ब्रिक्स 2026 दिल्ली डिक्लेरेशन: सर्वसम्मति बनाना भारत की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत — विशेषज्ञ
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर 2026 को संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिल्ली डिक्लेरेशन के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति प्राप्त करना भारत की अध्यक्षता की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही। चिंतन रिसर्च फाउंडेशन की फेलो इंद्राणी तालुकदार ने मंगलवार को यह राय व्यक्त की। उनके अनुसार, इस सर्वसम्मति ने वैश्विक मंच पर भारत की साख को नई ऊँचाई दी है।
दिल्ली डिक्लेरेशन की अहमियत
तालुकदार ने कहा कि ब्रिक्स समिट की सफलता को सबसे स्पष्ट रूप से दिल्ली डिक्लेरेशन दर्शाता है, जिसमें भारत सभी सदस्य देशों को एकजुट कर एक साझा सहमति बनाने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक छवि को और मज़बूत करती है, जो आने वाले समय में देश के कूटनीतिक हितों की पूर्ति में सहायक होगी।
भू-राजनीतिक महत्व और ग्लोबल साउथ की आवाज़
भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से भी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता महत्वपूर्ण रही। तालुकदार के अनुसार, सम्मेलन में पश्चिम एशिया से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया और 'ग्लोबल नॉर्थ' के साथ मिलकर काम करने की कोशिश की गई। साथ ही एनर्जी सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर भी चर्चा हुई। यह ऐसे समय में आया है जब ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज़ को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अधिक प्रतिनिधित्व की माँग बढ़ रही है।
विदेश मंत्री जयशंकर का आकलन
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता पर कहा कि पूरे देश और दुनिया ने इस आयोजन की कामयाबी को देखा। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कुल 32 प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया, जिनमें 11 सदस्य देश, 10 साझेदार देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल थे। जयशंकर ने रेखांकित किया कि सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सशक्त वैश्विक भूमिका रही।
कौन-कौन से राष्ट्राध्यक्ष हुए शामिल
अधिकांश देशों का प्रतिनिधित्व राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख के स्तर पर हुआ। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद, यूएई के क्राउन प्रिंस और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
ब्रिक्स का वैश्विक आर्थिक वज़न
गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों में विश्व की लगभग आधी आबादी निवास करती है। आर्थिक उत्पादन के मामले में ये देश वैश्विक उत्पादन के करीब 30 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि वैश्विक व्यापार में इनकी हिस्सेदारी पाँचवाँ भाग है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के अनुसार, 2028 तक 'ग्रेटर ब्रिक्स' की आर्थिक विकास दर जी7 की तुलना में तीन गुना हो जाएगी। भारत की अध्यक्षता में इस समूह को नई दिशा मिली है और आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव का विस्तार होना तय माना जा रहा है।