एनडीए के 150वें बैच की पासिंग आउट परेड: कैडेट्स बोले — ड्रोन तकनीक और पारंपरिक युद्धकला दोनों का मिला प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए), पुणे ने 30 मई 2026 को अपने 150वें बैच की भव्य पासिंग आउट परेड आयोजित की, जिसमें सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दक्षिणी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन भी इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल हुए। परेड में उत्तीर्ण कैडेट्स ने अपने तीन वर्षों के कठोर प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए।
कैडेट्स के अनुभव और प्रेरणा
राजस्थान की कैडेट शगुन ने अपनी प्रेरणा के बारे में बताया कि उनके पिता सशस्त्र बलों में सेवा जारी नहीं रख सके, जिसके बाद उन्होंने उनकी जगह लेने का संकल्प लिया। शगुन ने कहा, 'अक्सर हम खुद को सीमित कर लेते हैं और अपनी वास्तविक क्षमता को भी नहीं पहचान पाते। यहाँ आने के बाद मुझे एहसास हुआ कि मैं पहले जितना सोचती थी, उससे कहीं अधिक सक्षम हूँ।' यह टिप्पणी एनडीए में महिला कैडेट्स की बढ़ती भागीदारी और उनके आत्मविश्वास को रेखांकित करती है।
जम्मू-कश्मीर के कैडेट साहिल शर्मा ने बताया कि उन्होंने शारीरिक गतिविधियों में अधिक रुचि के कारण थल सेना को चुना। उन्होंने कहा, 'जब तकनीक विफल हो जाती है, तो बुनियादी चीजें ही काम आती हैं।' साहिल ने यह भी जोड़ा कि एनडीए में अब स्कैन ड्रोन जैसी आधुनिक प्रणालियों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, जो पारंपरिक युद्धकला के बुनियादी सिद्धांतों के साथ-साथ पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं।
महिला कैडेट्स की बराबरी पर जोर
हरियाणा के झज्जर के कैडेट रोहित ने महिला कैडेट्स की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें 'कैडेट' ही कहा जाना चाहिए, क्योंकि वे पुरुष कैडेट्स के बराबर प्रदर्शन कर रही हैं। यह बयान एनडीए में लैंगिक समानता की दिशा में हो रहे सांस्कृतिक बदलाव को दर्शाता है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद महिलाओं को एनडीए में प्रवेश की अनुमति मिली थी।
पारिवारिक प्रेरणा और सैन्य संस्कार
एक अन्य कैडेट रोहित ने बताया कि उनकी प्रेरणा के दो स्रोत रहे — उनके पिता और राष्ट्रीय सैन्य विद्यालय, बेंगलुरु, जहाँ से उन्होंने सैन्य अनुशासन की नींव रखी। एनडीए में प्रशिक्षण के अनुभव को उन्होंने 'असाधारण' बताते हुए कहा, 'मैं अपने माता-पिता के चेहरों पर गर्व देख सकता हूँ — यह अब तक का सबसे बेहतरीन अनुभव है।'
तकनीक और परंपरा का संतुलन
इस बैच के प्रशिक्षण में ड्रोन तकनीक, स्कैन प्रणालियाँ और डिजिटल युद्धक्षेत्र प्रबंधन को पाठ्यक्रम में जोड़ा गया है। साथ ही, पारंपरिक युद्धकला, मानचित्र पठन और भूमि-आधारित रणनीति पर भी पूरा जोर बरकरार है। यह दृष्टिकोण आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों — जिनमें साइबर युद्ध से लेकर सीमापार ड्रोन हमले शामिल हैं — के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की तैयारी को दर्शाता है।
आगे की राह
पासिंग आउट परेड के बाद ये कैडेट्स अपनी-अपनी सेवाओं — थल सेना, वायु सेना और नौसेना — में शामिल होंगे और आगे के विशेषज्ञ प्रशिक्षण के लिए संबंधित अकादमियों में जाएंगे। 150वाँ बैच एनडीए के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो संस्था की सात दशकों से अधिक की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाता है।