छिंदवाड़ा की प्रिया मालवीय बनीं भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर, AFCAT में हासिल की 113वीं रैंक
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की बेटी प्रिया मालवीय ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर चयनित होकर इतिहास रच दिया है। वर्ष 2025 में आयोजित एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) में उन्होंने ऑल इंडिया 113वीं रैंक हासिल की और छिंदवाड़ा जिले की पहली फ्लाइंग ऑफिसर बनने का गौरव प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि ने परिवार और पूरे जिले में उत्साह की लहर दौड़ा दी है।
चयन प्रक्रिया और शैक्षणिक पृष्ठभूमि
प्रिया ने बताया कि AFCAT क्वालीफाई करने के बाद सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) इंटरव्यू होता है, उसके बाद मेडिकल परीक्षण और अंत में फाइनल मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है। उन्होंने बताया कि एक कोर्स में लगभग 300 से 350 अभ्यर्थियों को शामिल किया जाता है। प्रिया ने गुजरात टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में बीई की डिग्री प्राप्त की है।
तैयारी का सफर: ऑनलाइन कोचिंग से आसमान तक
प्रिया ने परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन कोचिंग का सहारा लिया। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद अच्छा अनुभव रहा। उन्होंने यह भी कहा, 'मेरा मानना है कि मैं ही नहीं, सभी बेटियाँ आगे बढ़ें। बेटियाँ अपना करियर खुद चुनें।' पिता को छिंदवाड़ा कोतवाली में एएसआई के रूप में देश सेवा करते देख प्रिया के मन में भी वर्दी पहनने का सपना जन्मा, जो अब साकार हो चुका है।
पिता की भावुक प्रतिक्रिया
प्रिया के पिता रवि मालवीय, जो छिंदवाड़ा कोतवाली में सहायक उपनिरीक्षक (ASI) के पद पर कार्यरत हैं, ने कहा कि बेटी की इस सफलता पर उन्हें अंदर से गहरी खुशी की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा, 'बेटी ने मेरा जीवन सार्थक कर दिया है। जिले में पहली बेटी हैं, जिन्होंने यह पद हासिल किया है।' रवि मालवीय ने यह भी बताया कि प्रिया पढ़ाई के प्रति हमेशा से जागरूक रहीं और उन्हें कभी डाँटने का अवसर ही नहीं आया।
आगे का रास्ता: हैदराबाद में होगी ट्रेनिंग
फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में चयन के बाद प्रिया मालवीय अब हैदराबाद में प्रशिक्षण के लिए रवाना होंगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में महिलाओं की सशस्त्र बलों में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। छिंदवाड़ा जैसे मध्यम आकार के जिले से किसी बेटी का वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनना क्षेत्र की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।