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ब्रिक्स 2026 दिल्ली डिक्लेरेशन: सर्वसम्मति बनाना भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत — विशेषज्ञ

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ब्रिक्स 2026 दिल्ली डिक्लेरेशन: सर्वसम्मति बनाना भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत — विशेषज्ञ

सारांश

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने जो सबसे बड़ा काम किया, वह था — तमाम वैचारिक मतभेदों के बावजूद सभी सदस्य देशों को दिल्ली डिक्लेरेशन पर एकमत करना। 32 प्रतिनिधिमंडल, दुनिया की आधी आबादी और वैश्विक GDP का 30% — यह भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का अब तक का सबसे बड़ा इम्तिहान था।

मुख्य बातें

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की फेलो इंद्राणी तालुकदार ने दिल्ली डिक्लेरेशन पर सर्वसम्मति को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया।
18वाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ।
सम्मेलन में 32 प्रतिनिधिमंडल शामिल — 11 सदस्य देश , 10 साझेदार देश , 4 क्षेत्रीय और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठन ।
पुतिन, शी जिनपिंग, रामाफोसा, पेजेश्कियन, अल-सीसी सहित कई राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में उपस्थित रहे।
ब्रिक्स देश वैश्विक उत्पादन का 30% और व्यापार का पाँचवाँ हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं।
IMF के अनुसार 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की विकास दर जी7 से तीन गुना होगी।

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली डिक्लेरेशन के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति प्राप्त करना भारत की अध्यक्षता की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही। चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की फेलो इंद्राणी तालुकदार ने मंगलवार को यह राय व्यक्त की। उनके अनुसार, इस सर्वसम्मति ने वैश्विक मंच पर भारत की साख को नई ऊँचाई दी है।

दिल्ली डिक्लेरेशन की अहमियत

तालुकदार ने कहा कि ब्रिक्स समिट की सफलता को सबसे स्पष्ट रूप से दिल्ली डिक्लेरेशन दर्शाता है, जिसमें भारत सभी सदस्य देशों को एकजुट कर एक साझा सहमति बनाने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक छवि को और मज़बूत करती है, जो आने वाले समय में देश के कूटनीतिक हितों की पूर्ति में सहायक होगी।

भू-राजनीतिक महत्व और ग्लोबल साउथ की आवाज़

भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता महत्वपूर्ण रही। तालुकदार के अनुसार, सम्मेलन में पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया और 'ग्लोबल नॉर्थ' के साथ मिलकर काम करने की कोशिश की गई। साथ ही एनर्जी सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर भी चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व की माँग बढ़ रही है।

विदेश मंत्री जयशंकर का आकलन

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता पर कहा कि पूरे देश और दुनिया ने इस आयोजन की कामयाबी को देखा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिनमें 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल थे। जयशंकर ने रेखांकित किया कि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सशक्त वैश्विक भूमिका रही।

कौन-कौन से राष्ट्राध्यक्ष हुए शामिल

अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के स्तर पर हुआ। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी प्रमुख रूप से शामिल रहे।

ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक वज़न

गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों में विश्व की लगभग आधी आबादी निवास करती है। आर्थिक उत्पादन के मामले में ये देश वैश्विक उत्पादन के करीब 30 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी पाँचवाँ भाग है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार, 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की आर्थिक विकास दर जी7 की तुलना में तीन गुना हो जाएगी। भारत की अध्यक्षता में इस समूह को नई दिशा मिली है और आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव का विस्तार होना तय माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की उथल-पुथल ने ब्रिक्स के भीतर भी वैचारिक खाई गहरी की है। लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह डिक्लेरेशन महज काग़ज़ी सहमति है या इसमें एनर्जी सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा पर ठोस क्रियान्वयन तंत्र भी है। IMF का 'तीन गुना विकास दर' वाला अनुमान आकर्षक है, पर ब्रिक्स की आंतरिक आर्थिक विषमताएँ — चीन की धीमी होती अर्थव्यवस्था से लेकर अफ्रीकी सदस्यों की संरचनात्मक चुनौतियाँ — इस संख्या को कहीं अधिक जटिल बनाती हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स 2026 दिल्ली डिक्लेरेशन क्या है?
दिल्ली डिक्लेरेशन 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026, नई दिल्ली) का साझा घोषणापत्र है, जिस पर सभी सदस्य देशों ने सहमति जताई। इसमें एनर्जी सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर सामूहिक रुख शामिल है।
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल क्यों माना जा रहा है?
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की फेलो इंद्राणी तालुकदार के अनुसार, भारत सभी सदस्य देशों को एक साझा डिक्लेरेशन पर एकमत करने में सफल रहा, जो बहुपक्षीय मतभेदों के बीच असाधारण उपलब्धि है। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी सम्मेलन में 32 प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी को इसकी व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण बताया।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कौन-से प्रमुख नेता शामिल हुए?
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद और यूएई के क्राउन प्रिंस शामिल रहे।
ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक प्रभाव कितना बड़ा है?
ब्रिक्स देश विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक आर्थिक उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी करीब 30 प्रतिशत है। IMF के अनुमान के अनुसार, 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की विकास दर जी7 से तीन गुना हो सकती है।
ब्रिक्स 2026 में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में एनर्जी सिक्योरिटी, समुद्री सुरक्षा, पश्चिम एशिया के मुद्दे और 'ग्लोबल नॉर्थ' के साथ सहयोग के रास्तों पर विचार-विमर्श हुआ। ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज़ को मज़बूती देना भी इस सम्मेलन के केंद्रीय एजेंडे में था।
राष्ट्र प्रेस
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