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चेन्नई में पालतू जानवर सड़क पर छोड़ा तो ₹25,000 जुर्माना, GCC ने लागू किया सख्त नियम

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चेन्नई में पालतू जानवर सड़क पर छोड़ा तो ₹25,000 जुर्माना, GCC ने लागू किया सख्त नियम

सारांश

चेन्नई में लाइसेंसधारी पालतू जानवर को सड़क पर छोड़ना अब ₹25,000 की जेब पर भारी पड़ेगा। GCC ने माइक्रोचिप ट्रैकिंग से मालिक की पहचान का तंत्र खड़ा किया है — जुलाई 2026 तक 78,232 से अधिक पालतू जानवर पहले ही पंजीकृत हो चुके हैं।

मुख्य बातें

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने लाइसेंसधारी पालतू जानवर को सार्वजनिक स्थान पर छोड़ने पर ₹25,000 जुर्माने का नियम लागू किया।
यह नियम अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 की धारा 292 और 2023 के नियमों के तहत प्रभावी है।
प्रत्येक लाइसेंसधारी पालतू जानवर में माइक्रोचिप लगाना अनिवार्य; चिप में मालिक का नाम, पता और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का विवरण दर्ज होगा।
GCC की ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग प्रणाली अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी; जुलाई 2026 तक 78,232 मालिकों को लाइसेंस जारी।
चेन्नई शहर की सीमा में रहने वाले सभी पालतू मालिकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य ; आवेदन ऑनलाइन किया जा सकता है।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने 26 सितंबर 2026 को एक सख्त नियम लागू किया है, जिसके तहत लाइसेंसधारी पालतू कुत्ते या बिल्ली को सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर लावारिस छोड़ने पर मालिक को ₹25,000 का जुर्माना भरना होगा। यह कदम नगर निगम के पास लगातार आ रही उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें दर्ज पालतू जानवरों को पंजीकरण के बावजूद सड़कों पर छोड़ने की बात कही गई थी।

नए नियम की पृष्ठभूमि

GCC को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि पालतू जानवरों के मालिक रजिस्ट्रेशन कराने के बाद भी अपने जानवरों को सार्वजनिक जगहों पर छोड़ देते हैं। यह नियम अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 की धारा 292 और 2023 में निर्मित नियमों के तहत लागू किया गया है। चेन्नई शहर की सीमा में रहने वाले सभी पालतू जानवर मालिकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है।

माइक्रोचिप से होगी मालिक की पहचान

GCC प्रत्येक लाइसेंसधारी पालतू जानवर में माइक्रोचिप लगाना अनिवार्य कर रहा है। इस चिप में मालिक का नाम, पता और जानवर के एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का पूरा विवरण दर्ज होता है। अगर कोई पालतू जानवर सड़क पर लावारिस मिलता है, तो माइक्रोचिप स्कैन करके उसके मालिक को तुरंत ट्रेस किया जा सकेगा। यह डेटाबेस यह भी सुनिश्चित करेगा कि पालतू जानवरों को वार्षिक टीकाकरण समय पर हो रहा है या नहीं।

लाइसेंसिंग प्रणाली की स्थिति

GCC ने अपनी ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग प्रणाली अक्टूबर 2025 में शुरू की थी। जुलाई 2026 तक नगर निगम 78,232 पालतू जानवर मालिकों को लाइसेंस जारी कर चुका है। इच्छुक मालिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि माइक्रोचिप लगवाना लाइसेंस प्राप्ति की अनिवार्य शर्त है।

आम जनता और पालतू मालिकों पर असर

यह नियम उन मालिकों पर सीधे लागू होगा जिन्होंने पहले से लाइसेंस लिया हुआ है और बाद में अपने कुत्ते या बिल्ली को सार्वजनिक स्थान पर छोड़ देते हैं। रजिस्ट्रेशन और माइक्रोचिप की युगलबंदी यह सुनिश्चित करती है कि जानवर की पहचान पंजीकरण के बाद भी बरकरार रहे। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी क्षेत्रों में लावारिस जानवरों की समस्या और नागरिकों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

आगे क्या होगा

नगर निगम की इस पहल से चेन्नई में पालतू जानवर प्रबंधन अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। माइक्रोचिप आधारित ट्रैकिंग और कठोर जुर्माने का संयोजन अन्य महानगर पालिकाओं के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यदि यह प्रणाली प्रभावी रही, तो भविष्य में इसे और अधिक पालतू जानवरों की श्रेणियों तक विस्तारित किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। माइक्रोचिप प्रणाली तकनीकी रूप से ठोस है, परंतु शहर में हज़ारों लावारिस जानवर बिना किसी रजिस्ट्रेशन के घूम रहे हैं — जुर्माना केवल उन्हीं मालिकों पर पड़ेगा जिन्होंने लाइसेंस लिया है, जबकि बिना लाइसेंस वाले छूट जाएंगे। यह विडंबना है कि कानून का पालन करने वाले ही दंड के दायरे में आते हैं। जब तक लाइसेंस-विहीन पालतू जानवरों के मालिकों पर भी सख्ती नहीं होगी, तब तक यह नियम आधा-अधूरा बना रहेगा।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई में पालतू जानवर सड़क पर छोड़ने पर कितना जुर्माना लगेगा?
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) ने लाइसेंसधारी पालतू कुत्ते या बिल्ली को सड़क या किसी सार्वजनिक स्थान पर छोड़ने पर ₹25,000 का जुर्माना तय किया है। यह नियम केवल उन मालिकों पर लागू होगा जिन्होंने पहले से लाइसेंस ले रखा है।
GCC की पेट लाइसेंसिंग प्रणाली कैसे काम करती है?
GCC की ऑनलाइन पेट लाइसेंसिंग प्रणाली अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी। मालिक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पालतू जानवर में माइक्रोचिप लगवाना अनिवार्य है। जुलाई 2026 तक 78,232 मालिकों को लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं।
माइक्रोचिप में क्या जानकारी होती है और यह क्यों ज़रूरी है?
माइक्रोचिप में मालिक का नाम, पता और पालतू जानवर के एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन का विवरण दर्ज होता है। अगर कोई पालतू जानवर सड़क पर लावारिस मिलता है, तो चिप स्कैन करके मालिक की तुरंत पहचान की जा सकती है और वार्षिक टीकाकरण की निगरानी भी इसी से होती है।
चेन्नई में पालतू जानवर का लाइसेंस लेना किसके लिए अनिवार्य है?
चेन्नई शहर की सीमा में रहने वाले सभी पालतू जानवर मालिकों के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य है। यह नियम अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 की धारा 292 और 2023 में बने नियमों के तहत लागू है।
यह नियम क्यों लाया गया और इसे लागू करने की वजह क्या है?
GCC को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि मालिक पंजीकरण कराने के बावजूद अपने पालतू जानवरों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। इन शिकायतों के बाद ही नगर निगम ने ₹25,000 के जुर्माने का प्रावधान लागू करने का निर्णय लिया।
राष्ट्र प्रेस
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