क्या सीआईआई ने केंद्र से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण में तेजी लाने की अपील की?

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क्या सीआईआई ने केंद्र से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण में तेजी लाने की अपील की?

सारांश

सीआईआई ने केंद्र से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण में तेजी लाने की अपील की है। उनके अनुसार, इससे सरकारी कंपनियों की वास्तविक कीमत का पता चलेगा और संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी। यह कदम आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण हो सकता है।

मुख्य बातें

सीआईआई ने निजीकरण की प्रक्रिया तेज करने की अपील की है।
सरकार को संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
निजीकरण से स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अधिक निवेश होगा।
आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य मजबूत होगा।

नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। देश के प्रमुख उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट के लिए अपने सुझावों में केंद्र सरकार से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि इससे सरकारी कंपनियों की वास्तविक कीमत सामने आएगी और सरकार को संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति में अब निजी कंपनियों और नए विचारों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप एक दूरदर्शी निजीकरण नीति से सरकार अपने मुख्य कार्यों पर ध्यान दे सकेगी और निजी क्षेत्र को उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन में तेजी लाने का अवसर मिलेगा।

इसी सोच के तहत भारतीय उद्योग परिसंघ ने सरकार की रणनीतिक विनिवेश नीति को तेजी से लागू करने की मांग की है, जिसके अनुसार, गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से सरकार बाहर निकले और रणनीतिक क्षेत्रों में भी सरकार की हिस्सेदारी बहुत कम रखी जाए।

निजीकरण की प्रक्रिया को मजबूत और तेज करने के लिए सीआईआई ने चार सूत्रीय व्यापक रणनीति की रूपरेखा तैयार की है।

पहले सुझाव में कहा गया है कि निजीकरण के लिए कंपनियों का चयन मांग के आधार पर किया जाना चाहिए। अभी सरकार पहले कंपनियों को बेचने के लिए चुनती है और बाद में निवेशकों की रुचि देखती है। कई बार निवेशकों की दिलचस्पी या सही कीमत न मिलने पर प्रक्रिया रुक जाती है। संगठन का कहना है कि पहले निवेशकों की रुचि जानी जाए और फिर उन्हीं कंपनियों को प्राथमिकता दी जाए जिनमें अच्छी मांग हो। इससे प्रक्रिया आसान होगी और बेहतर कीमत मिल सकेगी।

दूसरे सुझाव में कहा गया है कि निवेशकों को स्पष्ट जानकारी देने के लिए सरकार को तीन साल की निजीकरण योजना पहले से घोषित करनी चाहिए। इससे निवेशकों को तैयारी का समय मिलेगा और कंपनियों की सही कीमत तय करने में मदद मिलेगी।

तीसरे सुझाव के तहत भारतीय उद्योग परिसंघ ने एक मजबूत व्यवस्था बनाने की बात कही है ताकि निजीकरण की निगरानी और भरोसे को बढ़ाया जा सके। इसके लिए एक विशेष संस्था बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें दिशा देने के लिए मंत्री स्तर का बोर्ड, सलाह देने के लिए उद्योग और कानूनी विशेषज्ञों का एक सलाहकार बोर्ड और काम को आगे बढ़ाने के लिए एक पेशेवर टीम शामिल हो।

इसके अलावा, संगठन ने एक अस्थायी उपाय के रूप में चरणबद्ध विनिवेश और तीन साल की योजना की सिफारिश की है, जिसके तहत सरकार लिस्टेड सार्वजनिक कंपनियों (पीएसई) में अपनी हिस्सेदारी धीरे-धीरे घटाकर पहले 51 प्रतिशत तक ला सकती है। इससे सरकार सबसे बड़ी हिस्सेदार बनी रहेगी और बाजार में कीमत भी अच्छी होगी। बाद में इस हिस्सेदारी को और घटाकर 33 से 26 प्रतिशत तक लाया जा सकता है।

भारतीय उद्योग परिसंघ के अनुसार, अगर सरकार 78 लिस्टेड सार्वजनिक कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत तक घटाती है, तो करीब 10 लाख करोड़ रुपए की राशि जुटाई जा सकती है। योजना के पहले दो वर्षों में 55 ऐसी कंपनियों में विनिवेश किया जा सकता है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत या उससे कम है, जिससे लगभग 4.6 लाख करोड़ रुपए जुटाए जा सकते हैं। इसके बाद 23 ऐसी कंपनियों में विनिवेश किया जा सकता है, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से ज्यादा है, जिससे करीब 5.4 लाख करोड़ रुपए जुटाए जाने की संभावना है।

संगठन का कहना है कि इन कदमों से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, प्रक्रिया पारदर्शी होगी और सरकार को अधिक मूल्य मिलेगा। निजीकरण से सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और हरित बुनियादी ढांचे जैसे जरूरी क्षेत्रों में ज्यादा निवेश कर सकेगी, जबकि रणनीतिक क्षेत्रों में सीमित मौजूदगी बनाए रखते हुए देश को आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि सीआईआई का यह कदम देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने का एक प्रयास है। निजीकरण की प्रक्रिया को तेज करके सरकार संसाधनों को बेहतर ढंग से जुटा सकती है और देश के विकास में योगदान कर सकती है। यह न केवल निवेशकों के विश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि आवश्यक क्षेत्रों में अधिक निवेश लाने में भी सहायक होगा।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पारदर्शी निजीकरण नीति का क्या अर्थ है?
पारदर्शी निजीकरण नीति का मतलब है कि निजीकरण की प्रक्रिया स्पष्ट और खुली हो, ताकि निवेशकों का विश्वास बढ़ सके।
सरकार निजीकरण से क्या लाभ उठाएगी?
निजीकरण से सरकार को संसाधन जुटाने, उद्योगों के विकास और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।
क्या सीआईआई के सुझावों से निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा?
हाँ, सीआईआई के सुझावों से प्रक्रिया पारदर्शी होगी और निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।
क्या निजीकरण से भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा?
हां, निजीकरण से भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना है, जिससे देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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