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कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: 6 सदस्यीय न्यायिक समिति करेगी जांच, 2027 से पंडालों में नए सुरक्षा नियम

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कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: 6 सदस्यीय न्यायिक समिति करेगी जांच, 2027 से पंडालों में नए सुरक्षा नियम

सारांश

कोलकाता के चोरबागान पंडाल में 19 मौतों की भगदड़ के पांच दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय न्यायिक समिति गठित की है। तीन महीने में आने वाली रिपोर्ट 2027 से पंडाल सुरक्षा के नए मानक तय करेगी।

मुख्य बातें

17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पंडाल में दुर्गा पूजा भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी।
पश्चिम बंगाल सरकार ने जांच के लिए 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की है।
समिति की अध्यक्ष सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती हैं; रिपोर्ट 3 महीने में सौंपी जानी है।
समिति सीसीटीवी फुटेज , मोबाइल वीडियो और मेडिकल रिपोर्ट की जांच करेगी तथा चश्मदीदों के बयान दर्ज करेगी।
रिपोर्ट के आधार पर 2027 से बड़े पूजा पंडालों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे।
सर्वोच्च न्यायालय के पुराने आदेश के कारण कार्यरत जज की नियुक्ति संभव नहीं हो सकी, जिसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश को अध्यक्ष बनाया गया।

पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 को हुई दुर्गा पूजा भगदड़ की जांच के लिए एक छह सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की है, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी। इस समिति के निष्कर्षों के आधार पर 2027 से बड़े सामुदायिक पूजा पंडालों में सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। 22 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी सामने आई है।

समिति की जांच का दायरा

राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, समिति भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों के कई अहम पहलुओं की जांच करेगी। इनमें पंडाल में प्रवेश करने वाले लोगों की अधिकतम तय संख्या, आने-जाने के रास्तों की पर्याप्तता, सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था और आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता शामिल हैं।

समिति सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो क्लिप और हादसे में मारे गए या घायल हुए लोगों की मेडिकल रिपोर्ट की भी जांच करेगी, ताकि घटनाक्रम का सटीक क्रम निर्धारित किया जा सके। इसके अलावा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।

समिति अध्यक्ष का बयान

समिति की अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि पैनल को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। उन्होंने स्वीकार किया, 'मैं मानती हूं कि यह काम चुनौतीपूर्ण है। लेकिन हम इस चुनौती का सामना करने और समय पर रिपोर्ट सौंपने की पूरी कोशिश करेंगे।'

जस्टिस सरस्वती ने स्पष्ट किया कि जांच का प्राथमिक उद्देश्य हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और इतनी बड़ी संख्या में मौतों के कारणों को समझना है। उन्होंने कहा, 'दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और इसके आधार पर दुर्गा पूजा समितियों को निर्देश दिए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।'

कार्यरत जज की नियुक्ति पर अड़चन

गौरतलब है कि यह समिति तब गठित की गई, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा जज से जांच कराने का प्रयास विफल रहा। मुख्य सचिव कार्यालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे के कार्यालय को नियुक्ति का अनुरोध भेजा था।

हालांकि, मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश घुगे ने राज्य सरकार को सूचित किया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश के अनुसार, किसी कार्यरत न्यायाधीश को ऐसे जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में यह पैनल बनाया गया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कार्यरत जज की नियुक्ति की माँग उठाई थी।

सुरक्षा उपायों पर भविष्य की योजना

राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, समिति के निष्कर्षों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उन्हीं के आधार पर 2027 की दुर्गा पूजा से पहले बड़े पंडालों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक तैयार किए जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब हर वर्ष लाखों श्रद्धालु राज्य के हज़ारों पंडालों में उमड़ते हैं और भीड़ प्रबंधन हमेशा से एक गंभीर चिंता रही है।

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चोरबागान हादसे में कहाँ-कहाँ चूक हुई — और क्या राज्य के पूजा पंडालों के लिए एक समग्र सुरक्षा ढाँचा सामने आ पाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

रिपोर्टें आती हैं, लेकिन ज़मीनी बदलाव अक्सर कागज़ों तक सिमट जाते हैं। असली परीक्षा यह होगी कि क्या पश्चिम बंगाल सरकार समिति की सिफारिशों को बाध्यकारी सुरक्षा मानकों में बदलेगी, या वे भी पिछले हादसों की रिपोर्टों की तरह फाइलों में दफन हो जाएंगी। कार्यरत जज की नियुक्ति न होने से समिति की स्वतंत्रता और अधिकार पर भी सवाल उठ सकते हैं — विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देने में देर नहीं करेगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ कब और कहाँ हुई?
यह भगदड़ 17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पंडाल में हुई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए।
पश्चिम बंगाल सरकार ने भगदड़ की जांच के लिए क्या कदम उठाया है?
राज्य सरकार ने सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में छह सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की है। समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायिक जांच समिति क्या-क्या जांच करेगी?
समिति सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो क्लिप और घायलों-मृतकों की मेडिकल रिपोर्ट की जांच करेगी। इसके अलावा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाएंगे और भीड़ प्रबंधन, निकास मार्ग एवं सुरक्षा इंतजामों की खामियों की पहचान की जाएगी।
2027 से दुर्गा पूजा पंडालों में क्या बदलाव आएंगे?
समिति की रिपोर्ट के आधार पर 2027 की दुर्गा पूजा से पहले बड़े पंडालों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक तैयार किए जाएंगे। इनमें पंडाल में प्रवेश की अधिकतम संख्या, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन निकास व्यवस्था शामिल हो सकती है।
कार्यरत जज को समिति का प्रमुख क्यों नहीं बनाया गया?
कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे ने सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए राज्य सरकार को सूचित किया कि किसी कार्यरत न्यायाधीश को ऐसे जांच आयोग का नेतृत्व नहीं सौंपा जा सकता। इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पैनल गठित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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