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चोरबागन भगदड़ के बाद बंगाल सरकार सख्त, 3 दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस; सुरक्षा में मिलीं गंभीर खामियाँ

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चोरबागन भगदड़ के बाद बंगाल सरकार सख्त, 3 दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस; सुरक्षा में मिलीं गंभीर खामियाँ

सारांश

चोरबागन भगदड़ के बाद कोलकाता में दुर्गा पूजा सुरक्षा पर सवाल — राज्य सरकार की उच्च-स्तरीय समिति ने निरीक्षण में तीन बड़ी पूजा समितियों को नोटिस दिए। एलपीजी सिलेंडर, ज्वलनशील सजावट और अँधेरे पंडाल — खामियाँ ऐसी जो किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती थीं।

मुख्य बातें

चोरबागन भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्च-स्तरीय निरीक्षण समिति गठित की।
समिति में राजेश कुमार सिंह (आपदा प्रबंधन), अनुज शर्मा (अग्निशमन) और जावेद शमीम (STF) शामिल।
बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन को अपर्याप्त रोशनी और प्रवेश-निकास अवरोध पर नोटिस; शाम 7 बजे तक सुधार का निर्देश।
चेतला अग्रानी क्लब पर धारा 23ए उल्लंघन और एलपीजी सिलेंडर के अवैध उपयोग पर नोटिस; रात 8 बजे तक ढाँचे हटाने का आदेश।
त्रिधारा सम्मिलनी में ज्वलनशील सजावट सामग्री और खराब वायरिंग पर नोटिस; रात 9 बजे तक फायर स्टेशन को सूचित करने का निर्देश।

पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागन में दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान हुई भगदड़ की घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए एक उच्च-स्तरीय निरीक्षण समिति का गठन किया, जिसने रविवार को कई पूजा पंडालों का दौरा कर तीन प्रमुख पूजा समितियों को सुरक्षा खामियों के लिए नोटिस जारी किए। निरीक्षण में अग्नि सुरक्षा, आपातकालीन रोशनी और ज्वलनशील सामग्री के उपयोग से जुड़ी कई गंभीर कमियाँ सामने आईं।

उच्च-स्तरीय समिति का गठन

राज्य सरकार द्वारा गठित इस समिति में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं — राजेश कुमार सिंह, प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग; अनुज शर्मा, महानिदेशक, पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवाएँ; तथा जावेद शमीम, महानिदेशक, पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स। समिति को पंडालों में जीवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा की समीक्षा की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब चोरबागन भगदड़ ने पूजा आयोजनों में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा मानकों पर व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता के पंडालों में लाखों दर्शक आते हैं, जिससे किसी भी लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

मुख्य घटनाक्रम: तीन पूजा समितियों को नोटिस

दक्षिण कोलकाता डिवीजन के डिविजनल फायर ऑफिसर ने निरीक्षण के बाद तीनों समितियों को तत्काल खामियाँ दूर करने के निर्देश दिए। पहला नोटिस बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन को जारी हुआ। पंडाल के अंदर रोशनी अत्यंत कम पाई गई, जिससे आपातकाल में निकासी बाधित हो सकती थी। आयोजकों को पर्याप्त रोशनी, स्पष्ट दृश्यता और प्रवेश-निकास द्वारों के पास व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक के साथ शाम 7 बजे तक स्थानीय फायर स्टेशन को सूचित करने का निर्देश दिया गया।

दूसरा नोटिस चेतला अग्रानी क्लब को दिया गया। यहाँ भी अपर्याप्त रोशनी के साथ वेंटिलेशन की कमी पाई गई — आयोजकों को पर्याप्त पंखे और एयर-कंडीशनिंग लगाने को कहा गया ताकि भीड़ में दम घुटने की स्थिति न बने। इसके अलावा पंडाल के समीप कई अस्थायी दुकानें और ढाँचे बनाए गए थे, जिनमें एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल हो रहा था। यह पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1950 की धारा 23ए का उल्लंघन है। आयोजकों को रात 8 बजे तक ये ढाँचे हटाने का आदेश दिया गया।

तीसरा नोटिस त्रिधारा सम्मिलनी को भेजा गया। निरीक्षण में पाया गया कि पंडाल की सजावट में अत्यंत जल्दी आग पकड़ने वाली सामग्रियों का उपयोग किया गया था, जिससे आग तेज़ी से फैलने का खतरा था। आयोजकों को सभी बिजली उपकरणों और वायरिंग की सुरक्षा सुनिश्चित कर रात 9 बजे तक स्थानीय फायर स्टेशन को जानकारी देने का निर्देश दिया गया।

सुरक्षा में मिलीं खामियाँ: एक नज़र

निरीक्षण में सामने आई मुख्य कमियों में शामिल हैं — पंडालों में अपर्याप्त आपातकालीन रोशनी, ज्वलनशील सजावट सामग्री, भीड़-भरे प्रवेश-निकास मार्गों के पास अनधिकृत व्यावसायिक गतिविधियाँ, तथा पंडाल परिसर में एलपीजी सिलेंडरों का अवैध उपयोग। ये खामियाँ भगदड़ जैसी स्थिति में जनहानि के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती हैं।

आलोचकों का कहना है कि पूजा पंडालों में सुरक्षा मानकों की जाँच उत्सव के आरंभ से पहले होनी चाहिए थी, न कि किसी दुर्घटना के बाद। यह पहली बार नहीं है जब कोलकाता के पूजा पंडालों में अग्नि सुरक्षा उल्लंघन सामने आए हों।

आगे क्या होगा

समिति कोलकाता के अन्य प्रमुख पंडालों का निरीक्षण जारी रखेगी। नोटिस में दिए गए समयसीमा के भीतर खामियाँ न सुधारने पर संबंधित पूजा समितियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा सकती है। राज्य प्रशासन की यह सक्रियता दुर्गा पूजा जैसे विशाल आयोजनों में व्यवस्थित सुरक्षा ढाँचे की माँग को पुनः रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि ये निरीक्षण पूजा शुरू होने से पहले क्यों नहीं हुए। हर साल कोलकाता के पंडालों में लाखों श्रद्धालु आते हैं और हर साल सुरक्षा खामियाँ 'दुर्घटना के बाद' उजागर होती हैं — यह प्रतिक्रियावादी प्रशासन का पुराना ढर्रा है। एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग और ज्वलनशील सजावट सामग्री जैसी खामियाँ किसी भी पूर्व-उत्सव जाँच में आसानी से पकड़ी जा सकती थीं। जब तक नोटिस और निरीक्षण को उत्सव-पूर्व अनिवार्य प्रक्रिया नहीं बनाया जाता, ये कदम महज़ खानापूर्ति बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोरबागन भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने क्या कदम उठाए?
राज्य सरकार ने दुर्गा पूजा पंडालों में जीवन और अग्नि सुरक्षा की समीक्षा के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की, जिसने कोलकाता के कई पंडालों का निरीक्षण कर तीन प्रमुख पूजा समितियों को नोटिस जारी किए। इन नोटिस में तत्काल सुधार और समयसीमा के भीतर फायर स्टेशन को सूचना देने का निर्देश दिया गया है।
किन तीन पूजा समितियों को नोटिस दिया गया और क्यों?
बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन (अपर्याप्त रोशनी और अवरुद्ध निकास मार्ग), चेतला अग्रानी क्लब (एलपीजी सिलेंडर का अवैध उपयोग और अग्निशमन अधिनियम की धारा 23ए का उल्लंघन) और त्रिधारा सम्मिलनी (ज्वलनशील सजावट सामग्री और खराब विद्युत वायरिंग) को नोटिस दिए गए। तीनों को निर्धारित समयसीमा के भीतर खामियाँ दूर करने का आदेश है।
निरीक्षण समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में तीन वरिष्ठ अधिकारी हैं — राजेश कुमार सिंह (प्रधान सचिव, आपदा प्रबंधन), अनुज शर्मा (महानिदेशक, पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवाएँ) और जावेद शमीम (महानिदेशक, पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स)।
पूजा पंडालों में मिली मुख्य सुरक्षा खामियाँ क्या थीं?
निरीक्षण में अपर्याप्त आपातकालीन रोशनी, अत्यंत ज्वलनशील सजावट सामग्री, पंडाल परिसर में एलपीजी सिलेंडरों का अवैध उपयोग, अवरुद्ध प्रवेश-निकास द्वार और खराब विद्युत वायरिंग जैसी गंभीर कमियाँ सामने आईं। ये खामियाँ किसी भी आपात स्थिति में बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।
क्या नोटिस न मानने पर कोई कार्रवाई होगी?
अधिकारियों के अनुसार, दिए गए समयसीमा के भीतर खामियाँ न सुधारने पर संबंधित पूजा समितियों के विरुद्ध आगे की कार्रवाई की जा सकती है। पश्चिम बंगाल अग्निशमन सेवा अधिनियम, 1950 के तहत उल्लंघन पर दंडात्मक प्रावधान लागू होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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