इस्लामाबाद में तीन अवैध कॉल सेंटरों पर छापा, चीनी नागरिकों समेत 212 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की राष्ट्रीय साइबर अपराध जाँच एजेंसी (NCCIA) ने 27 सितंबर 2026 को इस्लामाबाद के E-11 और G-10 सेक्टरों में तीन अवैध कॉल सेंटरों पर छापेमारी कर 212 लोगों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार व्यक्तियों में पाकिस्तानी और चीनी नागरिक दोनों शामिल हैं, हालाँकि अधिकारियों ने चीनी नागरिकों की सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया है।
किस तरह चल रहा था ठगी का कारोबार
रिपोर्टों के अनुसार, ये तीनों कॉल सेंटर एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन धोखाधड़ी नेटवर्क से जुड़े थे। इनके ज़रिए मुख्यतः तीन तरह के साइबर अपराध किए जा रहे थे — टास्क फ्रॉड, रोमांस/लव-डेटिंग स्कैम और गूगल प्रतिनिधि बनकर ठगी।
टास्क फ्रॉड में आरोपी पीड़ितों को वीडियो लाइक करने, उत्पादों की रेटिंग देने या सामग्री का प्रचार करने जैसे छोटे-छोटे ऑनलाइन काम देकर पैसे कमाने का लालच देते थे। कथित तौर पर शुरुआत में मामूली भुगतान कर पीड़ित का भरोसा जीता जाता था, और फिर अधिक कमाई का झाँसा देकर बड़ी रकम ऐंठी जाती थी।
बरामद उपकरण और साक्ष्य
NCCIA के प्रवक्ता के अनुसार, छापेमारी के दौरान 383 कंप्यूटर और CPU, 306 मोबाइल फोन तथा 299 मॉनिटर और लैपटॉप ज़ब्त किए गए। इतनी बड़ी मात्रा में उपकरणों की बरामदगी इन कॉल सेंटरों के संगठित और व्यापक स्वरूप को दर्शाती है।
पिछली कार्रवाइयों से तुलना
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की संलिप्तता वाले साइबर अपराध नेटवर्क को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि जुलाई 2025 में भी NCCIA ने फैसलाबाद में एक फैक्ट्री पर छापा मारकर 149 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें 48 चीनी नागरिक शामिल थे। उस मामले में आरोपी बैंकों की इंटरनेट प्रणालियों को हैक करने और अन्य साइबर अपराधों में संलिप्त थे।
इस्लामाबाद की ताज़ा कार्रवाई उस पैटर्न को और पुख्ता करती है — संगठित अपराध गिरोह पाकिस्तान की सरज़मीं का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय पीड़ितों को निशाना बनाने के लिए कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि गिरफ्तार व्यक्तियों से पूछताछ जारी है और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सूत्रों तक पहुँचने के प्रयास किए जा रहे हैं। चीनी नागरिकों की गिरफ्तारी के मद्देनज़र राजनयिक स्तर पर भी स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। यह मामला पाकिस्तान में साइबर अपराध से निपटने की कानूनी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की परीक्षा भी है।