चेन्नई में पालतू जानवर सड़क पर छोड़ा तो ₹25,000 जुर्माना, GCC ने लागू किया सख्त नियम
सारांश
मुख्य बातें
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने 26 सितंबर 2026 को एक सख्त नियम लागू किया है, जिसके तहत लाइसेंसधारी पालतू कुत्ते या बिल्ली को सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर लावारिस छोड़ने पर मालिक को ₹25,000 का जुर्माना भरना होगा। यह कदम नगर निगम के पास लगातार आ रही उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें दर्ज पालतू जानवरों को पंजीकरण के बावजूद सड़कों पर छोड़ने की बात कही गई थी।
नए नियम की पृष्ठभूमि
GCC को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि पालतू जानवरों के मालिक रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी अपने जानवरों को सार्वजनिक जगहों पर छोड़ देते हैं। यह नियम अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 की धारा 292 और 2023 में निर्मित नियमों के तहत लागू किया गया है। चेन्नई शहर की सीमा में रहने वाले सभी पालतू जानवर मालिकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
माइक्रोचिप से होगी मालिक की पहचान
GCC प्रत्येक लाइसेंसधारी पालतू जानवर में माइक्रोचिप लगाना अनिवार्य कर रहा है। इस चिप में मालिक का नाम, पता और जानवर के एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का पूरा विवरण दर्ज होता है। अगर कोई पालतू जानवर सड़क पर लावारिस मिलता है, तो माइक्रोचिप स्कैन करके उसके मालिक को तुरंत ट्रेस किया जा सकेगा। यह डेटाबेस यह भी सुनिश्चित करेगा कि पालतू जानवरों को वार्षिक टीकाकरण समय पर हो रहा है या नहीं।
लाइसेंसिंग प्रणाली की स्थिति
GCC ने अपनी ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग प्रणाली अक्टूबर 2025 में शुरू की थी। जुलाई 2026 तक नगर निगम 78,232 पालतू जानवर मालिकों को लाइसेंस जारी कर चुका है। इच्छुक मालिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि माइक्रोचिप लगवाना लाइसेंस प्राप्ति की अनिवार्य शर्त है।
आम जनता और पालतू मालिकों पर असर
यह नियम उन मालिकों पर सीधे लागू होगा जिन्होंने पहले से लाइसेंस लिया हुआ है और बाद में अपने कुत्ते या बिल्ली को सार्वजनिक स्थान पर छोड़ देते हैं। रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिप की युगलबंदी यह सुनिश्चित करती है कि जानवर की पहचान पंजीकरण के बाद भी बरकरार रहे। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी क्षेत्रों में लावारिस जानवरों की समस्या और नागरिकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।
आगे क्या होगा
नगर निगम की इस पहल से चेन्नई में पालतू जानवर प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। माइक्रोचिप आधारित ट्रैकिंग और कठोर जुर्माने का संयोजन अन्य महानगर पालिकाओं के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यदि यह प्रणाली प्रभावी रही, तो भविष्य में इसे और अधिक पालतू जानवरों की श्रेणियों तक विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।