13 अगस्त 2026
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यूपीएससी में मेघालय का बड़ा लक्ष्य: सीएम संगमा बोले — 'टैलेंट है, बस इकोसिस्टम चाहिए'

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यूपीएससी में मेघालय का बड़ा लक्ष्य: सीएम संगमा बोले — 'टैलेंट है, बस इकोसिस्टम चाहिए'

सारांश

मेघालय में टैलेंट है — बस सही इकोसिस्टम की दरकार है। सीएम संगमा ने 'एसेंट 2026' सेमिनार में यूपीएससी उत्तीर्ण सात उम्मीदवारों को ₹50,000 के चेक देकर संकेत दिया कि राज्य अब प्रतिभा पहचान से आगे बढ़कर उसे निखारने की व्यवस्था खड़ी कर रहा है।

मुख्य बातें

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के.
संगमा ने 12 अगस्त 2026 को शिलांग में 'एसेंट 2026' सेमिनार को संबोधित किया।
यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण 7 उम्मीदवारों को ₹50,000 के सीएम-इन्स्पायर चेक प्रदान किए गए।
संगमा ने कहा — राज्य में टैलेंट की कमी नहीं, ज़रूरत मज़बूत प्रशिक्षण, मेंटरशिप और आर्थिक सहायता के इकोसिस्टम की है।
स्टार प्रोग्राम के तहत 30,000 युवाओं की स्क्रीनिंग के बाद 10 एथलीटों को विशेष सहायता दी जा रही है — लक्ष्य 2036 ओलंपिक में पदक।
यही मॉडल अब यूपीएससी सहित अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लागू किया जा रहा है।

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 12 अगस्त 2026 को शिलांग में स्पष्ट किया कि राज्य में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) और अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रतिभा की कोई कमी नहीं है — असली ज़रूरत एक सुदृढ़ प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता के इकोसिस्टम की है। उन्होंने यह बात मेघालय एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MATI) द्वारा मावदियांगडियांग में आयोजित 'एसेंट 2026' सेमिनार को संबोधित करते हुए कही।

मुख्य घटनाक्रम

सेमिनार के दौरान मुख्यमंत्री संगमा और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने यूपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले सात उम्मीदवारों को ₹50,000 के सीएम-इन्स्पायर चेक प्रदान किए। यह राशि राज्य सरकार के सीएम-इन्स्पायर प्रोग्राम के अंतर्गत दी गई, जिसका उद्देश्य उम्मीदवारों को निरंतर संस्थागत सहायता उपलब्ध कराना है।

संगमा ने कहा कि चुनौती सभी संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाने, अनुकूल वातावरण निर्मित करने और उम्मीदवारों को सटीक मार्गदर्शन देने की है — ताकि वे न केवल व्यक्तिगत लक्ष्य हासिल करें, बल्कि राज्य के समग्र विकास में भी भागीदार बनें।

स्टार प्रोग्राम से सबक: खेल से प्रशासन तक

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के स्टार प्रोग्राम का उदाहरण दिया, जिसके तहत खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए गाँवों में लगभग 30,000 युवाओं की स्क्रीनिंग की गई। इस व्यापक चयन प्रक्रिया के बाद दस एथलीटों को विशेष सहायता के लिए चुना गया, जिसमें शिक्षा, पोषण, मनोवैज्ञानिक परामर्श, फिजियोथेरेपी, प्रशिक्षण और कोचिंग शामिल हैं।

संगमा ने बताया कि इस तैयारी का दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि इन एथलीटों में से कोई एक 2036 के ओलंपिक खेलों में पदक जीत सके। उन्होंने कहा कि प्रतिभा की पहचान, ऊँचे लक्ष्य और सहायता प्रणाली का यही मॉडल अब प्रतियोगी परीक्षाओं पर भी लागू किया जा रहा है।

उम्मीदवारों को संदेश: परीक्षा से परे सोचें

मुख्यमंत्री ने उम्मीदवारों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे महज परीक्षा उत्तीर्ण करने और IAS अधिकारी बनने तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी गहरी प्रेरणा को पहचानें। उन्होंने 2004 का चुनाव हारने का अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा किया और कहा कि असफलता से घबराने की बजाय उसका विश्लेषण किया जाना चाहिए — यही आगे बढ़ने की असली कुंजी है।

आम जनता और युवाओं पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत के राज्य राष्ट्रीय सिविल सेवाओं में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मेघालय जैसे छोटे राज्यों में संसाधनों की सीमितता और दिल्ली-केंद्रित कोचिंग उद्योग तक पहुँच न होने के कारण प्रतिभाशाली उम्मीदवार पीछे रह जाते हैं। सीएम-इन्स्पायर जैसे कार्यक्रम इस खाई को पाटने का प्रयास हैं।

क्या होगा आगे

राज्य सरकार के अनुसार, सीएम-इन्स्पायर प्रोग्राम को और विस्तार दिया जाएगा ताकि अधिक उम्मीदवारों को संस्थागत सहायता मिल सके। MATI के माध्यम से नियमित सेमिनार, मॉक टेस्ट और मेंटरशिप सत्रों की योजना है। गौरतलब है कि यह पहल पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी। ₹50,000 की एकमुश्त राशि प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद दी जाती है — जबकि यूपीएससी की मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी कहीं अधिक लंबी और महँगी प्रक्रिया है। स्टार प्रोग्राम का खेल-मॉडल प्रेरक है, पर प्रशासनिक परीक्षाओं के लिए इसे सीधे लागू करना जटिल है — क्योंकि एथलेटिक प्रतिभा मापी जा सकती है, यूपीएससी की तैयारी का स्तर नहीं। पूर्वोत्तर राज्यों को दिल्ली-केंद्रित कोचिंग उद्योग का विकल्प खड़ा करना होगा, और इसके लिए एकमुश्त चेक नहीं, बल्कि स्थायी संस्थागत ढाँचा चाहिए।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम-इन्स्पायर प्रोग्राम क्या है और इससे किसे फायदा होगा?
सीएम-इन्स्पायर मेघालय सरकार का एक कार्यक्रम है जो यूपीएससी सहित राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को संस्थागत सहायता देता है। इसके तहत प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण उम्मीदवारों को ₹50,000 की आर्थिक मदद दी जाती है।
'एसेंट 2026' सेमिनार कहाँ और किसने आयोजित किया?
'एसेंट 2026' सेमिनार मेघालय एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (MATI) द्वारा शिलांग के मावदियांगडियांग में 12 अगस्त 2026 को आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।
मेघालय का स्टार प्रोग्राम क्या है और यूपीएससी से इसका क्या संबंध है?
स्टार प्रोग्राम के तहत राज्य सरकार ने खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए गाँवों में 30,000 युवाओं की स्क्रीनिंग की और 10 एथलीटों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सीएम संगमा ने कहा कि यही मॉडल — प्रतिभा पहचान, बड़ा लक्ष्य, सहायता प्रणाली — अब यूपीएससी तैयारी पर भी लागू किया जा रहा है।
मेघालय यूपीएससी में पिछड़ा क्यों है?
सीएम संगमा के अनुसार, राज्य में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन ट्रेनिंग, मेंटरशिप, आर्थिक सहायता और मार्गदर्शन का समग्र इकोसिस्टम अभी तक पर्याप्त रूप से विकसित नहीं हो पाया है। दिल्ली-केंद्रित कोचिंग उद्योग तक पहुँच की सीमितता भी एक बड़ी बाधा रही है।
2036 ओलंपिक में मेघालय का क्या लक्ष्य है?
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि स्टार प्रोग्राम के तहत चुने गए 10 एथलीटों में से कम से कम एक 2036 के ओलंपिक खेलों में पदक जीते। इन एथलीटों को शिक्षा, पोषण, मनोवैज्ञानिक परामर्श, फिजियोथेरेपी और विशेष कोचिंग दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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