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छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय, NEP-2020 के तहत 2026-27 से लागू होंगे नए नियम

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छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय, NEP-2020 के तहत 2026-27 से लागू होंगे नए नियम

सारांश

छत्तीसगढ़ सरकार ने NEP-2020 के तहत 2026-27 से कक्षा 1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय की है। साथ ही शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च करने का निर्णय लिया — यह राज्य की शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव है।

मुख्य बातें

छत्तीसगढ़ सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष अनिवार्य की।
आयु गणना 1 अप्रैल को आधार मानकर होगी; 1 जुलाई तक आयु पूरी होने पर 3 महीने की विशेष छूट मिलेगी।
नियम सरकारी, निजी, अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों और RTE की 25% आरक्षित सीटों पर लागू।
मान्यता प्राप्त प्री-प्राइमरी स्कूलों से प्रमोट होने वाले छात्रों को आयु सीमा में छूट।
शिक्षा सत्र 1 अप्रैल 2027 से बदलकर 1 अप्रैल से 31 मार्च किया जाएगा, जो CBSE कैलेंडर के अनुरूप है।
स्कूल प्रवेश उत्सव , पाठ्यपुस्तक व गणवेश वितरण 1 अप्रैल से सुनिश्चित करने के निर्देश।

छत्तीसगढ़ सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)-2020 के अनुरूप शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्कूलों में प्रवेश के लिए नई आयु सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। नए नियमों के अनुसार, पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष अनिवार्य होगी और आयु की गणना 1 अप्रैल को आधार मानकर की जाएगी। यह नियम राज्य के सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

कक्षावार आयु सीमा का पूरा ढाँचा

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों में प्रत्येक कक्षा के लिए आयु सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई है। नर्सरी में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 3 से 4 वर्ष, केजी-1 के लिए 4 से 5 वर्ष, केजी-2 के लिए 5 से 6 वर्ष और पहली कक्षा के लिए 6 से 7 वर्ष रखी गई है।

गौरतलब है कि NEP-2020 में 5+3+3+4 के नए स्कूली ढाँचे की सिफारिश की गई है, जिसमें आधारभूत शिक्षा की शुरुआत 3 वर्ष की आयु से होती है। छत्तीसगढ़ का यह कदम उसी राष्ट्रीय ढाँचे को राज्य स्तर पर क्रियान्वित करने की दिशा में उठाया गया है।

विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान

सरकार ने कुछ विशेष स्थितियों में राहत देने का भी प्रावधान किया है। यदि किसी बच्चे की निर्धारित आयु 1 जुलाई तक पूरी हो जाती है, तो उसे 3 महीने की विशेष छूट देकर प्रवेश दिया जा सकेगा। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त प्री-प्राइमरी स्कूलों से अगली कक्षा में प्रमोट होने वाले छात्रों को भी आयु सीमा में छूट मिलेगी।

प्रवेश के दौरान बच्चे की जन्मतिथि का निर्धारण स्थानांतरण प्रमाणपत्र (TC), अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर किया जाएगा। यह प्रावधान दस्तावेज़ीकरण में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।

RTE की 25% सीटों पर भी प्रभावी

नए आयु नियम शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर भी लागू होंगे। इसका अर्थ है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के बच्चों को भी इसी आयु मानदंड का पालन करना होगा। राज्य सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और अभिभावकों को नई प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

शिक्षा सत्र का कैलेंडर भी बदला

इसके साथ ही, छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग ने 1 अप्रैल 2027 से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ करने के संबंध में भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के आदेश में कहा गया है कि अब राज्य में शिक्षा सत्र का संचालन प्रतिवर्ष 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होगा — जो केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (CBSE) और अन्य बोर्डों के अनुरूप है।

वर्तमान में राज्य में शिक्षा सत्र 16 जून से 30 अप्रैल तक चलता है। नए कैलेंडर में 1 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहेगा। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि स्कूल प्रवेश उत्सव, निशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण, सरस्वती साइकिल योजना के तहत साइकिल वितरण और गणवेश वितरण सभी 1 अप्रैल से प्रारंभ किए जाएँ।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य NEP-2020 को चरणबद्ध तरीके से लागू कर रहे हैं और प्री-प्राइमरी शिक्षा को औपचारिक स्कूली ढाँचे में एकीकृत करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के इस निर्णय से लाखों अभिभावकों को अपने बच्चों के दाखिले की योजना नए सिरे से बनानी होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे जागरूकता अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी पात्र बच्चा केवल जानकारी के अभाव में प्रवेश से वंचित न रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती ज़मीनी स्तर पर है। ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ प्री-प्राइमरी ढाँचा अभी भी कमज़ोर है, वहाँ 6 वर्ष की अनिवार्य आयु सीमा कुछ बच्चों को एक पूरे सत्र के लिए शिक्षा से बाहर कर सकती है। शिक्षा सत्र को अप्रैल से शुरू करने का निर्णय तार्किक है, परंतु इसके लिए शिक्षकों की नियुक्ति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था पहले दिन से सुनिश्चित करनी होगी — जो अब तक अधिकांश राज्यों में एक चुनौती बनी रही है। अभिभावक जागरूकता अभियान की घोषणा तो हुई, लेकिन इसके लिए आवंटित संसाधन और समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ में कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु क्या निर्धारित की गई है?
छत्तीसगढ़ सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 1 में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष अनिवार्य की है। आयु की गणना 1 अप्रैल को आधार मानकर की जाएगी।
नए नियम कब से लागू होंगे और किन स्कूलों पर लागू होंगे?
ये नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रभावी होंगे और राज्य के सरकारी, निजी तथा अनुदान प्राप्त सभी स्कूलों पर लागू होंगे। RTE अधिनियम के तहत 25% आरक्षित सीटों पर भी यही मानदंड मान्य होगा।
क्या आयु सीमा में कोई छूट का प्रावधान है?
हाँ, यदि किसी बच्चे की निर्धारित आयु 1 जुलाई तक पूरी हो जाती है, तो उसे 3 महीने की विशेष छूट देकर प्रवेश दिया जा सकेगा। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त प्री-प्राइमरी स्कूलों से प्रमोट होने वाले छात्रों को भी आयु सीमा में राहत मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में शिक्षा सत्र का कैलेंडर कैसे बदलेगा?
1 अप्रैल 2027 से छत्तीसगढ़ का शिक्षा सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक चलेगा, जो CBSE और अन्य राष्ट्रीय बोर्डों के अनुरूप है। वर्तमान में राज्य में सत्र 16 जून से 30 अप्रैल तक संचालित होता है।
ये नियम NEP-2020 से कैसे जुड़े हैं?
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में 5+3+3+4 के नए स्कूली ढाँचे की सिफारिश की गई है, जिसमें प्री-प्राइमरी से कक्षा 1 तक की आयु सीमा स्पष्ट रूप से तय की गई है। छत्तीसगढ़ के नए नियम इसी राष्ट्रीय ढाँचे को राज्य स्तर पर लागू करने का हिस्सा हैं।
राष्ट्र प्रेस
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