सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से की शिष्टाचार भेंट
सारांश
मुख्य बातें
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 24 जुलाई 2025 को संसद भवन स्थित उपराष्ट्रपति कार्यालय में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से शिष्टाचार भेंट की। उपराष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी संक्षिप्त विज्ञप्ति में इस मुलाकात की पुष्टि की गई।
मुख्य घटनाक्रम
देश के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में पदभार संभालने के बाद जनरल सुब्रमणि उच्च संवैधानिक पदाधिकारियों से शिष्टाचार भेंट की श्रृंखला जारी रखे हुए हैं। इससे कुछ दिन पूर्व उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी इसी प्रकार की मुलाकात की थी। जनरल सुब्रमणि ने 31 मई 2025 को देश के सर्वोच्च सैन्य समन्वय पद — चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ — का कार्यभार विधिवत संभाला था।
सीडीएस की प्राथमिकताएँ और दायित्व
सीडीएस के रूप में जनरल सुब्रमणि की जिम्मेदारी थल सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच संयुक्तता बढ़ाने, थिएटर कमान व्यवस्था को गति देने और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया का नेतृत्व करने की है। रिपोर्टों के अनुसार उनकी प्राथमिकताओं में नई प्रौद्योगिकियों का समावेश, भविष्य के युद्धक्षेत्रों के अनुरूप तैयारी और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों को प्रोत्साहन देना शामिल माना जा रहा है।
जनरल सुब्रमणि की पृष्ठभूमि
जनरल एनएस राजा सुब्रमणि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के स्नातक हैं। उन्हें 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। चार दशक से अधिक के सैन्य अनुभव के साथ उन्होंने देश के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण दायित्व निभाए हैं।
गौरतलब है कि सीडीएस का कार्यभार संभालने से पहले वे 1 सितंबर 2024 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे। इससे पूर्व 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक वे भारतीय सेना के उप प्रमुख रहे, और मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर कार्यरत थे।
सीडीएस पद का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की सैन्य संरचना में थिएटर कमान के गठन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। सीडीएस का पद — जो 2020 में स्थापित किया गया था — तीनों सेनाओं के बीच रणनीतिक एकीकरण और संयुक्त युद्धक क्षमता विकसित करने के लिए केंद्रीय भूमिका में है। जनरल सुब्रमणि की नियुक्ति और उनकी शिष्टाचार भेंटों की यह श्रृंखला इस दिशा में सैन्य-नागरिक समन्वय को मज़बूत करने के प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है।