बच्चों के सोशल मीडिया बैन पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को नोटिस, 3 दिसंबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2026 को बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने और ऑनलाइन खतरों से उनकी सुरक्षा के लिए कड़े नियम बनाने की माँग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
याचिका का आधार
यह याचिका एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल और उसके निदेशक द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाना राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है। उनके अनुसार, सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग के कारण बच्चे गंभीर मानसिक और शारीरिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं, और ऐसी परिस्थिति में प्रतिबंध ही एकमात्र व्यावहारिक विकल्प है।
बच्चों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों में डिप्रेशन, घबराहट, चिंता, भावनात्मक अस्थिरता और कम आत्मसम्मान जैसी मनोवैज्ञानिक समस्याओं को जन्म दे सकता है। कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 37 प्रतिशत बच्चे डिप्रेशन, एंग्जायटी और साइबर बुलिंग से पीड़ित हैं। इसके अलावा, 12 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों में सोशल मीडिया के कारण चिंता और अवसाद का जोखिम दोगुना हो जाता है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि इनमें से कई खतरे तत्काल दिखाई नहीं देते और अक्सर माता-पिता या शिक्षकों को इनकी जानकारी तब तक नहीं होती, जब तक कि काफी नुकसान हो न चुका हो।
डेटा संग्रह और 'एंगेजमेंट डिज़ाइन' पर चिंता
याचिका में यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया है कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों के व्यवहार-संबंधी डेटा इकट्ठा करते हैं और ऐसे 'एंगेजमेंट डिज़ाइन' का उपयोग करते हैं जो बच्चों को अधिकतम समय तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के उद्देश्य से तैयार किए जाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई देश — जिनमें ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है — बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर उम्र-आधारित प्रतिबंध लागू कर चुके हैं या इस दिशा में कदम उठा रहे हैं।
सरकार की भूमिका और अगले कदम
सर्वोच्च न्यायालय का यह नोटिस बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के मसले पर न्यायिक हस्तक्षेप की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब केंद्र सरकार को अगली सुनवाई से पूर्व अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना होगा। गौरतलब है कि भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति का प्रावधान तो है, लेकिन सोशल मीडिया पर सीधे प्रतिबंध को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट कानूनी ढाँचा नहीं है।
3 दिसंबर 2026 की सुनवाई में केंद्र के जवाब से यह तय होगा कि इस मुद्दे पर न्यायालय आगे किस दिशा में आगे बढ़ता है।