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कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: 19 मौतों के बाद बंगाल सरकार ने 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति बनाई

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कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़: 19 मौतों के बाद बंगाल सरकार ने 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति बनाई

सारांश

कोलकाता के चोरबागान पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई भगदड़ में 19 लोगों की जान गई थी। अब बंगाल सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की है, जिसे तीन महीने में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 अक्टूबर 2026 को कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ की जांच के लिए 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति गठित की।
17 अक्टूबर की रात चोरबागान सर्वजनिन पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई थी।
समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) करेंगी।
जांच समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट, निष्कर्ष और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपनी होंगी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सेवारत हाई कोर्ट जज से जांच कराने की माँग की थी; कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे को अनुरोध पत्र भी भेजा गया था।

पश्चिम बंगाल सरकार ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन स्थित सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की रात हुई भीषण भगदड़ की जांच के लिए छह सदस्यीय न्यायिक जांच समिति के गठन की घोषणा की। इस दुखद हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद से राज्य सरकार पर जवाबदेही सुनिश्चित करने का दबाव था।

जांच समिति की संरचना

राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, न्यायिक जांच समिति की अध्यक्षता न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (सेवानिवृत्त) करेंगी। समिति के शेष पाँच सदस्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं सुरक्षा अधिकारी होंगे।

इनमें राज्य आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव, राज्य पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के महानिदेशक, राज्य पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक रैंक के एक प्रतिनिधि, राज्य गृह एवं पर्वतीय मामलों विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के एक प्रतिनिधि और कोलकाता स्थित राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के एक प्रतिनिधि शामिल हैं।

जांच की समयसीमा और अधिकार

सरकारी आदेश के अनुसार, जांच समिति आदेश जारी होने की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट, निष्कर्षों और सिफारिशों सहित, राज्य सरकार को सौंपेगी। समिति को आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध करने का भी अधिकार होगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया कि सभी संबंधित विभाग, प्राधिकरण, एजेंसियाँ और व्यक्ति जांच दल को पूर्ण सहयोग देंगे तथा आवश्यक अभिलेख, सूचना और सहायता उपलब्ध कराएंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री की माँग और हाई कोर्ट से अनुरोध

गौरतलब है कि हादसे के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि वे चाहते हैं कि जांच पैनल का नेतृत्व कलकत्ता हाई कोर्ट के किसी सेवारत न्यायाधीश द्वारा किया जाए। इस संदर्भ में मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को एक औपचारिक अनुरोध पत्र भी भेजा गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में पर्व-आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन की चूक को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। 17 अक्टूबर की रात चोरबागान पंडाल में उमड़ी भारी भीड़ के बीच हुई भगदड़ ने एक बार फिर सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा तंत्र की खामियों को उजागर किया है।

आम जनता और विपक्ष की प्रतिक्रिया

पीड़ित परिवारों की ओर से त्वरित न्याय और मुआवज़े की माँग उठाई जा रही है। आलोचकों का कहना है कि न्यायिक समिति का गठन देर से किया गया और तीन महीने की समयसीमा पर्याप्त जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बहुत लंबी है। विपक्षी दलों ने हादसे के लिए राज्य सरकार के भीड़ प्रबंधन तंत्र को ज़िम्मेदार ठहराते हुए त्वरित कार्रवाई की माँग की है।

आगे क्या होगा

जांच समिति अब हादसे के कारणों, ज़िम्मेदारी की श्रृंखला और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उपाय सुझाएगी। रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार को कानून के तहत उचित कार्रवाई करनी होगी, जिसमें दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे का प्रश्न शामिल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह समिति सिर्फ एक प्रशासनिक खानापूर्ति बनकर रह जाएगी। मुख्यमंत्री ने सेवारत हाई कोर्ट जज से जांच की माँग की थी, पर अंततः सेवानिवृत्त न्यायाधीश को नियुक्त किया गया — यह अंतर महत्वपूर्ण है। तीन महीने की समयसीमा उचित है, लेकिन इसी दौरान राजनीतिक दबाव और जनस्मृति दोनों कमजोर होती हैं। बड़े पर्व आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की विफलता बार-बार दोहराई जाने वाली त्रासदी है — जब तक जांच रिपोर्ट की सिफारिशें क्रियान्वित करने का बाध्यकारी तंत्र नहीं बनता, ये समितियाँ केवल सुर्खियों का जवाब बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ कब और कहाँ हुई?
यह भगदड़ 17 अक्टूबर 2026 की रात कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन स्थित सामुदायिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई थी। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई थी।
बंगाल सरकार ने इस भगदड़ की जांच के लिए क्या कदम उठाया?
पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 अक्टूबर 2026 को 6 सदस्यीय न्यायिक जांच समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती करेंगी। समिति को तीन महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जांच समिति में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
समिति में न्यायमूर्ति अनिंदिता रॉय सरस्वती (अध्यक्ष) के अलावा राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव, एसटीएफ महानिदेशक, पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के प्रतिनिधि, गृह विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के प्रतिनिधि और एनडीआरएफ के एक प्रतिनिधि शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने जांच को लेकर क्या माँग की थी?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने माँग की थी कि जांच पैनल का नेतृत्व कलकत्ता हाई कोर्ट के किसी सेवारत न्यायाधीश द्वारा किया जाए। इसके लिए मुख्य सचिव कार्यालय ने मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे के कार्यालय को अनुरोध पत्र भी भेजा था।
जांच रिपोर्ट कब तक आने की उम्मीद है?
सरकारी आदेश के अनुसार जांच समिति आदेश जारी होने की तिथि से तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट, निष्कर्ष और सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी। इसके बाद राज्य सरकार कानून के तहत उचित कार्रवाई करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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