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ITR फाइलिंग 2025-26: पुराने टैक्स रिजीम में ये 6 डिडक्शन क्लेम करें, बचेगा हजारों का टैक्स

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ITR फाइलिंग 2025-26: पुराने टैक्स रिजीम में ये 6 डिडक्शन क्लेम करें, बचेगा हजारों का टैक्स

सारांश

ITR दाखिल करते समय सेक्शन 80सी से लेकर सेक्शन 24(बी) तक — 6 प्रमुख टैक्स डिडक्शन ऐसे हैं जिन्हें अधिकांश करदाता अनजाने में छोड़ देते हैं। पुराने टैक्स रिजीम में इन्हें क्लेम करके ₹2 लाख से अधिक की बचत संभव है।

मुख्य बातें

सेक्शन 80सी के तहत PPF, EPF, ELSS, NSC, जीवन बीमा आदि में निवेश पर ₹1.5 लाख तक की छूट।
NPS में निवेश पर सेक्शन 80सीसीडी(1बी) से ₹50,000 की अतिरिक्त छूट; 80सी के साथ कुल ₹2 लाख तक की बचत।
सेक्शन 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर ₹25,000 से ₹1 लाख तक की छूट, परिवार की स्थिति के अनुसार।
सेक्शन 80ई में उच्च शिक्षा ऋण के ब्याज पर कोई अधिकतम सीमा नहीं — पूरी ब्याज राशि पर छूट।
सेक्शन 80जी के तहत मान्यता प्राप्त संस्थाओं को दान पर 50% या 100% तक टैक्स छूट।
सेक्शन 24(बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर ₹2 लाख तक की अतिरिक्त छूट।

आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया में अधिकांश करदाता आय और टैक्स का विवरण तो सटीक भरते हैं, लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 के लिए उपलब्ध कई महत्वपूर्ण टैक्स डिडक्शन का दावा करना भूल जाते हैं — और इसी चूक के कारण वे जरूरत से अधिक टैक्स चुका देते हैं। यदि आपने पुराना टैक्स रिजीम चुना है, तो नीचे बताए गए 6 प्रमुख डिडक्शन का लाभ उठाकर आप अपनी कर देनदारी में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं।

पुराना बनाम नया टैक्स रिजीम: पहले करें तुलना

विशेषज्ञों का कहना है कि नए टैक्स रिजीम में इनमें से अधिकांश डिडक्शन उपलब्ध नहीं होते। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले दोनों विकल्पों की तुलना करना जरूरी है, ताकि यह तय किया जा सके कि आपकी आय और निवेश के अनुसार कौन-सा रिजीम अधिक फायदेमंद रहेगा।

सेक्शन 80सी: ₹1.5 लाख तक की सबसे लोकप्रिय छूट

यदि आपने पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), कर्मचारी भविष्य निधि (EPF), टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट, ELSS, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC), सुकन्या समृद्धि योजना, जीवन बीमा प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस या होम लोन के मूलधन का भुगतान किया है, तो सेक्शन 80सी के तहत अधिकतम ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है। यह सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला टैक्स-बचत प्रावधान है।

सेक्शन 80सीसीडी(1बी): NPS निवेश पर ₹50,000 की अतिरिक्त छूट

यदि आपने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश किया है, तो सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के अंतर्गत ₹50,000 तक की अतिरिक्त छूट का लाभ मिलता है। यह प्रावधान सेक्शन 80सी से पूरी तरह अलग है — अर्थात दोनों को मिलाकर कुल ₹2 लाख तक की टैक्स बचत संभव है।

सेक्शन 80डी: हेल्थ इंश्योरेंस पर ₹25,000 से ₹1 लाख तक की राहत

स्वयं, जीवनसाथी, बच्चों या माता-पिता के लिए ली गई स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी पर सेक्शन 80डी के तहत ₹25,000 से ₹1 लाख तक की टैक्स छूट मिल सकती है। यह सीमा परिवार की संरचना और वरिष्ठ नागरिकों की उपस्थिति के आधार पर तय होती है। ध्यान रहे कि प्रीमियम का भुगतान बैंकिंग माध्यम से होना अनिवार्य है।

सेक्शन 80ई: एजुकेशन लोन के ब्याज पर असीमित छूट

उच्च शिक्षा के लिए लिए गए एजुकेशन लोन पर चुकाए गए ब्याज की पूरी राशि पर सेक्शन 80ई के तहत टैक्स छूट मिलती है — इसमें कोई अधिकतम सीमा नहीं है। हालांकि, यह छूट केवल ब्याज पर लागू होती है, लोन के मूलधन पर नहीं।

सेक्शन 80जी और सेक्शन 24(बी): दान और होम लोन ब्याज पर छूट

सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था, ट्रस्ट या राहत कोष में किए गए दान पर सेक्शन 80जी के तहत 50% या 100% तक टैक्स छूट मिल सकती है — यह दान प्राप्त करने वाली संस्था पर निर्भर करता है। डिडक्शन के लिए दान की रसीद और संस्था का पंजीकरण विवरण सुरक्षित रखना जरूरी है।

इसके अलावा, होम लोन लेने वाले करदाता सेक्शन 24(बी) के तहत ब्याज भुगतान पर ₹2 लाख तक की अतिरिक्त छूट क्लेम कर सकते हैं। यह छूट केवल ब्याज पर मिलती है, जबकि मूलधन की वापसी सेक्शन 80सी में शामिल होती है।

ITR दाखिल करने से पहले जरूरी कदम

रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26एएस का मिलान अवश्य करें, ताकि आय और टैक्स कटौती के आंकड़ों में कोई विसंगति न रहे। सभी डिडक्शन से जुड़े दस्तावेज और रसीदें सुरक्षित रखें, बैंक खाता, PAN और आधार की जानकारी सटीक दर्ज करें, और ITR दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से पूरा करें — अन्यथा रिटर्न प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, आयकर रिटर्न भरना केवल एक कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि सुनियोजित टैक्स प्लानिंग का अवसर भी है। उपलब्ध डिडक्शन का सही उपयोग न केवल अतिरिक्त कर से बचाता है, बल्कि भविष्य में किसी भी टैक्स संबंधी जटिलता से भी सुरक्षित रखता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उपलब्ध डिडक्शन का पूरा उपयोग न करने के कारण अनावश्यक रूप से अधिक टैक्स चुका देते हैं — यह कर प्रणाली की जटिलता का नहीं, जागरूकता के अभाव का परिणाम है। नए टैक्स रिजीम की सरलता आकर्षक जरूर है, लेकिन जिनके पास PPF, NPS, होम लोन और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे निवेश हैं, उनके लिए पुराना रिजीम अभी भी अधिक किफायती हो सकता है। मुख्यधारा की चर्चा अक्सर सेक्शन 80सी तक सिमट जाती है, जबकि सेक्शन 80ई की असीमित ब्याज छूट और सेक्शन 24(बी) का संयोजन मध्यम वर्ग के करदाताओं के लिए बड़ी राहत दे सकता है। जरूरत है कि करदाता रिटर्न को महज औपचारिकता नहीं, बल्कि वित्तीय नियोजन के अवसर के रूप में देखें।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ITR 2025-26 में कौन-से 6 प्रमुख टैक्स डिडक्शन क्लेम किए जा सकते हैं?
पुराने टैक्स रिजीम में सेक्शन 80सी (₹1.5 लाख तक), सेक्शन 80सीसीडी(1बी) (NPS पर ₹50,000), सेक्शन 80डी (हेल्थ इंश्योरेंस पर ₹25,000–₹1 लाख), सेक्शन 80ई (एजुकेशन लोन ब्याज), सेक्शन 80जी (दान पर 50%–100%) और सेक्शन 24(बी) (होम लोन ब्याज पर ₹2 लाख) प्रमुख डिडक्शन हैं। इन सभी को एक साथ क्लेम करने पर कुल टैक्स देनदारी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
सेक्शन 80सी और 80सीसीडी(1बी) में क्या अंतर है?
सेक्शन 80सी के तहत PPF, EPF, ELSS, NSC, जीवन बीमा आदि में निवेश पर अधिकतम ₹1.5 लाख की छूट मिलती है, जबकि सेक्शन 80सीसीडी(1बी) NPS में अतिरिक्त निवेश पर ₹50,000 की अलग छूट देता है। दोनों को मिलाकर कुल ₹2 लाख तक की टैक्स बचत की जा सकती है।
क्या नए टैक्स रिजीम में ये डिडक्शन मिलते हैं?
नहीं, नए टैक्स रिजीम में इनमें से अधिकांश डिडक्शन उपलब्ध नहीं होते। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले दोनों रिजीम की तुलना करना जरूरी है। जिन करदाताओं के पास होम लोन, NPS, हेल्थ इंश्योरेंस जैसे निवेश हैं, उनके लिए पुराना रिजीम अधिक फायदेमंद हो सकता है।
सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस पर कितनी छूट मिलती है?
सेक्शन 80डी के तहत स्वयं, जीवनसाथी और बच्चों के लिए ₹25,000 तक और माता-पिता के लिए अलग से ₹25,000 (वरिष्ठ नागरिक होने पर ₹50,000) तक की छूट मिलती है। अधिकतम संयुक्त छूट ₹1 लाख तक हो सकती है, बशर्ते प्रीमियम बैंकिंग माध्यम से चुकाया गया हो।
ITR दाखिल करने के बाद ई-वेरिफिकेशन क्यों जरूरी है?
ई-वेरिफिकेशन के बिना दाखिल की गई ITR को आयकर विभाग अधूरी मानता है और उसे वैध नहीं माना जाता। रिटर्न जमा करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग या अन्य माध्यमों से ई-वेरिफिकेशन पूरा करना अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
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