डुंडीगल एयर फोर्स अकादमी में 217वें कोर्स की परेड, फ्लाइंग ऑफिसर रितुल और निधि ने साझा किए अनुभव
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के डुंडीगल स्थित एयर फोर्स अकादमी (AFA) में 13 जून को आयोजित संयुक्त ग्रेजुएशन परेड में 217वें कोर्स के कैडेट्स ने सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय वायुसेना में बतौर अधिकारी कमीशन प्राप्त किया। समारोह में भव्य एरियल डिस्प्ले ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया और नव-नियुक्त अधिकारियों के परिजनों की आँखें गर्व से भर आईं।
कठिन प्रशिक्षण के बाद मिला कमीशन
चार वर्षों की कठोर ट्रेनिंग, अनुशासन और अटूट समर्पण के बाद इन युवा अधिकारियों ने वर्दी धारण कर देश सेवा का संकल्प लिया। हरियाणा के चरखी दादरी जिले से आए एक नवनियुक्त अधिकारी ने कहा, "आज यहाँ खड़े होकर मुझे बेहद सम्मान और गर्व महसूस हो रहा है। यह क्षण मेरे लिए और मेरे माता-पिता के लिए अत्यंत भावुक और गर्वपूर्ण है। चार वर्षों की यह यात्रा शानदार रही है और इसे शब्दों में बताना आसान नहीं है।" उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और एयर फोर्स अकादमी में बिताए वर्षों को अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अनुभव बताया।
फ्लाइंग ऑफिसर रितुल: पहले बैच का हिस्सा बनना विशेष गर्व
नव-नियुक्त फ्लाइंग ऑफिसर रितुल ने बताया कि पहले बैच का हिस्सा बनना उनके लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे केवल उनकी मेहनत नहीं, बल्कि माता-पिता, प्रशिक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों का भी अहम योगदान है। उन्होंने कहा, "मैं उन सभी की आभारी हूँ क्योंकि उन्होंने मुझे आज इस मुकाम तक पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई है।" गौरतलब है कि रितुल अपने परिवार की पहली पीढ़ी हैं जिन्होंने सशस्त्र बलों में प्रवेश किया है। उन्होंने देश की युवा लड़कियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज हर क्षेत्र में महिलाओं के लिए अवसर उपलब्ध हैं और सशस्त्र बल इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
फ्लाइंग ऑफिसर निधि: पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ाया
समारोह में एक और उल्लेखनीय कहानी रही फ्लाइंग ऑफिसर निधि की, जिनके पिता भी भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। निधि की माँ ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा, "मैं अपनी खुशी शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकती। मेरी बेटी निधि का सपना था कि वह वायुसेना में अधिकारी बने और आज वह सपना साकार हो गया है।" उन्होंने बताया कि निधि ने पहले नौसेना में भी सेवा की थी, लेकिन उनका असली सपना भारतीय वायुसेना में शामिल होना था। आज वह उस सपने को पूरा कर पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
सामूहिक संघर्ष, सामूहिक जीत
एक अन्य नवनियुक्त अधिकारी ने इस उपलब्धि को सामूहिक सफलता बताया। उन्होंने कहा, "सिर्फ मैंने ही नहीं, बल्कि मेरे परिवार, प्रशिक्षकों और कई अन्य लोगों ने अथक प्रयास किए हैं, जिसकी बदौलत मैं आज यहाँ तक पहुँच पाई हूँ। पिछले चार वर्षों में हमने कठिन प्रशिक्षण और कई चुनौतियों का सामना किया है — उन सभी परिस्थितियों को पार करते हुए आज हम पास आउट हुए हैं।" यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायुसेना महिला अधिकारियों की भागीदारी को लगातार बढ़ावा दे रही है।
आगे की राह
कमीशन प्राप्त करने के बाद ये नवनियुक्त फ्लाइंग ऑफिसर अपनी-अपनी यूनिट में तैनात होंगे और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को और मज़बूत करेंगे। डुंडीगल की इस परेड ने एक बार फिर साबित किया कि देश के युवाओं में देश सेवा का जज़्बा अटूट है।