स्टिंग ऑपरेशन विवाद के बीच CM शिवकुमार का दिल्ली दौरा, कर्नाटक में राजनीतिक हलचल तेज
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके. शिवकुमार गुरुवार, 22 अक्टूबर को नई दिल्ली पहुँचे — ऐसे समय में जब कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाने वाले कथित स्टिंग ऑपरेशन को लेकर राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। इस दौरे ने कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर और पार्टी के बाहर एक साथ कई अटकलों को जन्म दे दिया है।
दौरे का आधिकारिक एजेंडा
आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, शिवकुमार की केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव तथा केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया से मुलाकात तय थी। इन बैठकों में मेकेदातु परियोजना, पश्चिमी घाट पर कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और महादायी नदी जल विवाद जैसे कर्नाटक से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी। मुख्यमंत्री का गुरुवार रात 10:25 बजे बेंगलुरु लौटने का कार्यक्रम था।
स्टिंग ऑपरेशन विवाद की पृष्ठभूमि
कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, शिवकुमार दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से भी मिल सकते हैं और स्टिंग ऑपरेशन से उपजे घटनाक्रम तथा पार्टी की छवि पर इसके संभावित असर पर चर्चा कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि सिद्दारमैया इस कथित स्टिंग ऑपरेशन से काफी आहत हैं। उन्होंने न्यायालय से एक आदेश प्राप्त किया है, जिसके तहत मीडिया संगठनों को उनसे जुड़े वीडियो कंटेंट प्रकाशित करने से रोका गया है। इसके साथ ही उन्होंने इस सामग्री को प्रसारित करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग करते हुए पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई है।
कुमारस्वामी का पलटवार और राजनीतिक तनाव
केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री एचडी. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि सिद्दारमैया से जुड़ा वीडियो जारी करने के पीछे स्वयं शिवकुमार का हाथ है। इस आरोप ने कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। कुमारस्वामी ने सिद्दारमैया की शिकायत के आधार पर जेडी (एस) कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई पर भी आपत्ति जताई और बेंगलुरु पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री शिवकुमार और कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के खिलाफ कड़े बयान दिए हैं। उन्होंने गुरुवार को जेडी (एस) मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, लेकिन मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक कार्य का हवाला देते हुए इसे टाल दिया।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार पिछले कुछ महीनों से भीतरी खींचतान के संकेत देती रही है। शिवकुमार और सिद्दारमैया के बीच सत्ता-संतुलन को लेकर अटकलें नई नहीं हैं। ऐसे में स्टिंग ऑपरेशन विवाद ने इन अंतर्विरोधों को और उजागर कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई बड़े बुनियादी ढाँचा विवाद — मेकेदातु और महादायी — अभी भी अनसुलझे हैं।
आगे की राह
मुख्यमंत्री शिवकुमार के दिल्ली दौरे के नतीजे — चाहे वे केंद्रीय मंत्रियों के साथ विकास परियोजनाओं पर हों या पार्टी नेतृत्व के साथ आंतरिक संकट-प्रबंधन पर — आने वाले दिनों में कर्नाटक कांग्रेस की आंतरिक स्थिरता और राज्य सरकार की दिशा तय करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।