर्चुअल सत्र-श्रृंखला है जिसमें विशेषज्ञ छात्रों और शिक्षकों से स्वास्थ्य व शिक्षा के मुद्दों पर सीधे संवाद करते हैं। 20 सितंबर 2026 का विशेष सत्र 'नशा मुक्त युवा' अभियान पर केंद्रित था, जिसमें स्कूली छात्रों के बीच नशीले पदार्थों के बढ़ते उपयोग और उससे बचाव के उपायों पर चर्चा हुई।
नशीले पदार्थ मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करते हैं?
एम्स के प्रोफेसर नंद कुमार के अनुसार, नशीले पदार्थ मस्तिष्क के 'रिवॉर्ड सर्किट' को अत्यधिक सक्रिय कर देते हैं, जिससे असामान्य रूप से तीव्र खुशी मिलती है। यह प्रक्रिया उपयोगकर्ता को बार-बार उस पदार्थ की ओर खींचती है और अंततः निर्भरता बना देती है।
क्या कभी-कभार शराब पीना वाकई सुरक्षित है?
NCB के अतिरिक्त निदेशक अनीश सी ने इस धारणा को गलत बताया। उनके अनुसार छिटपुट सेवन भी निर्भरता का जोखिम बढ़ाता है, क्योंकि मस्तिष्क इसे आराम से जोड़ने लगता है और धीरे-धीरे यह आदत तनाव से निपटने के स्वस्थ तरीकों की जगह ले लेती है।
अगर कोई दोस्त नशे की लत में फँसा हो तो क्या करें?
प्रिंसिपल अल्का अवस्थी ने सलाह दी कि सहानुभूति और धैर्य के साथ अपनी चिंता स्पष्ट रूप से व्यक्त करें। यदि मित्र प्रतिक्रिया न दे, तो माता-पिता, स्कूल काउंसलर या पीयर एजुकेटर्स की मदद लेनी चाहिए।
सीबीएसई स्कूलों में नशे की रोकथाम के लिए क्या व्यवस्था है?
सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में पीयर एंबेसडर और एजुकेटर्स की व्यवस्था है, जो सहपाठियों पर नज़र रखते हैं और चिंताजनक स्थितियों की रिपोर्ट करते हैं। यह ढाँचा नशे के शुरुआती संकेतों को पकड़ने में सहायक बताया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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