9 सितंबर 2026
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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले FIEO की माँग: ग्लोबल साउथ संबंधों को निर्यात-निवेश में बदले भारत

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18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले FIEO की माँग: ग्लोबल साउथ संबंधों को निर्यात-निवेश में बदले भारत

सारांश

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा। FIEO का कहना है कि यह केवल राजनयिक मंच नहीं, बल्कि भारत के लिए ग्लोबल साउथ की 26% वैश्विक व्यापार हिस्सेदारी में पैठ बनाने और MSME से लेकर फार्मा तक के क्षेत्रों में निर्यात-निवेश की ठोस बढ़त हासिल करने का असली मौका है।

मुख्य बातें

FIEO ने 9 सितंबर 2026 को कहा कि 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ग्लोबल साउथ संबंधों को व्यापार और निवेश में बदलने का बड़ा अवसर है।
शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा।
ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएँ संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26% हिस्सेदारी रखती हैं।
रहलान ने आसान बाज़ार पहुँच, मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला, निवेश प्रवाह और कुशल भुगतान तंत्र को प्राथमिकता बताया।
FIEO ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और MSME के लिए भुगतान अनिश्चितता दूर करने की माँग की।
भारत के पास फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग सामान, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल सेवाओं में निर्यात अवसर चिह्नित किए गए हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (FIEO) ने बुधवार, 9 सितंबर 2026 को कहा कि नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाला 18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए ग्लोबल साउथ के साथ बढ़ते रणनीतिक संबंधों को निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं के ठोस लाभ में परिवर्तित करने का एक दुर्लभ अवसर है। उद्योग संगठन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स समूह के विस्तार के बाद भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति नए सिरे से परिभाषित हो रही है।

मुख्य माँगें और व्यावहारिक प्राथमिकताएँ

FIEO ने शिखर सम्मेलन से कारोबारियों के लिए मापनीय परिणामों की अपेक्षा जताई है। संगठन ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेज़ी, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी, अधिक नियामकीय पारदर्शिता, मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन की पारस्परिक मान्यता, बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, डिजिटल व्यापार दस्तावेज़ीकरण और सीमा पार भुगतान को सरल बनाने जैसे बिंदुओं को प्राथमिकता सूची में रखा है।

FIEO के अध्यक्ष एस.सी. रहलान ने कहा, 'ब्रिक्स को रणनीतिक संवाद से आगे बढ़कर ऐसे वाणिज्यिक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए जिन्हें मापा जा सके। भारतीय कारोबारियों के लिए इसकी वास्तविक उपयोगिता आसान बाज़ार पहुँच, मज़बूत आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी, निवेश प्रवाह, प्रौद्योगिकी सहयोग और कुशल भुगतान तंत्र में होगी।'

भारत के लिए निर्यात अवसर

रहलान के अनुसार, भारत के पास इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कपड़ा और परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। विस्तारित ब्रिक्स समूह — जो एशिया, अफ्रीका, खाड़ी, लैटिन अमेरिका और यूरेशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं तक फैला है — भारतीय निर्यातकों को एक व्यापक आर्थिक पहुँच प्रदान करता है।

आँकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएँ संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं, जो भारत को अपने पारंपरिक बाज़ारों से परे निर्यात में विविधता लाने का एक महत्त्वपूर्ण मंच देती हैं।

आपूर्ति श्रृंखला और खनिज संसाधनों तक पहुँच

रहलान ने यह भी रेखांकित किया कि ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर सहयोग से भारत की महत्त्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, पूंजी और नई विनिर्माण साझेदारियों तक पहुँच में सुधार हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया, 'अवसर केवल ब्रिक्स देशों को अधिक सामान बेचने का नहीं है। भारत को इन अर्थव्यवस्थाओं में विकसित हो रही उत्पादन, सोर्सिंग और वैल्यू चेन का अभिन्न हिस्सा बनना चाहिए।'

स्थानीय मुद्रा भुगतान और MSME की भूमिका

FIEO ने स्थानीय मुद्राओं में ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार निपटान के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। रहलान ने कहा, 'भुगतान को लेकर अनिश्चितता खुद एक व्यापार बाधा बन सकती है। कुशल, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप भुगतान व्यवस्था लेनदेन की लागत कम कर सकती है और खासकर MSME सहित कारोबारियों का नए बाज़ारों में प्रवेश को लेकर भरोसा बढ़ा सकती है।'

इसके साथ ही, FIEO ने ब्रिक्स के भीतर बिजनेस-टू-बिजनेस संपर्क को मज़बूत करने के लिए क्षेत्र-विशेष के खरीदार-विक्रेता सम्मेलन, निवेश साझेदार खोज व्यवस्था, तकनीकी साझेदारी, संयुक्त उद्यम और नियमित व्यापार प्रतिनिधिमंडल की माँग की है। गौरतलब है कि यह माँग ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी बाज़ारों में भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण भारतीय निर्यातक वैकल्पिक गंतव्यों की तलाश में हैं।

आगे की राह

12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले इस शिखर सम्मेलन के परिणाम यह तय करेंगे कि भारत ब्रिक्स मंच का उपयोग महज़ राजनयिक संवाद के लिए करता है या वास्तविक व्यापार और निवेश वृद्धि के एक इंजन के रूप में। उद्योग जगत की नज़रें अब सरकारी प्रतिनिधिमंडल द्वारा की जाने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं और घोषणाओं पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रिक्स मंच पर की गई घोषणाएँ अतीत में कितनी बार ज़मीन पर उतरी हैं। ब्रिक्स के पिछले कई शिखर सम्मेलनों में व्यापार सुगमता और स्थानीय मुद्रा भुगतान के वादे हुए, लेकिन क्रियान्वयन की गति धीमी रही। विस्तारित ब्रिक्स में 26% वैश्विक व्यापार हिस्सेदारी एक आकर्षक संख्या है, पर यह भी सच है कि इन देशों के साथ भारत के व्यापार घाटे और भुगतान जोखिम की चुनौतियाँ अभी अनसुलझी हैं। MSME को नए बाज़ारों में ले जाने का संकल्प तब तक कागज़ी रहेगा जब तक सीमा पार भुगतान और नियामकीय पारदर्शिता के लिए बाध्यकारी ढाँचा नहीं बनता।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब और कहाँ होगा?
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होगा। यह भारत की अध्यक्षता में हो रहा है और इसमें विस्तारित ब्रिक्स समूह के सदस्य देश भाग लेंगे।
FIEO ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से क्या माँगें रखी हैं?
FIEO ने सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेज़ी, गैर-टैरिफ बाधाओं में कमी, डिजिटल व्यापार दस्तावेज़ीकरण, सीमा पार भुगतान सरलीकरण और मानकों की पारस्परिक मान्यता जैसे व्यावहारिक परिणामों की माँग की है। संगठन का कहना है कि ब्रिक्स को रणनीतिक संवाद से आगे बढ़कर मापनीय वाणिज्यिक नतीजों पर ध्यान देना चाहिए।
ब्रिक्स देशों की वैश्विक व्यापार में कितनी हिस्सेदारी है?
आँकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाएँ संयुक्त रूप से वैश्विक व्यापार में करीब 26 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं। यह भारत को पारंपरिक बाज़ारों से परे निर्यात विविधीकरण का एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
भारत के लिए ब्रिक्स के ज़रिए कौन-से क्षेत्रों में निर्यात अवसर हैं?
FIEO के अनुसार, भारत के पास इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, कपड़ा और परिधान, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य एवं कृषि उत्पाद, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल सेवाओं में पर्याप्त अवसर हैं। इन क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों की माँग तेज़ी से बढ़ रही है।
FIEO ने स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान पर ज़ोर क्यों दिया?
FIEO अध्यक्ष एस.सी. रहलान के अनुसार, भुगतान को लेकर अनिश्चितता खुद एक व्यापार बाधा बन सकती है। स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान से लेनदेन की लागत घटेगी और विशेष रूप से MSME का नए बाज़ारों में प्रवेश करने का भरोसा बढ़ेगा।
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