छत्तीसगढ़ प्रभारी बने सुखदेव भगत, 2028 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सत्ता वापसी का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने 15 सितंबर 2026 को छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया है। नई ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हुए भगत ने स्पष्ट किया कि 2028 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को दोबारा सत्ता दिलाना उनका प्रमुख लक्ष्य है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के खिलाफ कांग्रेस अपने संगठनात्मक ढाँचे को मज़बूत करने में जुटी है।
नई ज़िम्मेदारी पर भगत का बयान
सुखदेव भगत ने कहा, 'मुझ पर जो भरोसा जताया गया है, उसके लिए सबसे पहले मैं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त करना चाहता हूँ।' उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के मौजूदा हालात को देखते हुए पार्टी के सभी नेताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर कांग्रेस की नीतियों और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखा जाएगा।
भगत ने यह भी रेखांकित किया कि आदिवासी सीटों पर लोगों का भरोसा जीतना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा, 'छत्तीसगढ़ से हमारा सीमावर्ती संबंध है और वहाँ आदिवासी समुदाय का जनाधार बेहद महत्त्वपूर्ण है।'
राहुल गांधी और वेणुगोपाल से मार्गदर्शन
पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बारे में भगत ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मिलकर उन्हें ऊर्जा और दिशा मिलती है। उनके अनुसार इस मार्गदर्शन को प्रभावी ढंग से ज़मीन पर उतारना उनकी ज़िम्मेदारी है। गौरतलब है कि कांग्रेस (INC) 2023 में छत्तीसगढ़ चुनाव हार गई थी और तब से पार्टी पुनर्गठन की कोशिशों में लगी है।
झारखंड पेपर लीक मामले पर भगत का रुख
भगत ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक मामले में झारखंड सीआईडी द्वारा की गई गिरफ्तारियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीआईडी ने अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरी ईमानदारी के साथ जाँच कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार इस संकल्प के साथ काम कर रही है कि परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता के लिए दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
2028 चुनाव की रणनीति और आगे की राह
छत्तीसगढ़ में 2028 के विधानसभा चुनाव अभी दो वर्ष से अधिक दूर हैं, लेकिन कांग्रेस ने प्रभारी की नियुक्ति से संकेत दिया है कि वह अभी से ज़मीनी तैयारी शुरू करना चाहती है। भगत की नियुक्ति उस रणनीति का हिस्सा है जिसमें पार्टी आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। आने वाले महीनों में भगत के नेतृत्व में राज्य दौरे और संगठनात्मक बैठकों की श्रृंखला शुरू होने की संभावना है।