मेघालय MCS परीक्षा में 'पेपर-6' को कैबिनेट की मंजूरी, राज्य इतिहास-संस्कृति पर होगा फोकस
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय कैबिनेट ने मेघालय सिविल सर्विस (MCS) प्रतियोगी परीक्षा में एक नया राज्य-केंद्रित पेपर जोड़ने की मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 14 अगस्त 2026 को यह जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। यह निर्णय पूर्व यूपीएससी अध्यक्ष डेविड सिएमलिह की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को पारित इस प्रस्ताव के तहत MCS परीक्षा में प्रस्तावित 'पेपर-6' पूरी तरह मेघालय पर केंद्रित होगा। इसमें राज्य का इतिहास, संस्कृति, पारंपरिक संस्थाएँ और प्रणालियाँ, समाज, अर्थव्यवस्था तथा शासन से जुड़े अन्य महत्त्वपूर्ण पहलू शामिल किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री संगमा ने कहा, 'मकसद यह है कि एमसीएस अधिकारियों को राज्य के बारे में जानकारी हो, जिसमें उसका इतिहास, संस्कृति, अलग-अलग सिस्टम और आर्थिक पहलू शामिल हों।' उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि MCS के माध्यम से चुने गए अधिकारी मेघालय के विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परिवेश को गहराई से समझें।
विशेषज्ञ समिति की भूमिका
पूर्व यूपीएससी अध्यक्ष डेविड सिएमलिह की अगुवाई में गठित विशेषज्ञ समिति को विशेष रूप से इस मेघालय-केंद्रित पेपर के प्रस्ताव की जाँच करने और उसके ढाँचे व दायरे पर सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति की रिपोर्ट मुख्यमंत्री को प्राप्त हो चुकी है और कैबिनेट ने उसकी सिफारिशों को स्वीकृति दे दी है।
गौरतलब है कि मेघालय में पारंपरिक संस्थाएँ, रीति-रिवाज और राज्य की विशिष्ट सामाजिक संरचना शासन एवं प्रशासन में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में राज्य-विशेष ज्ञान को सिविल सेवा परीक्षा में शामिल करना एक दीर्घकालिक प्रशासनिक आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा था।
आम जनता और उम्मीदवारों पर असर
इस पहल से MCS परीक्षा में बैठने वाले उम्मीदवारों को राज्य के ऐतिहासिक विकास, सांस्कृतिक विविधता, पारंपरिक शासन प्रणालियों और आर्थिक चुनौतियों की व्यवस्थित समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे भावी सिविल सेवक सरकारी सेवा में आने से पहले ही स्थानीय संदर्भ से परिचित होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्य अपनी सिविल सेवा परीक्षाओं में स्थानीय प्रासंगिकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। मेघालय का यह निर्णय उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें राज्य-स्तरीय प्रशासनिक परीक्षाओं को केंद्रीय ढाँचे से अलग, अधिक स्थानीय रूप देने की कोशिश की जा रही है।
क्या होगा आगे
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब नए पेपर को परीक्षा में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। हालाँकि अधिकारियों के अनुसार, इसे लागू करने से पहले कुछ और प्रक्रियात्मक कदम उठाने पड़ सकते हैं। उम्मीद है कि यह पहल अंततः एक ऐसी राज्य सिविल सेवा के निर्माण में सहायक होगी जो स्थानीय मुद्दों और मेघालय के संस्थागत संदर्भ को ध्यान में रखते हुए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू कर सके।