चोरबागन भगदड़ के बाद बंगाल सरकार सख्त, 3 दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस; सुरक्षा में मिलीं गंभीर खामियाँ
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागन में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान हुई भगदड़ की घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए एक उच्च-स्तरीय निरीक्षण समिति का गठन किया, जिसने रविवार को कई पूजा पंडालों का दौरा कर तीन प्रमुख पूजा समितियों को सुरक्षा खामियों के लिए नोटिस जारी किए। निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन रोशनी और ज्वलनशील सामग्री के उपयोग से जुड़ी कई गंभीर कमियाँ सामने आईं।
उच्च-स्तरीय समिति का गठन
राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं — राजेश कुमार सिंह, प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग; अनुज शर्मा, महानिदेशक, पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवाएँ; तथा जावेद शमीम, महानिदेशक, पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स। समिति को पंडालों में जीवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा की समीक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब चोरबागन भगदड़ ने पूजा आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों पर व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता के पंडालों में लाखों दर्शक आते हैं, जिससे किसी भी लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मुख्य घटनाक्रम: तीन पूजा समितियों को नोटिस
दक्षिण कोलकाता डिवीजन के डिविजनल फायर ऑफिसर ने निरीक्षण के बाद तीनों समितियों को तत्काल खामियाँ दूर करने के निर्देश दिए। पहला नोटिस बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन को जारी हुआ। पंडाल के अंदर रोशनी अत्यंत कम पाई गई, जिससे आपातकाल में निकासी बाधित हो सकती थी। आयोजकों को पर्याप्त रोशनी, स्पष्ट दृश्यता और प्रवेश-निकास द्वारों के पास व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक के साथ शाम 7 बजे तक स्थानीय फायर स्टेशन को सूचित करने का निर्देश दिया गया।
दूसरा नोटिस चेतला अग्रानी क्लब को दिया गया। यहाँ भी अपर्याप्त रोशनी के साथ वेंटिलेशन की कमी पाई गई — आयोजकों को पर्याप्त पंखे और एयर-कंडीशनिंग लगाने को कहा गया ताकि भीड़ में दम घुटने की स्थिति न बने। इसके अलावा पंडाल के समीप कई अस्थायी दुकानें और ढाँचे बनाए गए थे, जिनमें एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा था। यह पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1950 की धारा 23ए का उल्लंघन है। आयोजकों को रात 8 बजे तक ये ढाँचे हटाने का आदेश दिया गया।
तीसरा नोटिस त्रिधारा सम्मिलनी को भेजा गया। निरीक्षण में पाया गया कि पंडाल की सजावट में अत्यंत जल्दी आग पकड़ने वाली सामग्रियों का उपयोग किया गया था, जिससे आग तेज़ी से फैलने का खतरा था। आयोजकों को सभी बिजली उपकरणों और वायरिंग की सुरक्षा सुनिश्चित कर रात 9 बजे तक स्थानीय फायर स्टेशन को जानकारी देने का निर्देश दिया गया।
सुरक्षा में मिलीं खामियाँ: एक नज़र
निरीक्षण में सामने आई मुख्य कमियों में शामिल हैं — पंडालों में अपर्याप्त आपातकालीन रोशनी, ज्वलनशील सजावट सामग्री, भीड़-भरे प्रवेश-निकास मार्गों के पास अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियाँ, तथा पंडाल परिसर में एलपीजी सिलेंडरों का अवैध उपयोग। ये खामियाँ भगदड़ जैसी स्थिति में जनहानि के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।
आलोचकों का कहना है कि पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की जाँच उत्सव के आरंभ से पहले होनी चाहिए थी, न कि किसी दुर्घटना के बाद। यह पहली बार नहीं है जब कोलकाता के पूजा पंडालों में अग्नि सुरक्षा उल्लंघन सामने आए हों।
आगे क्या होगा
समिति कोलकाता के अन्य प्रमुख पंडालों का निरीक्षण जारी रखेगी। नोटिस में दिए गए समयसीमा के भीतर खामियाँ न सुधारने पर संबंधित पूजा समितियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा सकती है। राज्य प्रशासन की यह सक्रियता दुर्गा पूजा जैसे विशाल आयोजनों में व्यवस्थित सुरक्षा ढाँचे की माँग को पुनः रेखांकित करती है।