त्रिपुरा बाढ़: CM माणिक साहा का प्रभावित इलाकों का दौरा, बोले- स्थायी समाधान पर काम कर रही सरकार
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 23 अगस्त को पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस बार-बार आने वाली आपदा का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में 17 राहत शिविर खोले गए हैं, जहाँ 413 परिवारों के कुल 1,305 लोग शरण लिए हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री साहा ने बर्दोवाली स्थित विवेकानंद स्कूल और आश्रम चौमुहानी में बने राहत शिविरों का दौरा किया, प्रभावित लोगों से बातचीत की और राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम त्रिपुरा जिले में बरमुरा पहाड़ियों में हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में अचानक पानी भर गया।
साहा ने कहा, ‘हावड़ा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है, जो एक अच्छा संकेत है। फिलहाल बारिश नहीं हो रही है।’
राहत और बचाव की स्थिति
मुख्यमंत्री के अनुसार, आपदा प्रतिक्रिया टीमें मौके पर तैनात हैं और नावों की भी व्यवस्था की गई है। शिविरों में शरण लेने वाले लोगों के लिए भोजन, शिशु आहार सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों को रिजर्व में रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
साहा ने कहा, ‘पार्षद, पार्टी कार्यकर्ता और अन्य लोग 24 घंटे काम कर रहे हैं। हम स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए हैं। पश्चिम जिला सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है।’
स्थायी समाधान की तलाश
यह ऐसे समय में आया है जब त्रिपुरा को लगातार दूसरे वर्ष बाढ़ की गंभीर मार झेलनी पड़ी है — अगस्त 2024 में भी राज्य में ऐसी ही स्थिति बनी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ था। गौरतलब है कि पड़ोसी बांग्लादेश की ओर से आने वाले जल-प्रवाह और बरमुरा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक बनावट राज्य को मौसमी बाढ़ के लिए अत्यंत संवेदनशील बनाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के विकल्पों का अध्ययन कर रही है। तटबंधों का निर्माण किया गया है और आगे भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। हालाँकि प्रकृति से मुकाबला नहीं किया जा सकता। हमारी ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।’
प्रशासनिक तैयारी
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राजस्व, राहत, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव मिलिंद रामटेके, पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। साहा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक बिना किसी देरी के हर ज़रूरी सहायता पहुँचाई जाए।
क्या होगा आगे
राज्य प्रशासन जल-स्तर पर सतत निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। दीर्घकालिक तटबंध-निर्माण और जल-निकासी परियोजनाओं का ब्यौरा आने वाले हफ़्तों में सामने आने की संभावना है।