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त्रिपुरा बाढ़: CM माणिक साहा का प्रभावित इलाकों का दौरा, बोले- स्थायी समाधान पर काम कर रही सरकार

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त्रिपुरा बाढ़: CM माणिक साहा का प्रभावित इलाकों का दौरा, बोले- स्थायी समाधान पर काम कर रही सरकार

सारांश

त्रिपुरा में लगातार दूसरे वर्ष बाढ़ की तबाही के बीच CM माणिक साहा ने पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई का दौरा कर 17 राहत शिविरों में रह रहे 1,305 प्रभावितों से मुलाकात की। हावड़ा नदी खतरे के निशान से नीचे उतरने लगी है, NDRF रिजर्व में तैनात। सरकार ने बार-बार आती बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशने का भरोसा दिलाया।

मुख्य बातें

CM माणिक साहा ने 23 अगस्त को पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
प्रभावित इलाकों में 17 राहत शिविर खोले गए, जहाँ 413 परिवारों के 1,305 लोग ठहरे हैं।
हावड़ा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर गया था, अब धीरे-धीरे घट रहा है।
NDRF की टीमें रिजर्व में तैनात; नावों और आपदा प्रतिक्रिया दलों की व्यवस्था।
अगस्त 2024 में भी राज्य में ऐसी ही बाढ़ की स्थिति बनी थी; सरकार स्थायी समाधान के विकल्पों का अध्ययन कर रही है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 23 अगस्त को पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिलों के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस बार-बार आने वाली आपदा का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में 17 राहत शिविर खोले गए हैं, जहाँ 413 परिवारों के कुल 1,305 लोग शरण लिए हुए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री साहा ने बर्दोवाली स्थित विवेकानंद स्कूल और आश्रम चौमुहानी में बने राहत शिविरों का दौरा किया, प्रभावित लोगों से बातचीत की और राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि पश्चिम त्रिपुरा जिले में बरमुरा पहाड़ियों में हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में अचानक पानी भर गया।

साहा ने कहा, ‘हावड़ा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे पानी कम हो रहा है, जो एक अच्छा संकेत है। फिलहाल बारिश नहीं हो रही है।’

राहत और बचाव की स्थिति

मुख्यमंत्री के अनुसार, आपदा प्रतिक्रिया टीमें मौके पर तैनात हैं और नावों की भी व्यवस्था की गई है। शिविरों में शरण लेने वाले लोगों के लिए भोजन, शिशु आहार सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों को रिजर्व में रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

साहा ने कहा, ‘पार्षद, पार्टी कार्यकर्ता और अन्य लोग 24 घंटे काम कर रहे हैं। हम स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए हैं। पश्चिम जिला सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है।’

स्थायी समाधान की तलाश

यह ऐसे समय में आया है जब त्रिपुरा को लगातार दूसरे वर्ष बाढ़ की गंभीर मार झेलनी पड़ी है — अगस्त 2024 में भी राज्य में ऐसी ही स्थिति बनी थी, जिसमें बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ था। गौरतलब है कि पड़ोसी बांग्लादेश की ओर से आने वाले जल-प्रवाह और बरमुरा जैसे पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक बनावट राज्य को मौसमी बाढ़ के लिए अत्यंत संवेदनशील बनाती है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के विकल्पों का अध्ययन कर रही है। तटबंधों का निर्माण किया गया है और आगे भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। हालाँकि प्रकृति से मुकाबला नहीं किया जा सकता। हमारी ओर से पूरी सतर्कता बरती जा रही है।’

प्रशासनिक तैयारी

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान राजस्व, राहत, पुनर्वास एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव मिलिंद रामटेके, पश्चिम त्रिपुरा के जिला मजिस्ट्रेट विशाल कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। साहा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक बिना किसी देरी के हर ज़रूरी सहायता पहुँचाई जाए।

क्या होगा आगे

राज्य प्रशासन जल-स्तर पर सतत निगरानी बनाए हुए है और मौसम की स्थिति के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। दीर्घकालिक तटबंध-निर्माण और जल-निकासी परियोजनाओं का ब्यौरा आने वाले हफ़्तों में सामने आने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संरचनात्मक चुनौती बन चुकी है — 2024 के बाद यह दूसरा साल है जब पश्चिम जिला और हावड़ा बेसिन जल-भराव की चपेट में आए हैं। मुख्यमंत्री का ‘स्थायी समाधान’ का आश्वासन तभी विश्वसनीय बनेगा जब तटबंध-निर्माण और नदी-प्रबंधन की ठोस समयबद्ध योजना सार्वजनिक हो। बरमुरा पहाड़ियों की जल-निकासी क्षमता और बांग्लादेश-सीमा से आने वाले प्रवाह पर अंतरराज्यीय व द्विपक्षीय बातचीत के बिना, हर मॉनसून यह चक्र दोहराया जाएगा। असली परीक्षा राहत नहीं, रोकथाम है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में बाढ़ से कौन-से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
पश्चिम त्रिपुरा और खोवाई जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं, जहाँ बरमुरा पहाड़ियों में हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में अचानक पानी भर गया। मुख्यमंत्री माणिक साहा के अनुसार पश्चिम जिला सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है।
राहत शिविरों में कितने लोग शरण लिए हुए हैं?
प्रभावित क्षेत्रों में कुल 17 राहत शिविर खोले गए हैं, जहाँ 413 परिवारों के 1,305 लोग शरण लिए हुए हैं। शिविरों में भोजन, शिशु आहार सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ की गई हैं।
हावड़ा नदी के जलस्तर की मौजूदा स्थिति क्या है?
हावड़ा नदी का जलस्तर पहले खतरे के निशान से ऊपर चला गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे घट रहा है। मुख्यमंत्री ने इसे राहत भरा संकेत बताया और कहा कि फिलहाल बारिश भी नहीं हो रही है।
बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है?
राज्य सरकार बार-बार आने वाली बाढ़ का स्थायी समाधान तलाशने के लिए विभिन्न विकल्पों का अध्ययन कर रही है। तटबंधों का निर्माण किया जा चुका है और आगे भी कई कदम उठाए जाने की योजना है, हालाँकि मुख्यमंत्री ने माना कि प्रकृति से पूरी तरह मुकाबला संभव नहीं है।
क्या NDRF की टीमें तैनात की गई हैं?
हाँ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमों को रिजर्व में रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। इसके साथ ही नावों की व्यवस्था और आपदा प्रतिक्रिया दल मौके पर तैनात हैं।
राष्ट्र प्रेस
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