भजनलाल शर्मा की बांसवाड़ा के आदिवासी गांव में चौपाल, हिरन नदी पर बांध समेत कई मांगें मंजूर
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 21 मई 2026 को बांसवाड़ा जिले के दूरदराज आदिवासी गांव चूड़ा का दौरा किया और राज्य सरकार की 'ग्राम विकास चौपाल' पहल के तहत ग्रामीणों से सीधी बातचीत की। बुधवार रात चौपाल लगाने के बाद मुख्यमंत्री गुरुवार सुबह पुनः गांव पहुँचे, गलियों में पैदल घूमे और स्थानीय निवासियों की समस्याएँ सुनीं।
चौपाल में उठे मुद्दे और तत्काल निर्देश
मुख्यमंत्री ने एक पीपल के पेड़ के नीचे चौपाल लगाई, जहाँ ग्रामीणों ने पेयजल आपूर्ति, बुनियादी ढाँचे और स्थानीय विकास से जुड़े सवाल उठाए। इन माँगों पर तत्काल संज्ञान लेते हुए शर्मा ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि सिंचाई और पीने के पानी की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए हिरन नदी पर एक छोटा बांध बनाया जाए।
मंजूर किए गए विकास कार्य
चाय-चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कई स्थानीय माँगों को मौके पर ही स्वीकृति दी। थुम्मथ गांव में 'माँ बारी केंद्र' के निर्माण के लिए ₹16.20 लाख, थुम्मथ चौराहे पर सिंगल-फेज ट्यूबवेल के लिए ₹20 लाख और चूड़ा गांव में 'माँ बालेश्वर दयाल मंदिर परिसर' में इंटरलॉकिंग व सौंदर्यीकरण के लिए ₹7 लाख की मंजूरी दी गई। इसके अतिरिक्त अधिकारियों को सरकारी स्कूल में दो क्लासरूम बनाने और गांव के पास एक दूध कलेक्शन सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए।
भ्रष्टाचार की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई
चौपाल के दौरान कर्मचारियों ने कुशलगढ़ ब्लॉक के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गिरीश भाभोर पर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने डॉ. भाभोर को 'पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा' (APO) में डाल दिया।
मानवीय स्पर्श: सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बच्चे की माँ की अपील
रोशनी कलाल ने मुख्यमंत्री से अपने पति हेमंत कुमार कलाल — जो जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में सहायक अभियंता हैं — का तबादला सगवाड़ा से बांसवाड़ा करने का अनुरोध किया, ताकि उनके सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बेटे के इलाज में सुविधा हो सके। शर्मा ने मौके पर ही निर्देश दिए और बांसवाड़ा स्थित कार्यकारी अभियंता कार्यालय में तबादले के आदेश जारी कर दिए गए।
जल संरक्षण और खेती पर जोर
किसानों और ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शर्मा ने कहा, 'पानी का कोई विकल्प नहीं है — हर बूंद का समझदारी से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।' उन्होंने सूक्ष्म-सिंचाई, वर्षा जल संचयन, तालाब निर्माण और आधुनिक कृषि पद्धतियाँ अपनाने का आग्रह किया। साथ ही किसानों को आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और फलों की खेती को परंपरागत खेती के साथ जोड़ने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने 'माँ बारी केंद्र' का भी दौरा किया, बच्चों से बातचीत की और उनमें चॉकलेट वितरित की। दौरे की शुरुआत में उन्होंने संत मामा बालेश्वर दयाल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह दौरा पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय दर्शन को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा बताया जा रहा है।