ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: आसियान देश आर्थिक-कूटनीतिक विविधता के लिए क्यों देख रहे हैं ब्रिक्स की ओर
सारांश
मुख्य बातें
ब्रिक्स में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की बढ़ती रुचि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव के बीच रणनीतिक स्वायत्तता और साझेदारियों में विविधता लाने की व्यापक कोशिश को दर्शाती है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर, 2026 को भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने आसियान देशों के बीच इस समूह की बढ़ती प्रासंगिकता को नए सिरे से रेखांकित किया है।
शिखर सम्मेलन का संदर्भ और थीम
यह शिखर सम्मेलन 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' थीम के तहत आयोजित किया गया। इसमें राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, तथा सांस्कृतिक एवं लोगों से लोगों के बीच सहयोग को मज़बूत करने पर ज़ोर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और पश्चिमी देशों की बढ़ती संरक्षणवादी नीतियाँ दक्षिण-पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को नए विकल्पों की ओर धकेल रही हैं।
आसियान की रुचि क्यों महत्वपूर्ण है
आसियान ने परंपरागत रूप से खुद को छोटी और मध्यम शक्तियों के लिए एक क्षेत्रीय मंच के रूप में स्थापित किया है, जो ज़बरदस्ती के बजाय परामर्श और सहयोग पर ज़ोर देता है। ब्रिक्स को अब दक्षिण-पूर्व एशिया में एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है जिसके ज़रिए देश 'पश्चिम बनाम बाकी दुनिया' की द्विआधारी सोच को अपनाए बिना अपने आर्थिक और कूटनीतिक जुड़ावों में विविधता ला सकते हैं। गौरतलब है कि यह प्रवृत्ति उन देशों में सबसे प्रबल दिखती है जो एक साथ अमेरिका और चीन दोनों के साथ जटिल संबंध रखते हैं।
फिलीपींस: दक्षिण चीन सागर विवाद के बीच नया संतुलन
फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने आसियान अध्यक्ष और आउटरीच देश के प्रतिनिधि के रूप में नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भाग लिया। उन्होंने कहा कि आसियान देश शांति, समावेशी विकास, सतत विकास और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को आगे बढ़ाने पर ब्रिक्स के साथ जुड़ेंगे। रिपोर्टों के अनुसार, यह जुड़ाव दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ फिलीपींस के संप्रभुता विवाद के बीच आया है — ब्रिक्स मनीला को बीजिंग के साथ सीधे टकराव से बचते हुए अपने जुड़ाव को व्यापक बनाने का एक अतिरिक्त मंच प्रदान कर सकता है।
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और फिलीपींस ने रक्षा, व्यापार, अंतरिक्ष और बुनियादी ढाँचे में अपनी रणनीतिक साझेदारी के विस्तार पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि फिलीपींस ने 2022 में भारत की ब्रह्मोस एंटी-शिप क्रूज मिसाइल का तट-आधारित संस्करण खरीदा था और उसकी लॉन्च प्रणालियों की डिलीवरी अप्रैल 2024 में शुरू हुई थी।
वियतनाम और मलेशिया: बाज़ारों में विविधता की तलाश
वियतनाम 2025 में ब्रिक्स का भागीदार देश बना। वियतनामी प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में भाग लिया। भारत में वियतनामी राजदूत के अनुसार, इस जुड़ाव के ज़रिए वियतनाम विकासशील देशों की आवाज़ को मज़बूत करना चाहता है और साथ ही बाज़ारों तथा भागीदारों में विविधता लाने के अतिरिक्त अवसर तलाश रहा है। भारत और वियतनाम ने शिखर सम्मेलन के दौरान रक्षा और समुद्री सहयोग को मज़बूत करने पर सहमति जताई।
मलेशिया, जो ब्रिक्स का एक अन्य भागीदार देश है, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच इस समूह को उभरते बाज़ारों के साथ जुड़ाव बढ़ाने के एक रास्ते के रूप में देख रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, भारत एशिया में मलेशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जून 2026 तक मलेशिया में भारतीय कंपनियों की 293 स्वीकृत विनिर्माण परियोजनाएँ थीं, जिनकी कुल लागत 2.95 अरब अमेरिकी डॉलर है और इनसे 28,455 नौकरियाँ पैदा होने की उम्मीद है।
इंडोनेशिया और भारत की भूमिका
ब्रिक्स का एकमात्र पूर्ण आसियान सदस्य इंडोनेशिया इस समूह को ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मज़बूत करने और अधिक लचीली वैश्विक व्यापार एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के मंच के रूप में देखता है। विश्लेषकों के अनुसार, ब्रिक्स में आसियान की बढ़ती रुचि भारत के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ आर्थिक और रणनीतिक जुड़ाव को गहरा करने के उल्लेखनीय अवसर पैदा करती है। यह भी तर्क दिया जा रहा है कि भारत की सक्रिय मौजूदगी यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है कि ब्रिक्स किसी एक शक्ति — विशेष रूप से चीन — के प्रभुत्व वाला बनने के बजाय व्यापक ग्लोबल साउथ सहयोग का मंच बना रहे। आगे देखें तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ब्रिक्स-आसियान संवाद केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहता है या ठोस आर्थिक और सुरक्षा साझेदारियों में तब्दील होता है।