सीजेपी प्रदर्शन रोकना 'लोकतंत्र का काला दिन': AAP के सौरभ भारद्वाज बोले — BJP बदलाव नहीं रोक पाएगी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में सीजेपी (CJP) के विरोध प्रदर्शन को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सरकार के कथित निर्देश पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बेरहमी से कार्रवाई की। AAP नेता गोपाल राय ने इस पूरी कार्रवाई को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का 'काला दिन' करार दिया।
क्या हुआ प्रदर्शन के दौरान
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान AAP के पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया, घसीटा और थानों में ले गई। उनके अनुसार, कई कार्यकर्ताओं को दो दिनों से अधिक हिरासत में रखा गया। भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस कथित तौर पर दक्षिणपंथी तत्वों को संरक्षण दे रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर पड़ सकता है।
व्यापक प्रतिबंध और युवाओं का जोश
भारद्वाज ने बताया कि प्रशासन ने प्रदर्शन को रोकने के लिए मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदी लगाई, सीमाएँ सील कीं और इंटरनेट सेवाएँ भी बाधित की गईं। इन सभी बाधाओं के बावजूद, उनके दावे के अनुसार, करीब 7,000 युवा गिरफ्तारी देने के लिए तैयार थे। उन्होंने इसे देश में आसन्न बदलाव का संकेत बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बदलाव को रोकने में सक्षम नहीं होगी।
गोपाल राय का 'ब्लैक इमरजेंसी' वाला आरोप
आप नेता गोपाल राय ने केंद्र की मोदी सरकार पर देश में 'ब्लैक इमरजेंसी' थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई देश और लोकतंत्र को बचाने की है। राय ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कार्रवाई और एसआईआर (SIR) प्रक्रिया समाप्त करने की माँग की, साथ ही निष्पक्ष चुनाव कराने पर जोर दिया।
विपक्षी एकता और कांग्रेस की भूमिका
सौरभ भारद्वाज ने कांग्रेस की भूमिका पर कहा कि पार्टी को क्या करना चाहिए, यह उसका अपना निर्णय है। हालाँकि उन्होंने कहा कि जब भी युवा सीजेपी, वामपंथी छात्र संगठनों या AAP के छात्र संगठन के आह्वान पर सड़क पर उतरते हैं, तब विभिन्न विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता स्वाभाविक रूप से उनके साथ जुड़ जाते हैं। उन्होंने इसे जनता का आंदोलन बताया।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विपक्षी राजनीति तेज़ हो रही है और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं। AAP नेताओं के आरोप और माँगें आने वाले दिनों में राजनीतिक और न्यायिक दोनों मोर्चों पर बड़ी बहस को जन्म दे सकती हैं।