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कोलकाता भगदड़: कलकत्ता हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच आयोग बनाने का निर्देश दिया, 19 की मौत

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कोलकाता भगदड़: कलकत्ता हाई कोर्ट ने न्यायिक जांच आयोग बनाने का निर्देश दिया, 19 की मौत

सारांश

कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया — चोरबागान पूजा पंडाल भगदड़, जिसमें 19 जिंदगियाँ गईं, की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले आयोग से होगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस और नगर निगम को समिति से बाहर रखने और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई का वादा किया।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने का निर्देश दिया।
17 अक्टूबर की रात चोरबागान सर्वजनिन समुदाय दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी।
सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के कारण कार्यरत न्यायाधीश को आयोग में नियुक्त करना संभव नहीं; राज्य सरकार को सेवानिवृत्त न्यायाधीश चुनना होगा।
जांच की निष्पक्षता के लिए कोलकाता पुलिस , अग्निशमन विभाग और नगर निगम के प्रतिनिधियों को समिति से बाहर रखा जाएगा।
मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख मुआवजा और ग्रुप-डी नौकरी; घायलों को ₹5 लाख व मुफ्त इलाज की घोषणा।

कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि 17 अक्टूबर की रात चोरबागान सर्वजनिन समुदाय दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में हुई भगदड़ की जांच के लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाए। इस दुखद हादसे में 19 लोगों की जान जा चुकी है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग की अध्यक्षता एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को करनी होगी।

हाई कोर्ट का निर्देश और पृष्ठभूमि

इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने मुख्य न्यायाधीश घुगे के कार्यालय को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि जांच के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के किसी कार्यरत न्यायाधीश को नामित किया जाए। हालांकि, न्यायालय ने इस अनुरोध को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के अनुसार किसी सेवारत न्यायाधीश को ऐसे आयोग में नियुक्त नहीं किया जा सकता।

गौरतलब है कि यह निर्देश ऐसे समय आया है जब राज्य सरकार और न्यायपालिका के बीच जांच की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आदान-प्रदान चल रहा था। न्यायालय ने राज्य को अपनी पसंद का सेवानिवृत्त न्यायाधीश चुनकर आयोग बनाने की जिम्मेदारी सौंपी।

मुख्यमंत्री की पीड़ित परिवारों से मुलाकात

मंगलवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भगदड़ में जान गंवाने वाले कुछ लोगों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें मुआवजे के चेक सौंपे। उन्होंने आश्वासन दिया कि न्यायिक जांच आयोग अपना काम युद्धस्तर पर पूरा करेगा। बुधवार को वे उन परिवारों से भी मिलेंगे जिनसे मंगलवार को मुलाकात नहीं हो सकी।

जांच में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय

मुख्यमंत्री अधिकारी ने घोषणा की कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए कोलकाता पुलिस, राज्य अग्निशमन विभाग और कोलकाता नगर निगम के प्रतिनिधियों को न्यायिक जांच समिति में शामिल नहीं किया जाएगा। यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि हादसे से जुड़े संभावित रूप से जिम्मेदार विभागों के अधिकारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित न कर सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में पूजा समिति के आयोजक या पुलिसकर्मी किसी की भी लापरवाही साबित होती है, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

मुआवजा और सहायता की घोषणा

राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख का आर्थिक मुआवजा और ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, घायलों का पूरा चिकित्सा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और उन्हें ₹5 लाख की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी।

आगे क्या होगा

अब राज्य सरकार को अपनी पसंद के सेवानिवृत्त न्यायाधीश का नाम तय कर न्यायिक जांच आयोग का औपचारिक गठन करना होगा। यह आयोग भगदड़ के कारणों, जिम्मेदारी और सुरक्षा चूक की पड़ताल करेगा। हादसे की पूरी परिस्थितियाँ उजागर होने पर भविष्य में सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी नए सिरे से विचार हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि भीड़ प्रबंधन में चूक किस स्तर पर हुई और क्या इसे टाला जा सकता था। दुर्गा पूजा जैसे बड़े सार्वजनिक उत्सवों में भगदड़ की यह पहली घटना नहीं है — पश्चिम बंगाल और देश के अन्य राज्यों में ऐसी त्रासदियाँ बार-बार हो चुकी हैं, फिर भी व्यापक भीड़-सुरक्षा नीति आज भी अधूरी है। मुआवजे की घोषणाएँ तत्काल राहत हैं, पर जब तक जांच रिपोर्ट की सिफारिशें लागू नहीं होतीं और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक यह त्रासदी महज एक संख्या बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता दुर्गा पूजा भगदड़ में क्या हुआ था?
17 अक्टूबर 2026 की रात कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन समुदाय दुर्गा पूजा समिति के पंडाल में भगदड़ मच गई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब पंडाल में भारी भीड़ उमड़ी हुई थी।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे ने 20 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि भगदड़ की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग का गठन किया जाए। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेशों के कारण कार्यरत न्यायाधीश को इस आयोग में नियुक्त नहीं किया जा सकता।
मृतकों के परिजनों को कितना मुआवजा मिलेगा?
पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख का आर्थिक मुआवजा और ग्रुप-डी पद पर सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों का पूरा चिकित्सा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी और उन्हें ₹5 लाख की अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
जांच समिति में किसे शामिल नहीं किया जाएगा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कोलकाता पुलिस, राज्य अग्निशमन विभाग और कोलकाता नगर निगम के प्रतिनिधियों को न्यायिक जांच समिति में शामिल नहीं किया जाएगा।
आगे जांच की प्रक्रिया क्या होगी?
राज्य सरकार को अब अपनी पसंद का सेवानिवृत्त न्यायाधीश चुनकर आयोग का औपचारिक गठन करना होगा। यह आयोग भगदड़ के कारणों, सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक और जिम्मेदारी की पड़ताल करेगा, और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
राष्ट्र प्रेस
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