कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: 6 सदस्यीय न्यायिक समिति करेगी जांच, 2027 से पंडालों में नए सुरक्षा नियम
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन पंडाल में 17 अक्टूबर 2026 को हुई दुर्गा पूजा भगदड़ की जांच के लिए एक छह सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की है, जिसमें 19 लोगों की मौत हुई थी। इस समिति के निष्कर्षों के आधार पर 2027 से बड़े सामुदायिक पूजा पंडालों में सुरक्षा मानक लागू किए जाएंगे। 22 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी सामने आई है।
समिति की जांच का दायरा
राज्य सरकार के सूत्रों के अनुसार, समिति भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा इंतजामों के कई अहम पहलुओं की जांच करेगी। इनमें पंडाल में प्रवेश करने वाले लोगों की अधिकतम तय संख्या, आने-जाने के रास्तों की पर्याप्तता, सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था और आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता शामिल हैं।
समिति सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो क्लिप और हादसे में मारे गए या घायल हुए लोगों की मेडिकल रिपोर्ट की भी जांच करेगी, ताकि घटनाक्रम का सटीक क्रम निर्धारित किया जा सके। इसके अलावा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं।
समिति अध्यक्ष का बयान
समिति की अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि पैनल को तीन महीने के भीतर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। उन्होंने स्वीकार किया, 'मैं मानती हूं कि यह काम चुनौतीपूर्ण है। लेकिन हम इस चुनौती का सामना करने और समय पर रिपोर्ट सौंपने की पूरी कोशिश करेंगे।'
जस्टिस सरस्वती ने स्पष्ट किया कि जांच का प्राथमिक उद्देश्य हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और इतनी बड़ी संख्या में मौतों के कारणों को समझना है। उन्होंने कहा, 'दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और इसके आधार पर दुर्गा पूजा समितियों को निर्देश दिए जाएंगे, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।'
कार्यरत जज की नियुक्ति पर अड़चन
गौरतलब है कि यह समिति तब गठित की गई, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा जज से जांच कराने का प्रयास विफल रहा। मुख्य सचिव कार्यालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे के कार्यालय को नियुक्ति का अनुरोध भेजा था।
हालांकि, मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश घुगे ने राज्य सरकार को सूचित किया कि सर्वोच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश के अनुसार, किसी कार्यरत न्यायाधीश को ऐसे जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त नहीं किया जा सकता। इसके बाद सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में यह पैनल बनाया गया। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने कार्यरत जज की नियुक्ति की माँग उठाई थी।
सुरक्षा उपायों पर भविष्य की योजना
राज्य सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, समिति के निष्कर्षों का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और उन्हीं के आधार पर 2027 की दुर्गा पूजा से पहले बड़े पंडालों के लिए अनिवार्य सुरक्षा मानक तैयार किए जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब हर वर्ष लाखों श्रद्धालु राज्य के हज़ारों पंडालों में उमड़ते हैं और भीड़ प्रबंधन हमेशा से एक गंभीर चिंता रही है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि चोरबागान हादसे में कहाँ-कहाँ चूक हुई — और क्या राज्य के पूजा पंडालों के लिए एक समग्र सुरक्षा ढाँचा सामने आ पाएगा।