21 अक्टूबर 2026
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कोलकाता चोरबागान भगदड़: एसआईटी गठित, सेवानिवृत्त जज करेंगी जांच, 3 माह में रिपोर्ट देय

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कोलकाता चोरबागान भगदड़: एसआईटी गठित, सेवानिवृत्त जज करेंगी जांच, 3 माह में रिपोर्ट देय

सारांश

चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ के चार दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से एसआईटी गठित की है। सेवानिवृत्त जज अनिंदिता रॉय सरस्वती की अध्यक्षता वाला यह दल तीन महीने में रिपोर्ट देगा और भविष्य के आयोजनों के लिए सुरक्षा सुझाव भी सौंपेगा।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 21 अक्टूबर 2026 को चोरबागान दुर्गा पूजा भगदड़ की जांच के लिए एसआईटी गठित की।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता रॉय सरस्वती एसआईटी की अध्यक्ष; दल में एनडीआरएफ, एसटीएफ सहित कई विभागों के प्रतिनिधि।
भगदड़ 17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल के पास हुई थी।
एसआईटी को आदेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जांच में भीड़ प्रबंधन, अनुमति प्रक्रिया, मौसम चेतावनियों और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल होगी।
एसआईटी भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए भीड़ सीमा और आपातकालीन निकासी योजना पर सिफारिशें भी देगी।

पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल के समीप 17 अक्टूबर 2026 को हुई भगदड़ की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा 21 अक्टूबर को जारी आदेश के अनुसार, यह दल कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से बनाया गया है और इसे आदेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी होगी।

एसआईटी की संरचना और नेतृत्व

सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता रॉय सरस्वती एसआईटी की अध्यक्ष होंगी। जांच दल में राज्य के आपदा प्रबंधन एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रधान सचिव, विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि, गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग के प्रतिनिधि और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) का एक प्रतिनिधि शामिल होंगे। आवश्यकता पड़ने पर राज्य सरकार से अतिरिक्त अधिकारियों को दल में जोड़ने का अनुरोध किया जा सकता है।

जांच के प्रमुख बिंदु

एसआईटी यह स्थापित करने का प्रयास करेगी कि 17 अक्टूबर को चोरबागान पंडाल के पास किन परिस्थितियों में भगदड़ हुई और भीड़ का दबाव किस प्रकार अचानक बढ़ा। जांच के दायरे में अत्यधिक भीड़, खराब मौसम, बिजली की खराबी, अफवाहें, प्रवेश एवं निकास के अपर्याप्त इंतजाम, संरचनात्मक कमियां और भीड़ नियंत्रण उपायों में संभावित चूक जैसे पहलू शामिल हैं।

जांच दल सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन वीडियो, फोरेंसिक जांच के निष्कर्ष, कॉल रिकॉर्ड, पुलिस थानों और नियंत्रण कक्ष के लॉग तथा चिकित्सा रिकॉर्ड की भी पड़ताल करेगा। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर जुटी भीड़ की संख्या तय सुरक्षित क्षमता से अधिक थी या नहीं, यह भी आकलन किया जाएगा।

एजेंसियों और आयोजकों की जवाबदेही

एसआईटी आयोजकों, निजी सुरक्षाकर्मियों, स्वयंसेवकों, पुलिस, एंबुलेंस सेवाओं, अस्पतालों, अग्निशमन सेवाओं और नागरिक प्रशासन की तैयारियों, प्रतिक्रिया समय और भूमिका की जांच करेगी। आदेश में कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग, सीईएससी लिमिटेड और अन्य संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच का भी प्रावधान है।

यह भी देखा जाएगा कि आयोजन के लिए जरूरी अनुमतियां लागू नियमों के अनुसार दी गई थीं या नहीं। जहां कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी, वहां उचित कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की प्रासंगिक गाइडलाइंस और न्यायिक निर्देशों को भी ध्यान में रखा जाएगा।

पीड़ितों के लिए मुआवजा और पुनर्वास

एसआईटी की जिम्मेदारियों में भगदड़ से प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को दी गई या दी जाने वाली सहायता, मुआवजे और पुनर्वास व्यवस्था की समीक्षा भी शामिल है। घोषित अनुग्रह राशि की पर्याप्तता का भी आकलन किया जाएगा। गौरतलब है कि इस प्रकार की समीक्षा भविष्य में ऐसी घटनाओं में पीड़ितों को समय पर न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम मानी जाती है।

भविष्य के आयोजनों के लिए सुरक्षा सिफारिशें

एसआईटी को उत्तर कोलकाता की संकरी गलियों में बड़े दुर्गा पूजा आयोजनों को सुरक्षित बनाने के उपाय सुझाने की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें वैज्ञानिक आकलन के आधार पर भीड़ की अधिकतम सीमा तय करना, पर्याप्त प्रवेश एवं निकास मार्ग, सीसीटीवी निगरानी, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली, आपातकालीन निकासी योजना और विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और सभी संबंधित विभागों को एसआईटी के साथ पूर्ण सहयोग के निर्देश दिए गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि जांच रिपोर्ट केवल दराज में न बंद हो जाए — जैसा पिछली ऐसी त्रासदियों के बाद होता आया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से गठित होना दल की विश्वसनीयता तो बढ़ाता है, परंतु आयोजकों, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की एक साथ जांच यह दर्शाती है कि जवाबदेही की परिधि व्यापक रखी गई है। असली बदलाव तभी आएगा जब सिफारिशें अगले पूजा सीजन से पहले क्रियान्वित हों।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोरबागान दुर्गा पूजा भगदड़ क्या थी और यह कब हुई?
यह भगदड़ 17 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल के समीप हुई। पंडाल के आसपास अत्यधिक भीड़ जमा होने के कारण यह दुर्घटना घटी, जिसकी जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है।
चोरबागान भगदड़ की जांच के लिए एसआईटी कब और कैसे बनी?
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने 21 अक्टूबर 2026 को एसआईटी गठन का आदेश जारी किया। यह दल कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से बनाया गया है और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अनिंदिता रॉय सरस्वती इसकी अध्यक्ष हैं।
एसआईटी अपनी रिपोर्ट कब तक देगी और जांच में क्या-क्या शामिल है?
एसआईटी को आदेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है। जांच में भीड़ प्रबंधन, मौसम संबंधी चेतावनियां, सीसीटीवी फुटेज, आयोजन अनुमतियां, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही शामिल है।
एसआईटी में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
एसआईटी में आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव, एसटीएफ के पुलिस महानिदेशक, पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि, गृह विभाग के प्रतिनिधि और एनडीआरएफ का एक प्रतिनिधि शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर अन्य अधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एसआईटी क्या सुझाव दे सकती है?
एसआईटी वैज्ञानिक आकलन के आधार पर भीड़ की अधिकतम सीमा तय करने, पर्याप्त प्रवेश-निकास मार्ग, सीसीटीवी निगरानी, सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली और आपातकालीन निकासी योजना जैसे उपायों की सिफारिश कर सकती है। उत्तर कोलकाता की संकरी गलियों में आयोजित बड़े पूजा कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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