सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने नई दिल्ली में सीबीआरएन कॉन्क्लेव का किया उद्घाटन
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआरएन खतरे के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयास
- सुरक्षा एजेंसियों का समन्वय
- उन्नत तकनीक का विकास
- सशक्त भारत के लिए अनुसंधान प्रयास
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा 26 और 27 फरवरी को मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली में केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (सीबीआरएन) कॉन्क्लेव का आयोजन हो रहा है। इस सम्मेलन का विषय है 'नीति से अभ्यास तक: सीबीआरएन लचीले भारत का निर्माण' और इसका उद्घाटन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया।
यह कॉन्क्लेव सशस्त्र बलों, सीएपीएफ और एनडीआरएफ के विभिन्न विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य सीबीआरएन खतरों के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया को और अधिक मजबूत करना है।
सीडीएस अनिल चौहान ने अपने भाषण में सीबीआरएन रक्षा प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में डीआरडीओ द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत परमाणु ब्लैकमेल से भयभीत नहीं होगा। उन्होंने जोर दिया कि सीबीआरएन को एक खतरे के रूप में देखने के बजाय एक वातावरण के रूप में समझने की आवश्यकता है और हमें दूषित वातावरण में जीवन और कार्य करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने अर्ली वार्निंग सिस्टम, हल्के वजन वाले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों और गैजेट्स, अच्छे अनुसंधान किए गए एसओपी और सैन्य एवं नागरिक प्रतिष्ठानों के साथ तालमेल बनाकर समन्वित संचालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षा आर एंड डी विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने अपनी विशिष्ट प्रयोगशालाओं और केंद्रों के माध्यम से सीबीआरएन सक्षम भारत बनाने की डीआरडीओ की प्रतिबद्धता व्यक्त की, जो विशेष रूप से सीबीआरएन खतरों के खिलाफ उन्नत तकनीक विकसित करने पर केंद्रित हैं।
उन्होंने सम्मेलन के प्रतिभागियों से अपील की कि वे इसे आपसी सीखने का अवसर मानें और एक सशक्त भारत के निर्माण में अनुसंधान प्रयासों को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
इस कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि, डीजी सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमसी) सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने इस कॉन्क्लेव के समय पर आयोजन के लिए डीआरडीओ को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल वैज्ञानिकों और इंजीनियरों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों पर चर्चा करने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य की तकनीक विकसित करने के लिए एक ठोस योजना बनाने में 'यूजर' का दृष्टिकोण भी सामने आएगा।
उन्होंने 'विकिरण प्रहरी' कार्यक्रम की सराहना की, जो एएफएमसी और सीएपीएफ के डॉक्टरों को प्रशिक्षित करने के लिए डीआरडीओ और एएफएमएस की एक संयुक्त पहल है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप रेडियोलॉजिकल घटनाओं के चिकित्सा प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति की उपलब्धता और क्षमता निर्माण हुआ है।
डीजी (सोल्जर सपोर्ट सिस्टम) डॉ. यूके सिंह ने कॉन्क्लेव की व्यापक रूपरेखा और जुड़ाव के तरीकों को स्पष्ट किया। उन्होंने सभी हितधारकों से इस मंच का उपयोग विभिन्न परिदृश्यों और उनके संचालन की जटिलताओं को उजागर करने तथा एक समग्र योजना तैयार करने के लिए करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह योजना किसी भी प्रकार के सीबीआरएन खतरे से निपटने के लिए प्रासंगिक गति के साथ उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगी।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम का मुख्य फोकस प्रशिक्षण में हितधारकों के दृष्टिकोण को शामिल करना और प्रौद्योगिकियों के समावेश के माध्यम से राष्ट्रीय लचीलेपन को बढ़ाना है। इससे सीबीआरएन घटनाओं को संभालने के लिए सुरक्षा एजेंसियों की समन्वित प्रतिक्रिया की तैयारी को मजबूती मिलेगी।
कॉन्क्लेव ने देश की सीबीआरएन सुरक्षा और रक्षा के लिए अत्याधुनिक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग करते हुए एक मजबूत 'नेशनल नेटवर्क सेंट्रिक कमांड एंड कंट्रोल फ्रेमवर्क' बनाने की डीआरडीओ की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।