पहली बार ITR फाइल करने से पहले जानें ये 8 जरूरी बातें — अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026
सारांश
मुख्य बातें
आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए आईटीआर-1 (सहज), आईटीआर-2, आईटीआर-3, आईटीआर-4 (सुगम), आईटीआर-5 और आईटीआर-7 के ऑनलाइन फॉर्म और एक्सेल यूटिलिटी सक्रिय कर दी है। बिना लेट फीस के रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित है। यदि आप पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की तैयारी में हैं, तो नीचे दी गई आठ बुनियादी बातें जानना अनिवार्य है।
किसे भरना है ITR?
आयकर नियमों के अनुसार, निर्धारित सीमा से अधिक कुल आय होने पर ITR दाखिल करना अनिवार्य है। इसके अलावा कुछ अन्य परिस्थितियों में भी रिटर्न जरूरी हो जाता है — जैसे भारत या विदेश में संपत्ति होना, शेयर बाजार या ESOP में निवेश, बैंक खातों में निर्धारित सीमा से अधिक जमा, सालाना बिजली बिल ₹1 लाख से अधिक, विदेश यात्रा पर ₹2 लाख से ज्यादा खर्च, अथवा कारोबार की बिक्री ₹60 लाख से अधिक होना। ऐसे करदाताओं को भी रिटर्न भरना आवश्यक हो सकता है।
टैक्स योग्य आय की गणना कैसे होती है?
टैक्स योग्य आय निकालने के लिए वेतन, बैंक FD के ब्याज, शेयरों से प्राप्त आय और अन्य सभी स्रोतों की कुल कमाई जोड़ी जाती है। इसके बाद PPF, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS), जीवन बीमा, होम लोन और अन्य टैक्स बचत निवेशों पर मिलने वाली छूट घटाई जाती है। शेष बची राशि पर आयकर की गणना लागू होती है।
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था
पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से किसे चुनें, यह करदाता की आय और उसके टैक्स बचत निवेशों पर निर्भर करता है। जिन्होंने PPF, NPS, बीमा या होम लोन में पर्याप्त निवेश किया है, उनके लिए पुरानी व्यवस्था अधिक लाभकारी हो सकती है। कम निवेश वाले करदाताओं के लिए नई टैक्स व्यवस्था बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रिटर्न भरने से पहले ऑनलाइन टैक्स कैलकुलेटर की मदद लें या किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से परामर्श करें।
जरूरी दस्तावेज पहले से रखें तैयार
पहली बार ITR दाखिल करने वालों को निम्नलिखित दस्तावेज पहले से तैयार रखने चाहिए: पैन कार्ड, आधार कार्ड (दोनों का लिंक होना अनिवार्य), फॉर्म-16, बैंक खाते की जानकारी, निवेश से जुड़े दस्तावेज, PPF और NPS का विवरण, होम लोन इंटरेस्ट सर्टिफिकेट और बीमा प्रीमियम की रसीदें। यदि वित्त वर्ष के दौरान नौकरी बदली हो, तो पुराने और नए दोनों नियोक्ताओं का फॉर्म-16 रखना अनिवार्य है।
फॉर्म-16, फॉर्म-26AS और AIS का मिलान क्यों जरूरी है?
फॉर्म-16 नियोक्ता द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें वेतन, TDS, टैक्स छूट और कटौतियों का पूरा ब्योरा होता है। फॉर्म-26AS और वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में आय, बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर लेनदेन और विदेशी लेनदेन का संपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध होता है। ITR भरने से पहले इन तीनों दस्तावेजों का मिलान करना जरूरी है, ताकि कोई विसंगति न रहे।
सही ITR फॉर्म का चुनाव
वेतनभोगी व्यक्ति जिनकी आय वेतन, एक मकान और सामान्य स्रोतों से है, वे आईटीआर-1 भर सकते हैं। पूंजीगत लाभ या एक से अधिक मकान होने पर आईटीआर-2 उपयुक्त है। व्यवसाय या प्रोफेशन से आय पर आईटीआर-3 और अनुमानित आय वाले कारोबारियों के लिए आईटीआर-4 निर्धारित है। फॉर्म को लेकर भ्रम होने पर आयकर पोर्टल पर उपलब्ध 'Help Me Decide' विकल्प सहायक है।
ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य — 30 दिन की समय-सीमा
ITR जमा करने के बाद 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है; अन्यथा रिटर्न अधूरा माना जा सकता है और रिफंड में देरी हो सकती है। ई-वेरिफिकेशन आधार OTP, नेट बैंकिंग या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए किया जा सकता है। ऑनलाइन वेरिफिकेशन न करने की स्थिति में ITR-V की हस्ताक्षरित प्रति 30 दिनों के भीतर आयकर विभाग के सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC), बेंगलुरु को डाक से भेजी जा सकती है।
छूटे हुए पिछले रिटर्न और लेट फीस
यदि पिछले वर्षों का ITR दाखिल नहीं हुआ है, तो ITR-U (अपडेटेड रिटर्न) के माध्यम से पिछले चार आकलन वर्षों का रिटर्न भरा जा सकता है। चालू वर्ष का ITR अंतिम तिथि के बाद दाखिल करने पर नियमानुसार लेट फीस और टैक्स बकाया होने पर उस पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए रिटर्न जल्द से जल्द दाखिल करें।