जनरल एन.एस. राजा सुब्रामनी ने संभाला तीसरे CDS का कार्यभार, 'जय' विजन होगा सर्वोच्च प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
जनरल एन.एस. राजा सुब्रामनी ने 31 मई 2026 को भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार ग्रहण किया। नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में आयोजित समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया, जो 30 मई को साढ़े तीन वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए।
'जय' विजन: नई प्राथमिकताएँ
कार्यभार ग्रहण करने के बाद जनरल सुब्रामनी ने स्पष्ट किया कि उनके नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों की केंद्रीय प्राथमिकता 'जय' — अर्थात जॉइंटनेस (संयुक्तता), आत्मनिर्भरता और नवाचार — होगी। उन्होंने कहा कि सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय, तालमेल और एकीकृत संचालन क्षमता विकसित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
जनरल सुब्रामनी ने यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय, रणनीतिक संस्थान और सभी संबंधित पक्ष 'राष्ट्र-समग्र दृष्टिकोण' के तहत एकजुट होकर भारत की सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए कार्य करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'जय' विजन को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
आत्मनिर्भरता पर ज़ोर
नए CDS ने आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए कहा कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास, उत्पादन और प्रभावी एकीकरण की प्रक्रिया को और तेज़ किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करते हुए आधुनिक और अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार प्रणालियों के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भविष्य के युद्धक्षेत्रों की चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच संसाधनों, तकनीक और रणनीतियों का साझा उपयोग अनिवार्य है। सशस्त्र बलों में परिवर्तन और संगठनात्मक सुधारों के माध्यम से संयुक्तता और एकीकरण को नई गति दी जाएगी।
पूर्ववर्ती CDS जनरल चौहान की विरासत
सेवानिवृत्त हुए जनरल अनिल चौहान ने अपने साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में सैन्य सुधारों और थिएटर कमांड जैसी महत्त्वपूर्ण पहलों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। सेवानिवृत्ति के अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुँचकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
जनरल सुब्रामनी का करियर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
जनरल सुब्रामनी को 14 दिसंबर 1985 को गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। 40 वर्षों से अधिक के गौरवशाली करियर में उन्होंने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी। उन्होंने ऑपरेशन राइनो के अंतर्गत असम में उग्रवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली तथा जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 17 माउंटेन डिवीजन की कमान भी संभाली।
उन्हें पश्चिमी मोर्चे पर तैनात प्रमुख स्ट्राइक कोर 'II कोर' की कमान का गौरव भी प्राप्त है। वे 1 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक सेना उप प्रमुख रहे और 1 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत थे।
शैक्षणिक दृष्टि से वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के स्नातक हैं। उन्होंने किंग्स कॉलेज, लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एमफिल की उपाधि प्राप्त की है। वे यूनाइटेड किंगडम स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, ब्रैकनेल और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व छात्र भी हैं।
आगे की राह
जनरल सुब्रामनी के समक्ष थिएटर कमांड के क्रियान्वयन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को गति देने और तीनों सेनाओं के बीच एकीकृत संचालन को धरातल पर उतारने की चुनौती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत की सीमाओं पर सामरिक दबाव बना हुआ है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय नीति की धुरी बन चुकी है।