प्रणव अदाणी: भारत को चाहिए ऐसे मंच जो विविध दृष्टिकोण एकजुट करें, CRF दिवस पर बोले
सारांश
मुख्य बातें
अदाणी एंटरप्राइजेज के निदेशक प्रणव अदाणी ने 19 जून 2026 को नई दिल्ली के आईटीसी मौर्या में आयोजित चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) दिवस कार्यक्रम में कहा कि राष्ट्रों को ऐसे मंचों की आवश्यकता है जो विविध दृष्टिकोणों को एकजुट कर सकें और भविष्य को आकार देने वाले मुद्दों पर साक्ष्य-आधारित विश्लेषण प्रस्तुत कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि भारत आत्मविश्वास और विश्वसनीयता के साथ अपनी कहानी स्वयं नहीं गढ़ता, तो दूसरे उसे हमारे लिए गढ़ेंगे — और वह भी इसकी जटिलता को पूरी तरह समझे बिना।
भारत की कहानी और थिंक टैंक की भूमिका
प्रणव अदाणी ने कहा कि तथ्य अपने आप कहानी नहीं बन जाते। कहानियाँ वे लोग गढ़ते हैं जो साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, संदर्भ देते हैं और वैश्विक विमर्श में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। उनके अनुसार, CRF जैसे थिंक टैंक की सफलता का पैमाना प्रकाशित रिपोर्टों या आयोजित कार्यक्रमों की संख्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चर्चाओं की गुणवत्ता में सुधार है।
उन्होंने कहा कि CRF लगातार शीर्ष नीति-निर्माताओं, राजनयिकों, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों और विशेषज्ञों को ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना जैसे विषयों पर एक मंच पर ला रहा है। यह ऐसे समय में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जब ये मुद्दे केवल भविष्य की चर्चाएँ नहीं रहे, बल्कि आज लाखों लोगों की आजीविका को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
भारत के विकास की बहुआयामी चुनौतियाँ
प्रणव अदाणी ने रेखांकित किया कि भारत एक साथ कई मोर्चों पर काम कर रहा है — ऊर्जा पहुँच का विस्तार, लाखों लोगों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में शामिल करना, अभूतपूर्व पैमाने पर बुनियादी ढाँचा निर्माण, रोजगार सृजन, विनिर्माण को मजबूती देना और दुनिया के सबसे महत्वाकांक्षी नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तनों में से एक को आगे बढ़ाना।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, शहरीकरण, जल संकट, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सामाजिक समावेशन — ये सभी चुनौतियाँ अब और अधिक जटिल होती जा रही हैं। इसीलिए थिंक टैंकों को भारत की ग्रामीण जड़ों से जुड़कर ज्ञान और क्रियान्वयन, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और स्थानीय वास्तविकताओं के बीच सेतु बनना होगा।
शशि थरूर का संबोधन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने CRF के दूसरे स्थापना दिवस पर कहा कि यह संस्था ठीक उसी समय सामने आई है जब भारत को ऐसे मंचों की ज़रूरत है जो तेजी से बदलती दुनिया के बारे में स्पष्ट रूप से सोच सकें। उन्होंने कहा, 'व्यावहारिक उद्योग अंतर्दृष्टि को वकालत और शासन में एकीकृत करके, आप यह सुनिश्चित करते हैं कि नीति न तो वैचारिक शून्यता में तैयार हो और न ही अल्पकालिक लेन-देनवाद की मनमानी पर छोड़ी जाए।'
थरूर ने जोर दिया कि आज का दौर केवल ज्ञान-उत्पादन का नहीं, बल्कि समझ के विकास का है। उन्होंने कहा कि जब सार्वजनिक विमर्श अक्सर सार के बजाय गति से प्रेरित होता है और 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी' का बोलबाला है, तब चिंतन के प्रति ऐसी प्रतिबद्धता सामयिक और अत्यंत आवश्यक है।
नॉर्वे के पूर्व मंत्री की टिप्पणी और अदाणी की ऊर्जा उपलब्धियाँ
नॉर्वे के पूर्व मंत्री एरिक सोल्हेम ने कार्यक्रम में अदाणी समूह की ऊर्जा क्षमताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि समूह ने अब तक 3.3 मेगावाट घंटे की बैटरी स्थापित की है, जो चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यह क्षमता 14 गीगावाट घंटे तक पहुँच जाएगी, जो चीन सहित विश्व में अब तक की सबसे बड़ी बैटरी होगी।
CRF अध्यक्ष का संदेश
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष शिशिर प्रियदर्शी ने कहा कि किसी भी संस्था के जीवन में दो वर्ष अल्प समय होते हैं, फिर भी CRF उस मुकाम पर पहुँच चुका है जहाँ वह महज एक कल्पना से आगे बढ़कर वास्तविक प्रभाव पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य एक ऐसा मंच बनाना था जो भारतीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण हो, वैश्विक स्तर पर जुड़ा हो और व्यावहारिक सोच भी रखता हो। आने वाले समय में CRF से नीति-निर्माण में और अधिक सक्रिय योगदान की उम्मीद है।