सीडीएस जनरल राजा सुब्रमणि और फ्रांसीसी समकक्ष जनरल मैंडन की नई दिल्ली में रणनीतिक वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने मंगलवार, 21 जुलाई को नई दिल्ली में फ्रांस के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल (एयर) फैबियन मैंडन के साथ उच्चस्तरीय रणनीतिक वार्ता की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब भारत और फ्रांस रक्षा, अंतरिक्ष और औद्योगिक सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को नई ऊँचाई देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर औपचारिक स्वागत
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) मुख्यालय के अनुसार, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर सेरेमोनियल गार्ड ऑफ ऑनर और श्रद्धांजलि के बाद दोनों वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बीच विस्तृत रणनीतिक चर्चा हुई। जनरल मैंडन ने अपने स्वागत के लिए जनरल सुब्रमणि का आभार व्यक्त किया और दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर विशेष बल दिया।
फ्रांसीसी सीडीएस के कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, 'भारतीय सुरक्षा बलों के प्रमुख जनरल राजा सुब्रमणि से मिलकर सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। फ्रांस और भारतीय सेना इस क्षेत्र में अभ्यास के हिस्से के रूप में नियमित प्रशिक्षण करती हैं, जिससे हमारे बीच भरोसे का संबंध और मजबूत होता है।'
वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा — मुख्य घटनाक्रम
फ्रांसीसी सीडीएस के बयान में आगे कहा गया कि दोनों देश 'रणनीतिक नज़दीकी पर आधारित एक विशेष रूप से घनिष्ठ और गतिशील सहयोग' बनाए रखते हैं, जिसे हाल ही में वैश्विक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया गया है। यह उन्नयन दोनों देशों के बीच साझा महत्वाकांक्षा के स्तर का प्रमाण बताया गया।
गौरतलब है कि जनरल मैंडन ने अपनी भारत यात्रा के पहले दिन सोमवार को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की थी, जिसमें द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
आत्मनिर्भर भारत और सह-उत्पादन पर जोर
बैठक में 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन के अनुरूप सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन के माध्यम से रक्षा औद्योगिक सहयोग को गति देने पर विशेष सहमति बनी। साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया फ्रांस यात्रा के दौरान हुए समझौतों और परिणामों को आगे बढ़ाने पर भी दोनों पक्षों ने सहमति व्यक्त की।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। फ्रांस, जो राफेल लड़ाकू विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म का आपूर्तिकर्ता रहा है, इस दिशा में भारत का एक स्वाभाविक भागीदार है।
मोदी की फ्रांस यात्रा की पृष्ठभूमि
पिछले महीने अपनी फ्रांस यात्रा के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'जब बात जुड़ाव और नतीजों की आती है, तो फ्रांस का यह दौरा बहुत बड़ा रहा है। इसकी शुरुआत नीस से हुई, जहाँ भारत इनोवेट्स प्रोग्राम हुआ। उसके बाद जी7 के लिए एवियन और फिर पेरिस में, जहाँ मैंने वीवाटेक 2026 और एक बड़े कम्युनिटी प्रोग्राम को संबोधित किया।'
मोदी ने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि 'आने वाले समय में भारत-फ्रांस की दोस्ती और भी मजबूत होगी।' जनरल मैंडन की यह नई दिल्ली यात्रा उसी कूटनीतिक गति को सैन्य स्तर पर आगे बढ़ाने का हिस्सा मानी जा रही है।
आगे की राह
भारत-फ्रांस रक्षा संबंध अब केवल उपकरण खरीद तक सीमित नहीं रहे — संयुक्त अभ्यास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और औद्योगिक साझेदारी इस रिश्ते के नए आयाम बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के ताज़ा दर्जे के बाद दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की रफ्तार और तेज होने की उम्मीद है।