CDS जनरल राजा सुब्रमणि ने कारवार नेवल बेस पर किया बुनियादी ढाँचे का उद्घाटन, प्रोजेक्ट सीबर्ड फेज-2 को मिली रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 9 अक्टूबर 2026 को कारवार नौसैनिक अड्डे पर नवनिर्मित आवासीय भवनों और आवश्यक बुनियादी ढाँचे का उद्घाटन किया। यह प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण का अहम हिस्सा है, जो कारवार को देश के सबसे बड़े और सुसज्जित नौसैनिक केंद्रों में से एक बनाने की महत्वाकांक्षी परियोजना है। उद्घाटन समारोह में प्रोजेक्ट सीबर्ड के महानिदेशक वाइस एडमिरल विवेक दहिया और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
मुख्य घटनाक्रम
नौसेना के अनुसार, उद्घाटित सुविधाओं में नौसैनिकों के परिवारों के लिए 60 आवासीय इकाइयों वाला एक भवन शामिल है। इसके साथ ही रक्षा विभाग के नागरिक कर्मचारियों के लिए भी 60 आवासीय इकाइयों वाला एक अलग भवन तैयार किया गया है।
रक्षा सुरक्षा कोर (DSC) के 156 कर्मियों के लिए आवास की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, मंजिल क्रीक के पूर्वी क्षेत्र और अमदाल्ली में नई आवासीय सुविधाएँ और एक बालवाटिका विद्यालय भी बनाया गया है, जिससे अड्डे पर तैनात कर्मियों के बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित होगी।
प्रोजेक्ट सीबर्ड: परियोजना की विस्तृत रूपरेखा
नौसेना के मुताबिक प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण के अंतर्गत कारवार में आधुनिक नौसैनिक हवाई अड्डे, नौसैनिक डॉक और जहाजों व विमानों के लिए रसद सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। यह परियोजना युद्धपोतों और पनडुब्बियों दोनों की तैनाती के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना तैयार करने पर केंद्रित है।
गौरतलब है कि कारवार नौसैनिक अड्डे पर परिवारों सहित लगभग 10,000 वर्दीधारी और नागरिक कर्मियों के रहने की योजना है। यह संख्या इस परियोजना के विशाल पैमाने को दर्शाती है और इसे पश्चिमी समुद्री तट पर भारतीय नौसेना की रणनीतिक उपस्थिति के लिहाज़ से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
आत्मनिर्भर भारत और पर्यावरण का ध्यान
नौसेना के अनुसार, प्रोजेक्ट सीबर्ड में आत्मनिर्भर भारत के सिद्धांत को प्राथमिकता दी गई है। परियोजना के लिए 90 प्रतिशत से अधिक सामग्री और उपकरण घरेलू स्रोतों से जुटाए जा रहे हैं।
पर्यावरण के प्रति सजग दृष्टिकोण के तहत, परियोजना पूरी होने पर इसे भारतीय हरित भवन परिषद (IGBC) की स्वर्ण श्रेणी की मान्यता दिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्माण के दौरान पर्यावरण संबंधी निर्धारित मानकों का पालन किया जा रहा है।
आम जनता और क्षेत्र पर असर
कारवार नौसैनिक अड्डे का विस्तार कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ ज़िले की आर्थिक गतिविधियों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है। स्थानीय उद्योगों और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वहीं निर्माण कार्य और उससे जुड़ी गतिविधियों में रोज़गार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को हिंद महासागर क्षेत्र में और सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। कारवार की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति — अरब सागर के तट पर — इसे नौसैनिक संचालन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाती है।
क्या होगा आगे
प्रोजेक्ट सीबर्ड के दूसरे चरण का काम अभी जारी है। नौसैनिक हवाई अड्डे, आधुनिक डॉक और पूर्ण रसद व्यवस्था के विकास के साथ ही यह परियोजना भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान को और मज़बूती देगी। परियोजना के शेष निर्माण कार्यों की पूर्णता के बाद कारवार अड्डा देश का सबसे बड़ा नौसैनिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।